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विविध post authorJournalist खबरीलाल LAST UPDATED ON:Wednesday ,July 30,2025

News (खबरीलाल न्यूज़) : पुरुषों की लापरवाही बना देती है महिलाओं को इन 5 बड़ी बीमारियों का शिकार! समय रहते हो जाएं सतर्क:

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आप भले ही अपनी पत्नी से कितना भी प्यार क्यों ना करते हों, अच्छी शॉपिंग से लेकर उनके फेवरेट रेस्त्रां में लंच और डिनर करवाने तक का ख्याल रखते हों, लेकिन आपने अगर उनसे जुड़ी इन 5 बातों को लेकर थोड़ी सी भी लापरवाही बरती तो आप अनजाने में उन्हें सेहत से जुड़ी इन 5 बड़ी समस्याओं की तरफ धकेल रहे होते हैं। जी हां, हाल ही में सेलिब्रिटी हार्मोन कोच पूर्णिमा पेरी ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करके इस चौंकाने वाली सच्चाई के बारे में बात की है। पूर्णिमा ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए बताया है कि कैसे ये मामूली सी लगने वाली लापरवाहियां, असल में महिलाओं की सेहत के लिए एक साइलेंट अटैक की तरह काम करती हैं। आइए जानते हैं आखिर क्या हैं पुरुषों की ये 5 बड़ी लापरवाहियां।

पुरुषों की ये 5 बड़ी लापरवाहियां महिलाओं की सेहत के लिए बड़ा खतरा

थायराइड डिसफंक्शन

थायराइड डिसफंक्शन, जिसे थायराइड रोग भी कहा जाता है, थायराइड ग्रंथि की एक ऐसी स्थिति है जिसमें या तो बहुत कम (हाइपोथायरायडिज्म) या बहुत अधिक (हाइपरथायरायडिज्म) थायराइड हार्मोन बनने लगते हैं। बता दें, तनाव, अनियमित दिनचर्या और पौष्टिक डाइट की कमी थायराइड को प्रभावित करने वाले मुख्य कारण हैं। दरअसल, जब कोई पुरुष घर के काम या जिम्मेदारियों को संभालने में महिला का हाथ नहीं बटाता या उसे इमोशनल सपोर्ट नहीं देता है तो महिला के लिए काम का बोझ और तनाव बढ़ने लगता है। जरूरत से ज्यादा तनाव सीधा महिला के थायराइड ग्लैंड को प्रभावित करके थायराइड हार्मोन को असंतुलित कर सकता है। जिससे महिला को मोटापा, अधिक पसीना आना, घबराहट, चिड़चिड़ापन, नींद न आना और मांसपेशियों में कमजोरी महसूस हो सकती है।

पीसीओएस और अनियमित पीरियड्स

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) और अनियमित पीरियड्स की समस्या से आजकल ज्यादातर महिलाएं परेशान रहती हैं। पूर्णिमा कहती हैं कि ऐसा ज्यादातर उन महिलाओं के साथ ज्यादा होता है जो भावनात्मक रूप से अस्थिर या रिश्ते में प्यार और केयर की कमी महसूस करती हैं। अगर पुरुष अपने पार्टनर की इमोशनल नीड्स को समझकर उनकी मदद नहीं करते तो तनाव के कारण, शरीर कोर्टिसोल नामक हार्मोन का अधिक उत्पादन करता है। जो अन्य हार्मोन, जैसे कि एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर को प्रभावित करता है। इससे ओव्यूलेशन (अंडाशय से अंडे का निकलना) में बाधा आ सकती है, जिसके परिणामस्वरूप अनियमित पीरियड्स या पीरियड्स का न आना हो सकता है।

क्रोनिक फटीग और फाइब्रोमायल्जिया

आपने अकसर महिलाओं को थकान, कमजोरी, खून की कमी जैसी शिकायतों को करते हुए सुना होगा। महिलाओं की ये सभी समस्याएं शारीरिक और मानसिक तनाव से जुड़ी हुई होती हैं। महिलाएं वर्किंग हो या नॉन वर्किंग, आज भी ज्यादातर घरों में पुरुषों की लापरवाही या आलस की वजह से परिवार, बच्चों और काम का सारा बोझ अकेले ही झेल रही होती हैं। जो उनके लिए मांसपेशियों में दर्द, नींद और एनर्जी की कमी का कारण बन सकता है। कई शोध बताते हैं कि महिलाओं का अपनी भावनाओं को दबाकर रखना, उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। जिससे उन्हें थकान, सिरदर्द, और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

बिंज ईटिंग और पेट संबंधी समस्याएं

बिंज ईटिंग डिसऑर्डर एक ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति कम समय में बहुत ज्यादा खाना खा लेता है। महिलाओं में यह समस्या कई बार स्ट्रेस और अकेलेपन के कारण देखने को मिलती है। महिलाएं, जब अंतरंग संबंधों में उपेक्षा महसूस करती हैं, तो ओवरईटिंग की ओर मुड़ सकती हैं। यह एक सामान्य प्रतिक्रिया है जो भावनात्मक संकट से निपटने के लिए की जाती है। महिलाएं अक्सर इस दर्द को कम करने के लिए खाने का सहारा लेती हैं। बता दें, पुरुषों की अनदेखी या भावनात्मक दूरी महिलाओं में अकेलापन और भावनात्मक असुरक्षा की भावना पैदा कर सकती है, जिसे वो ओवरईटिंग करके कंट्रोल करने की कोशिश करती हैं। नतीजा, महिला को मोटापा, पाचन संबंधी समस्याएं और आईबीएस (IBS) जैसी दिक्कतें घेर सकती हैं।

चिंता, पैनिक अटैक और हार्मोनल असंतुलन

महिलाओं की भावनाएं उनके हार्मोनल उतार-चढ़ाव से बहुत ज्यादा प्रभावित होती है। महिलाओं में होने वाले हार्मोनल परिवर्तन, जैसे कि मासिक धर्म, गर्भावस्था, और रजोनिवृत्ति, उनकी भावनाओं, मनोदशा और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकते हैं। ऐसे में जब महिला की किसी बात को पार्टनर की तरफ से हर बार नजरअंदाज या अनसुना कर दिया जाता है तो महिला तनाव महसूस करने लगती है। यह तनाव कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन को बढ़ाकर मासिक धर्म चक्र को बाधित कर सकता है। जिससे मूड स्विंग्स, डिप्रेशन और यहां तक की पैनिक अटैक भी आ सकते हैं।




आप भले ही अपनी पत्नी से कितना भी प्यार क्यों ना करते हों, अच्छी शॉपिंग से लेकर उनके फेवरेट रेस्त्रां में लंच और डिनर करवाने तक का ख्याल रखते हों, लेकिन आपने अगर उनसे जुड़ी इन 5 बातों को लेकर थोड़ी सी भी लापरवाही बरती तो आप अनजाने में उन्हें सेहत से जुड़ी इन 5 बड़ी समस्याओं की तरफ धकेल रहे होते हैं। जी हां, हाल ही में सेलिब्रिटी हार्मोन कोच पूर्णिमा पेरी ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करके इस चौंकाने वाली सच्चाई के बारे में बात की है। पूर्णिमा ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए बताया है कि कैसे ये मामूली सी लगने वाली लापरवाहियां, असल में महिलाओं की सेहत के लिए एक साइलेंट अटैक की तरह काम करती हैं। आइए जानते हैं आखिर क्या हैं पुरुषों की ये 5 बड़ी लापरवाहियां।

पुरुषों की ये 5 बड़ी लापरवाहियां महिलाओं की सेहत के लिए बड़ा खतरा

थायराइड डिसफंक्शन

थायराइड डिसफंक्शन, जिसे थायराइड रोग भी कहा जाता है, थायराइड ग्रंथि की एक ऐसी स्थिति है जिसमें या तो बहुत कम (हाइपोथायरायडिज्म) या बहुत अधिक (हाइपरथायरायडिज्म) थायराइड हार्मोन बनने लगते हैं। बता दें, तनाव, अनियमित दिनचर्या और पौष्टिक डाइट की कमी थायराइड को प्रभावित करने वाले मुख्य कारण हैं। दरअसल, जब कोई पुरुष घर के काम या जिम्मेदारियों को संभालने में महिला का हाथ नहीं बटाता या उसे इमोशनल सपोर्ट नहीं देता है तो महिला के लिए काम का बोझ और तनाव बढ़ने लगता है। जरूरत से ज्यादा तनाव सीधा महिला के थायराइड ग्लैंड को प्रभावित करके थायराइड हार्मोन को असंतुलित कर सकता है। जिससे महिला को मोटापा, अधिक पसीना आना, घबराहट, चिड़चिड़ापन, नींद न आना और मांसपेशियों में कमजोरी महसूस हो सकती है।

पीसीओएस और अनियमित पीरियड्स

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) और अनियमित पीरियड्स की समस्या से आजकल ज्यादातर महिलाएं परेशान रहती हैं। पूर्णिमा कहती हैं कि ऐसा ज्यादातर उन महिलाओं के साथ ज्यादा होता है जो भावनात्मक रूप से अस्थिर या रिश्ते में प्यार और केयर की कमी महसूस करती हैं। अगर पुरुष अपने पार्टनर की इमोशनल नीड्स को समझकर उनकी मदद नहीं करते तो तनाव के कारण, शरीर कोर्टिसोल नामक हार्मोन का अधिक उत्पादन करता है। जो अन्य हार्मोन, जैसे कि एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर को प्रभावित करता है। इससे ओव्यूलेशन (अंडाशय से अंडे का निकलना) में बाधा आ सकती है, जिसके परिणामस्वरूप अनियमित पीरियड्स या पीरियड्स का न आना हो सकता है।

क्रोनिक फटीग और फाइब्रोमायल्जिया

आपने अकसर महिलाओं को थकान, कमजोरी, खून की कमी जैसी शिकायतों को करते हुए सुना होगा। महिलाओं की ये सभी समस्याएं शारीरिक और मानसिक तनाव से जुड़ी हुई होती हैं। महिलाएं वर्किंग हो या नॉन वर्किंग, आज भी ज्यादातर घरों में पुरुषों की लापरवाही या आलस की वजह से परिवार, बच्चों और काम का सारा बोझ अकेले ही झेल रही होती हैं। जो उनके लिए मांसपेशियों में दर्द, नींद और एनर्जी की कमी का कारण बन सकता है। कई शोध बताते हैं कि महिलाओं का अपनी भावनाओं को दबाकर रखना, उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। जिससे उन्हें थकान, सिरदर्द, और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

बिंज ईटिंग और पेट संबंधी समस्याएं

बिंज ईटिंग डिसऑर्डर एक ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति कम समय में बहुत ज्यादा खाना खा लेता है। महिलाओं में यह समस्या कई बार स्ट्रेस और अकेलेपन के कारण देखने को मिलती है। महिलाएं, जब अंतरंग संबंधों में उपेक्षा महसूस करती हैं, तो ओवरईटिंग की ओर मुड़ सकती हैं। यह एक सामान्य प्रतिक्रिया है जो भावनात्मक संकट से निपटने के लिए की जाती है। महिलाएं अक्सर इस दर्द को कम करने के लिए खाने का सहारा लेती हैं। बता दें, पुरुषों की अनदेखी या भावनात्मक दूरी महिलाओं में अकेलापन और भावनात्मक असुरक्षा की भावना पैदा कर सकती है, जिसे वो ओवरईटिंग करके कंट्रोल करने की कोशिश करती हैं। नतीजा, महिला को मोटापा, पाचन संबंधी समस्याएं और आईबीएस (IBS) जैसी दिक्कतें घेर सकती हैं।

चिंता, पैनिक अटैक और हार्मोनल असंतुलन

महिलाओं की भावनाएं उनके हार्मोनल उतार-चढ़ाव से बहुत ज्यादा प्रभावित होती है। महिलाओं में होने वाले हार्मोनल परिवर्तन, जैसे कि मासिक धर्म, गर्भावस्था, और रजोनिवृत्ति, उनकी भावनाओं, मनोदशा और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकते हैं। ऐसे में जब महिला की किसी बात को पार्टनर की तरफ से हर बार नजरअंदाज या अनसुना कर दिया जाता है तो महिला तनाव महसूस करने लगती है। यह तनाव कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन को बढ़ाकर मासिक धर्म चक्र को बाधित कर सकता है। जिससे मूड स्विंग्स, डिप्रेशन और यहां तक की पैनिक अटैक भी आ सकते हैं।




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