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News (खबरीलाल न्यूज़) : 17 साल और 323 गवाह.. साध्वी प्रज्ञा समेत सातों आरोपी बरी, मालेगांव ब्लास्ट की पूरी टाइमलाइम:

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भोपाल.  महाराष्ट्र के मालेगांव बम ब्लास्ट केस में एनआईए कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए साध्वी प्रज्ञा समेत सात आरोपियों को बरी कर दिया है। महाराष्ट्र के मालेगांव में 2008 में हुआ बम धमाका न केवल एक त्रासदी था, बल्कि यह भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए भी एक लंबी और जटिल चुनौती बन गया। 29 सितंबर 2008 को रमजान के पवित्र महीने में हुए इस विस्फोट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इस मामले की पूरी टाइमलाइन हम आपको बता रहे हैं।
मालेगांव ब्लास्ट की पूरी टाइमलाइन

    29 सितंबर 2008: रमजान की रात में मालेगांव दहला

रमजान का पवित्र महीना, मालेगांव की गलियां इफ्तार की रौनक से गुलजार। लेकिन रात 9:35 बजे नासिक जिले के अंजुमन चौक और भिक्कू चौक के बीच एक मोटरसाइकिल पर रखा बम फटता है। यह धमाका इतना जबरदस्त था कि 6 लोगों की जान चली गई और 95 लोग घायल हो गए। मृतकों में मासूम चेहरे और परिवारों की उम्मीदें शामिल थीं। यह घटना सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील मालेगांव में आग की तरह फैली और तनाव का माहौल बन गया।

    30 सितंबर 2008: केस में पहली FIR दर्ज

धमाके की खबर फैलते ही पुलिस हरकत में आती है। तड़के 3 बजे मालेगांव के आजाद नगर पुलिस स्टेशन में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जाती है। यह वह शुरुआती बिंदु था, जहां से इस मामले की लंबी जांच शुरू होने वाली थी।

    21 अक्टूबर 2008: ATS ने संभाला मोर्चा

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) को सौंप दी जाती है। ATS की शुरुआती जांच में दक्षिणपंथी संगठनों पर शक गहराता है। साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित जैसे नाम सामने आते हैं और यह मामला सनसनीखेज मोड़ लेता है।

    20 जनवरी 2009: ATS की पहली चार्जशीट

ATS ने तेजी दिखाते हुए मुंबई की विशेष MCOCA कोर्ट में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल की। इसमें 11 आरोपियों पर गंभीर आरोप लगाए गए, जिसमें हत्या, साजिश, और आतंकवादी गतिविधियों का जिक्र था। चार्जशीट में दावा किया गया कि धमाके में इस्तेमाल मोटरसाइकिल साध्वी प्रज्ञा की थी और पुरोहित ने RDX की व्यवस्था की थी।

    13 अप्रैल 2011: NIA की एंट्री

मामले की जटिलता और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को देखते हुए जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी जाती है। NIA इस केस को नए सिरे से देखने की तैयारी करती है, और पुरानी जांच पर सवाल उठने लगते हैं।

    21 अप्रैल 2011: NIA की पहली सप्लीमेंट्री चार्जशीट

NIA ने मुंबई की विशेष NIA कोर्ट में अपनी पहली सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की। इसमें सात आरोपियों पर UAPA और IPC की धाराओं के तहत आरोप तय किए गए। जांच अब सांप्रदायिक साजिश के इर्द-गिर्द केंद्रित थी, लेकिन सबूतों की कमी एक चुनौती बनी रही।

    13 मई 2016: मकोका हटा, नई चार्जशीट दायर

NIA ने एक और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की, जिसमें बड़ा बदलाव देखने को मिला। साध्वी प्रज्ञा और अन्य आरोपियों पर लगे मकोका के आरोप हटा दिए गए। NIA ने कहा कि सबूतों का अभाव है और इसने मामले को नया मोड़ दे दिया।

    2017: जमानत और गवाहों का पलटना

2017 में गवाहों के बयानों से मुकरने और जांच में कमजोरियों के चलते सभी सात आरोपी जमानत पर रिहा हो गए। सुप्रीम कोर्ट ने लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को जमानत दी और बाकी आरोपियों को भी राहत मिली। यह फैसला विवादों को जन्म देता है, क्योंकि बचाव पक्ष का दावा था कि ATS ने गलत तरीके से फंसाया।

    27 दिसंबर 2017: चार्ज फ्रेमिंग की नई शुरुआत

NIA की स्पेशल कोर्ट मुंबई ने चार्ज फ्रेमिंग की प्रक्रिया फिर से शुरू की। यह एक संकेत था कि मामला अब ट्रायल की ओर बढ़ रहा है, लेकिन रास्ता अभी लंबा था।

    30 अक्टूबर 2018: सात आरोपियों पर आरोप तय

लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने सात आरोपियों साध्वी प्रज्ञा, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए।

    3 दिसंबर 2018: पहला गवाह पेश

ट्रायल की शुरुआत हुई और पहला गवाह कोर्ट में पेश किया गया। इस मामले में कुल 323 गवाह पेश किए गए।

    4 सितंबर 2023: अंतिम गवाह और हॉस्टाइल टैग

लंबे समय तक चली गवाही प्रक्रिया में अंतिम गवाह पेश किया गया। लेकिन हैरानी की बात यह थी कि 40 गवाहों को हॉस्टाइल (विरोधी) घोषित किया गया, क्योंकि वे अपने पुराने बयानों से मुकर गए। यह जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।

    12 अगस्त 2024: आरोपियों के बयान दर्ज

धारा 313 CrPC के तहत सभी आरोपियों के बयान दर्ज किए गए। यह ट्रायल का अहम हिस्सा था, जहां आरोपियों ने अपने बचाव में दलीलें पेश कीं।

    25 जुलाई 2024 से 27 सितंबर 2024: कोर्ट में दमदार बहस

अभियोजन पक्ष ने अपनी बहस शुरू की, जिसमें दावा किया गया कि यह एक सुनियोजित आतंकी साजिश थी। दो महीने तक चली इस बहस में हर सबूत को बारीकी से पेश किया गया।

    30 सितंबर 2024 से 3 अप्रैल 2025: बचाव पक्ष की जोरदार दलीलें

बचाव पक्ष ने अपनी बहस में जांच की खामियों को उजागर किया। उनका कहना था कि कोई ठोस सबूत नहीं है और आरोपियों को राजनीतिक दबाव में फंसाया गया। यह बहस छह महीने तक चली, जिसमें हर बिंदु पर गहन चर्चा हुई।

    4 अप्रैल 2025 से 19 अप्रैल 2025: अभियोजन की जवाबी बहस

अभियोजन पक्ष ने बचाव की दलीलों का जवाब देते हुए अपनी अंतिम बहस पेश की। यह ट्रायल का आखिरी चरण था, जहां दोनों पक्षों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी।

    31 जुलाई 2025: कोर्ट ने आरोपी किए बरी

17 साल की लंबी कानूनी जंग के बाद विशेष NIA कोर्ट ने सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष न तो मोटरसाइकिल की मालिकाना हक साबित कर सका, न ही RDX के इस्तेमाल का सबूत दे सका। इस फैसले ने देशभर में बहस छेड़ दी कुछ ने इसे पीड़ितों के लिए अन्याय कहा, तो कुछ ने इसे निर्दोषों की जीत माना।
कौन कौन थे आरोपी?

    साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर
    लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित
    रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय
    अजय राहिरकर
    सुधाकर द्विवेदी
    सुधाकर चतुर्वेदी
    समीर कुलकर्णी

कोर्ट के फैसले की खास बातें

    कोर्ट ने कहा, 'आतंकवाद का कोई धर्म नहीं।'
    ATS और NIA की जांच में भारी खामियां रहीं, सबूत जुटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल।
    अभियोजन पक्ष साबित नहीं कर सका कि धमाके वाली बाइक साध्वी प्रज्ञा की थी।
    17 साल में 10800 सबूत, 323 गवाह, 5 जज और अंत में सभी बरी।


भोपाल.  महाराष्ट्र के मालेगांव बम ब्लास्ट केस में एनआईए कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए साध्वी प्रज्ञा समेत सात आरोपियों को बरी कर दिया है। महाराष्ट्र के मालेगांव में 2008 में हुआ बम धमाका न केवल एक त्रासदी था, बल्कि यह भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए भी एक लंबी और जटिल चुनौती बन गया। 29 सितंबर 2008 को रमजान के पवित्र महीने में हुए इस विस्फोट ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इस मामले की पूरी टाइमलाइन हम आपको बता रहे हैं।
मालेगांव ब्लास्ट की पूरी टाइमलाइन

    29 सितंबर 2008: रमजान की रात में मालेगांव दहला

रमजान का पवित्र महीना, मालेगांव की गलियां इफ्तार की रौनक से गुलजार। लेकिन रात 9:35 बजे नासिक जिले के अंजुमन चौक और भिक्कू चौक के बीच एक मोटरसाइकिल पर रखा बम फटता है। यह धमाका इतना जबरदस्त था कि 6 लोगों की जान चली गई और 95 लोग घायल हो गए। मृतकों में मासूम चेहरे और परिवारों की उम्मीदें शामिल थीं। यह घटना सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील मालेगांव में आग की तरह फैली और तनाव का माहौल बन गया।

    30 सितंबर 2008: केस में पहली FIR दर्ज

धमाके की खबर फैलते ही पुलिस हरकत में आती है। तड़के 3 बजे मालेगांव के आजाद नगर पुलिस स्टेशन में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जाती है। यह वह शुरुआती बिंदु था, जहां से इस मामले की लंबी जांच शुरू होने वाली थी।

    21 अक्टूबर 2008: ATS ने संभाला मोर्चा

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) को सौंप दी जाती है। ATS की शुरुआती जांच में दक्षिणपंथी संगठनों पर शक गहराता है। साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित जैसे नाम सामने आते हैं और यह मामला सनसनीखेज मोड़ लेता है।

    20 जनवरी 2009: ATS की पहली चार्जशीट

ATS ने तेजी दिखाते हुए मुंबई की विशेष MCOCA कोर्ट में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल की। इसमें 11 आरोपियों पर गंभीर आरोप लगाए गए, जिसमें हत्या, साजिश, और आतंकवादी गतिविधियों का जिक्र था। चार्जशीट में दावा किया गया कि धमाके में इस्तेमाल मोटरसाइकिल साध्वी प्रज्ञा की थी और पुरोहित ने RDX की व्यवस्था की थी।

    13 अप्रैल 2011: NIA की एंट्री

मामले की जटिलता और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को देखते हुए जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी जाती है। NIA इस केस को नए सिरे से देखने की तैयारी करती है, और पुरानी जांच पर सवाल उठने लगते हैं।

    21 अप्रैल 2011: NIA की पहली सप्लीमेंट्री चार्जशीट

NIA ने मुंबई की विशेष NIA कोर्ट में अपनी पहली सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की। इसमें सात आरोपियों पर UAPA और IPC की धाराओं के तहत आरोप तय किए गए। जांच अब सांप्रदायिक साजिश के इर्द-गिर्द केंद्रित थी, लेकिन सबूतों की कमी एक चुनौती बनी रही।

    13 मई 2016: मकोका हटा, नई चार्जशीट दायर

NIA ने एक और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की, जिसमें बड़ा बदलाव देखने को मिला। साध्वी प्रज्ञा और अन्य आरोपियों पर लगे मकोका के आरोप हटा दिए गए। NIA ने कहा कि सबूतों का अभाव है और इसने मामले को नया मोड़ दे दिया।

    2017: जमानत और गवाहों का पलटना

2017 में गवाहों के बयानों से मुकरने और जांच में कमजोरियों के चलते सभी सात आरोपी जमानत पर रिहा हो गए। सुप्रीम कोर्ट ने लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को जमानत दी और बाकी आरोपियों को भी राहत मिली। यह फैसला विवादों को जन्म देता है, क्योंकि बचाव पक्ष का दावा था कि ATS ने गलत तरीके से फंसाया।

    27 दिसंबर 2017: चार्ज फ्रेमिंग की नई शुरुआत

NIA की स्पेशल कोर्ट मुंबई ने चार्ज फ्रेमिंग की प्रक्रिया फिर से शुरू की। यह एक संकेत था कि मामला अब ट्रायल की ओर बढ़ रहा है, लेकिन रास्ता अभी लंबा था।

    30 अक्टूबर 2018: सात आरोपियों पर आरोप तय

लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने सात आरोपियों साध्वी प्रज्ञा, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए।

    3 दिसंबर 2018: पहला गवाह पेश

ट्रायल की शुरुआत हुई और पहला गवाह कोर्ट में पेश किया गया। इस मामले में कुल 323 गवाह पेश किए गए।

    4 सितंबर 2023: अंतिम गवाह और हॉस्टाइल टैग

लंबे समय तक चली गवाही प्रक्रिया में अंतिम गवाह पेश किया गया। लेकिन हैरानी की बात यह थी कि 40 गवाहों को हॉस्टाइल (विरोधी) घोषित किया गया, क्योंकि वे अपने पुराने बयानों से मुकर गए। यह जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।

    12 अगस्त 2024: आरोपियों के बयान दर्ज

धारा 313 CrPC के तहत सभी आरोपियों के बयान दर्ज किए गए। यह ट्रायल का अहम हिस्सा था, जहां आरोपियों ने अपने बचाव में दलीलें पेश कीं।

    25 जुलाई 2024 से 27 सितंबर 2024: कोर्ट में दमदार बहस

अभियोजन पक्ष ने अपनी बहस शुरू की, जिसमें दावा किया गया कि यह एक सुनियोजित आतंकी साजिश थी। दो महीने तक चली इस बहस में हर सबूत को बारीकी से पेश किया गया।

    30 सितंबर 2024 से 3 अप्रैल 2025: बचाव पक्ष की जोरदार दलीलें

बचाव पक्ष ने अपनी बहस में जांच की खामियों को उजागर किया। उनका कहना था कि कोई ठोस सबूत नहीं है और आरोपियों को राजनीतिक दबाव में फंसाया गया। यह बहस छह महीने तक चली, जिसमें हर बिंदु पर गहन चर्चा हुई।

    4 अप्रैल 2025 से 19 अप्रैल 2025: अभियोजन की जवाबी बहस

अभियोजन पक्ष ने बचाव की दलीलों का जवाब देते हुए अपनी अंतिम बहस पेश की। यह ट्रायल का आखिरी चरण था, जहां दोनों पक्षों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी।

    31 जुलाई 2025: कोर्ट ने आरोपी किए बरी

17 साल की लंबी कानूनी जंग के बाद विशेष NIA कोर्ट ने सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष न तो मोटरसाइकिल की मालिकाना हक साबित कर सका, न ही RDX के इस्तेमाल का सबूत दे सका। इस फैसले ने देशभर में बहस छेड़ दी कुछ ने इसे पीड़ितों के लिए अन्याय कहा, तो कुछ ने इसे निर्दोषों की जीत माना।
कौन कौन थे आरोपी?

    साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर
    लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित
    रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय
    अजय राहिरकर
    सुधाकर द्विवेदी
    सुधाकर चतुर्वेदी
    समीर कुलकर्णी

कोर्ट के फैसले की खास बातें

    कोर्ट ने कहा, 'आतंकवाद का कोई धर्म नहीं।'
    ATS और NIA की जांच में भारी खामियां रहीं, सबूत जुटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल।
    अभियोजन पक्ष साबित नहीं कर सका कि धमाके वाली बाइक साध्वी प्रज्ञा की थी।
    17 साल में 10800 सबूत, 323 गवाह, 5 जज और अंत में सभी बरी।


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