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News (खबरीलाल न्यूज़) : देशभर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा आज, पूजा-विधि के साथ सवारी पर निकलेंगे भगवान:

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ओडिशा के पुरी में स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में आज रथयात्रा की शुरुआत होने जा रही है जहां पर पुरी ही नहीं देश के कई हिस्सों में भगवान जगन्नाथ की रथयात्राएं निकाली जाएगी। ओडिशा में दुनिया की सबसे बड़ी रथ यात्रा निकाली जाने वाली है जिसके लिए तैयारियों का दौर आज थम जाएगा। जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहेंगे इसके लिए प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है।

मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ साल में एक बार अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। पुरी के अलावा देश के कई जगहों में आज रथयात्रा भव्य होने वाली है।
मंगला आरती के साथ भगवान जगन्नाथ के अनुष्ठान हुए शुरू

आपको बताते चलें , ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ रथयात्रा के लिए पूजा अनुष्ठान शुरू होने लगे है। सुबह 6 बजे भगवान जगन्नाथ की मंगला आरती औऱ श्रृंगार हो रहा है। दैनिक पूजा-परंपराओं के बाद सुबह 9:30 बजे भगवान मंदिर से बाहर लाने की विधियां शुरू होंगी। इसके बाद रथों की पूजा कर बलभद्र, बहन सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को रथ में बैठाया जाएगा। यात्रा के कार्यक्रम के अनुसार, आगे दोपहर 3 बजे पुरी राजपरिवार के गजपति दिव्य सिंह देव रथ के आगे सोने के झाडू से बुहारा लगाकर रथ यात्रा की शुरुआत करेंगे।

वहीं पर बड़े हर्षोल्लास के साथ भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ करीब 3 किलोमीटर दूर गुंडिचा मंदिर जाएंगे। यह रथ यात्रा कुल 12 दिनों तक चलेगी और इसका समापन 8 जुलाई 2025 को नीलाद्रि विजय के साथ होगा, इस रथ यात्रा के दौरान कई धार्मिक रस्में, अनुष्ठान और विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।आपको बताते चलें कि, भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा भव्य होती है जिसमें हजारों की संख्या में भक्त पहुंचते है। इस साल, एक एकीकृत कमांड और नियंत्रण केंद्र बनाया गया है, जहां हमारे पास एक CCTV निगरानी प्रणाली है जो पूरी तरह से AI आधारित है। हम पूरे पुरी शहर से सभी ट्रैफ़िक और पार्किंग संबंधी जानकारी प्राप्त करते हैं। सभी विभागों के प्रतिनिधियों को जानकारी दे दी गई है और हमने एक वॉर रूम भी स्थापित किया है। एसजेटीए अधिकारी ने कहा,दोपहर में उन्हें रथ खड़ा (रथ यार्ड) से खींचा जाएगा। रथों को पार्क करने की रस्में निभाई जाएंगी। तीन लकड़ी के रथों तालध्वज (भगवान बलभद्र का रथ), देवी सुभद्रा का देवदलन और भगवान जगन्नाथ के रथ नंदीघोष का निर्माण पूरा हो चुका है और ये 27 जून को ग्रैंड रोड पर चलने के लिए तैयार है।


ओडिशा के पुरी में स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में आज रथयात्रा की शुरुआत होने जा रही है जहां पर पुरी ही नहीं देश के कई हिस्सों में भगवान जगन्नाथ की रथयात्राएं निकाली जाएगी। ओडिशा में दुनिया की सबसे बड़ी रथ यात्रा निकाली जाने वाली है जिसके लिए तैयारियों का दौर आज थम जाएगा। जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहेंगे इसके लिए प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है।

मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ साल में एक बार अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। पुरी के अलावा देश के कई जगहों में आज रथयात्रा भव्य होने वाली है।
मंगला आरती के साथ भगवान जगन्नाथ के अनुष्ठान हुए शुरू

आपको बताते चलें , ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ रथयात्रा के लिए पूजा अनुष्ठान शुरू होने लगे है। सुबह 6 बजे भगवान जगन्नाथ की मंगला आरती औऱ श्रृंगार हो रहा है। दैनिक पूजा-परंपराओं के बाद सुबह 9:30 बजे भगवान मंदिर से बाहर लाने की विधियां शुरू होंगी। इसके बाद रथों की पूजा कर बलभद्र, बहन सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को रथ में बैठाया जाएगा। यात्रा के कार्यक्रम के अनुसार, आगे दोपहर 3 बजे पुरी राजपरिवार के गजपति दिव्य सिंह देव रथ के आगे सोने के झाडू से बुहारा लगाकर रथ यात्रा की शुरुआत करेंगे।

वहीं पर बड़े हर्षोल्लास के साथ भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ करीब 3 किलोमीटर दूर गुंडिचा मंदिर जाएंगे। यह रथ यात्रा कुल 12 दिनों तक चलेगी और इसका समापन 8 जुलाई 2025 को नीलाद्रि विजय के साथ होगा, इस रथ यात्रा के दौरान कई धार्मिक रस्में, अनुष्ठान और विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।आपको बताते चलें कि, भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा भव्य होती है जिसमें हजारों की संख्या में भक्त पहुंचते है। इस साल, एक एकीकृत कमांड और नियंत्रण केंद्र बनाया गया है, जहां हमारे पास एक CCTV निगरानी प्रणाली है जो पूरी तरह से AI आधारित है। हम पूरे पुरी शहर से सभी ट्रैफ़िक और पार्किंग संबंधी जानकारी प्राप्त करते हैं। सभी विभागों के प्रतिनिधियों को जानकारी दे दी गई है और हमने एक वॉर रूम भी स्थापित किया है। एसजेटीए अधिकारी ने कहा,दोपहर में उन्हें रथ खड़ा (रथ यार्ड) से खींचा जाएगा। रथों को पार्क करने की रस्में निभाई जाएंगी। तीन लकड़ी के रथों तालध्वज (भगवान बलभद्र का रथ), देवी सुभद्रा का देवदलन और भगवान जगन्नाथ के रथ नंदीघोष का निर्माण पूरा हो चुका है और ये 27 जून को ग्रैंड रोड पर चलने के लिए तैयार है।


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