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News (खबरीलाल न्यूज़) : रायपुर में आवारा पशुओं की समस्या बनी आमजन के लिए अभिशाप, मानवाधिकार आयोग ने प्रशासन को भेजे ठोस सुझाव:

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रायपुर नगर निगम क्षेत्र में आवारा पशुओं की समस्या दिनोंदिन
भयावह रूप लेती जा रही है। यह अब मात्र एक प्रशासनिक चुनौती नहीं रह गई,
बल्कि आम नागरिकों के जीवन, सुरक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक व्यवस्था से
जुड़ा गंभीर विषय बन चुकी है।


हाल ही में नगर निगम मुख्यालय द्वारा समस्त जोन कमिश्नरों के संपर्क
नंबर जारी करते हुए आमजन से संपर्क करने की अपील की गई थी। इसके पश्चात कुछ
जोन स्तर पर सक्रियता अवश्य दिखाई दी, परंतु अब तक उठाए गए अधिकांश कदम
समस्या की जड़ तक पहुँचने के बजाय केवल सतही उपायों तक ही सीमित हैं।


सड़कों पर खुलेआम विचरण करते हुए गौवंश, सांड, भैंसे आदि न केवल यातायात
बाधित कर रहे हैं, बल्कि प्रतिदिन दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं — जिनमें
कुछ मामले जानलेवा भी सिद्ध हुए हैं।


  • वर्तमान स्थिति की मुख्य समस्याएं:

• जोन कमिश्नरों के नंबर सार्वजनिक कर नागरिकों को जोड़ा गया, लेकिन
उनके पास कार्रवाई हेतु पर्याप्त संसाधन और स्पष्ट अधिकार नहीं हैं।

• पकड़े गए पशुओं को जिन स्थलों पर छोड़ा जा रहा है, वहाँ चारा, पानी और देखभाल की व्यवस्था अत्यंत दयनीय है।

• पशुपालक अक्सर राजनीतिक सिफारिशों का सहारा लेकर कार्रवाई को बाधित कर देते हैं, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता प्रभावित हो रही है।


  • अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग द्वारा प्रशासन को भेजे गए सुझाव:

1. डेरी संचालन को नगर सीमा से बाहर स्थानांतरित किया जाए – नियोजित ‘डेरी ज़ोन’ अथवा ‘पशुपालन क्षेत्र’ स्थापित किए जाएं।

2. पशुपालकों के लिए पंजीकरण अनिवार्य हो – हर पशु को यूनिक टैग (RFID/QR Code) से चिह्नित किया जाए।


3. कठोर दंड प्रावधान लागू हों –

• पहली से तीसरी बार आवारा पशु मिलने पर ₹5000 का जुर्माना।

• चौथी बार पशु जब्त कर नीलामी की जाए।

• राजनीतिक हस्तक्षेप को अस्वीकार्य घोषित कर हस्तक्षेप करने वालों के नाम सार्वजनिक किए जाएं।


4. डेरी मालिकों को स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी दी जाए –

गोबर फैलाने पर ₹2000 से अधिक जुर्माना हो।


5. जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए –

24×7 हेल्पलाइन शुरू की जाए जहां नागरिक पशु की जानकारी तत्काल दे सकें।


6. स्मार्ट ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी लागू की जाए –

• RFID या GPS से पशुओं की निगरानी की जाए।

• हर डेरी में CCTV अनिवार्य हो। पूर्वी भारत जोन के जनसंपर्क अधिकारी
अज़ीम खान ने भी रायपुर प्रशासन से अपील की है कि वह समस्या की गंभीरता को
समझते हुए, बिना राजनीतिक दबाव के त्वरित और निष्पक्ष कार्यवाही सुनिश्चित
करे। उन्होंने कहा कि आयोग जनता के पक्ष में हर स्तर पर संघर्ष के लिए
तैयार है।

राज्य महासचिव प्रदुमन शर्मा ने नगर निगम प्रशासन से निवेदन किया है कि वह
इस समस्या की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए शीघ्र, ठोस एवं पारदर्शी
कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि आयोग को जनहित में कानूनी मार्ग अपनाने की
दिशा में कदम न उठाने पड़ें।








रायपुर नगर निगम क्षेत्र में आवारा पशुओं की समस्या दिनोंदिन
भयावह रूप लेती जा रही है। यह अब मात्र एक प्रशासनिक चुनौती नहीं रह गई,
बल्कि आम नागरिकों के जीवन, सुरक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक व्यवस्था से
जुड़ा गंभीर विषय बन चुकी है।


हाल ही में नगर निगम मुख्यालय द्वारा समस्त जोन कमिश्नरों के संपर्क
नंबर जारी करते हुए आमजन से संपर्क करने की अपील की गई थी। इसके पश्चात कुछ
जोन स्तर पर सक्रियता अवश्य दिखाई दी, परंतु अब तक उठाए गए अधिकांश कदम
समस्या की जड़ तक पहुँचने के बजाय केवल सतही उपायों तक ही सीमित हैं।


सड़कों पर खुलेआम विचरण करते हुए गौवंश, सांड, भैंसे आदि न केवल यातायात
बाधित कर रहे हैं, बल्कि प्रतिदिन दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं — जिनमें
कुछ मामले जानलेवा भी सिद्ध हुए हैं।


  • वर्तमान स्थिति की मुख्य समस्याएं:

• जोन कमिश्नरों के नंबर सार्वजनिक कर नागरिकों को जोड़ा गया, लेकिन
उनके पास कार्रवाई हेतु पर्याप्त संसाधन और स्पष्ट अधिकार नहीं हैं।

• पकड़े गए पशुओं को जिन स्थलों पर छोड़ा जा रहा है, वहाँ चारा, पानी और देखभाल की व्यवस्था अत्यंत दयनीय है।

• पशुपालक अक्सर राजनीतिक सिफारिशों का सहारा लेकर कार्रवाई को बाधित कर देते हैं, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता प्रभावित हो रही है।


  • अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग द्वारा प्रशासन को भेजे गए सुझाव:

1. डेरी संचालन को नगर सीमा से बाहर स्थानांतरित किया जाए – नियोजित ‘डेरी ज़ोन’ अथवा ‘पशुपालन क्षेत्र’ स्थापित किए जाएं।

2. पशुपालकों के लिए पंजीकरण अनिवार्य हो – हर पशु को यूनिक टैग (RFID/QR Code) से चिह्नित किया जाए।


3. कठोर दंड प्रावधान लागू हों –

• पहली से तीसरी बार आवारा पशु मिलने पर ₹5000 का जुर्माना।

• चौथी बार पशु जब्त कर नीलामी की जाए।

• राजनीतिक हस्तक्षेप को अस्वीकार्य घोषित कर हस्तक्षेप करने वालों के नाम सार्वजनिक किए जाएं।


4. डेरी मालिकों को स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी दी जाए –

गोबर फैलाने पर ₹2000 से अधिक जुर्माना हो।


5. जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए –

24×7 हेल्पलाइन शुरू की जाए जहां नागरिक पशु की जानकारी तत्काल दे सकें।


6. स्मार्ट ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी लागू की जाए –

• RFID या GPS से पशुओं की निगरानी की जाए।

• हर डेरी में CCTV अनिवार्य हो। पूर्वी भारत जोन के जनसंपर्क अधिकारी
अज़ीम खान ने भी रायपुर प्रशासन से अपील की है कि वह समस्या की गंभीरता को
समझते हुए, बिना राजनीतिक दबाव के त्वरित और निष्पक्ष कार्यवाही सुनिश्चित
करे। उन्होंने कहा कि आयोग जनता के पक्ष में हर स्तर पर संघर्ष के लिए
तैयार है।

राज्य महासचिव प्रदुमन शर्मा ने नगर निगम प्रशासन से निवेदन किया है कि वह
इस समस्या की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए शीघ्र, ठोस एवं पारदर्शी
कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि आयोग को जनहित में कानूनी मार्ग अपनाने की
दिशा में कदम न उठाने पड़ें।





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