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News (खबरीलाल न्यूज़) : चीन ने जापान को दिया बड़ा झटका...तो भारत की लगी लाॅटरी, ट्रंप टैरिफ की भी टेंशन खत्म:

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चीन और जापान के रिश्ते इस समय तनावपूर्ण है। इसके चलते चीन ने बड़ा कदम उठाते हुए जापान से आने वाले सभी समुद्री खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला अचानक लिया गया, जिससे जापान को बड़ा नुकसान हुआ है, लेकिन भारत के सीफूड निर्यातकों के लिए यह एक सुनहरा मौका बन गया है। चीन अब जापान की जगह भारत जैसे देशों से समुद्री उत्पाद खरीदने की दिशा में बढ़ सकता है।





जापान और चीन के बीच यह तनाव ताइवान को लेकर चल रहे राजनीतिक मतभेदों के कारण और बढ़ गया है। फुकुशिमा परमाणु संयंत्र से संबंधित चिंताओं की वजह से चीन पहले भी जापानी समुद्री खाद्य पर रोक लगा चुका था, लेकिन हाल ही में जब जापान ने चीन को फिर से निर्यात शुरू किया, तभी यह नया प्रतिबंध लगा दिया गया। 





भारतीय निर्यातकों के लिए सुनहरा मौका





जानकारी के मुताबिक, जापान के कुल निर्यात में समुद्री खाद्य का हिस्सा भले ही केवल 1% हो, लेकिन चीन उसका सबसे बड़ा खरीदार रहा है, जो उसके कुल सीफूड निर्यात का 20–25% तक हिस्सा लेता है। इसलिए यह कदम जापान के लिए झटका साबित हुआ है। दूसरी ओर, भारतीय निर्यातकों के लिए यह खबर राहत लेकर आई है। 





दरअसल अमेरिका भारत का सबसे बड़ा समुद्री खाद्य बाजार रहा है, लेकिन हाल में अमेरिका ने भारत पर भारी टैरिफ लगा दिए। इसका कारण भारत द्वारा रूस से सस्ता तेल खरीदना बताया गया है। इन टैरिफ्स की वजह से भारतीय झींगे और मछलियाँ अमेरिकी बाजार में महंगी और कम प्रतिस्पर्धी हो गईं। नतीजा यह हुआ कि अमेरिका को भारतीय निर्यात में लगभग 9% की गिरावट आई। 





चीन बन सकता है नया बाजार





अब चीन के इस नए कदम से भारत के लिए नए बाजार खुल सकते हैं। भारत पहले ही चीन, वियतनाम और थाईलैंड जैसे एशियाई देशों में अपने निर्यात को बढ़ा रहा है। पिछले वित्त वर्ष में भारत ने करीब 7.4 अरब डॉलर मूल्य का सीफूड निर्यात किया था, जिसमें फ्रोजन झींगे और मछलियों का हिस्सा 40% से अधिक था।





सरकार ने भी इस सेक्टर को मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं। हाल में केंद्र सरकार ने कपड़ा, आभूषण और समुद्री खाद्य जैसे श्रम-आधारित उद्योगों के लिए 4.5 लाख करोड़ रुपये का सहायता पैकेज जारी किया है। इसमें झींगा उत्पादकों और निर्यातकों को विशेष लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर, चीन के जापानी सीफूड पर प्रतिबंध से भारत के निर्यातकों को बड़ी राहत मिल सकती है। 




चीन और जापान के रिश्ते इस समय तनावपूर्ण है। इसके चलते चीन ने बड़ा कदम उठाते हुए जापान से आने वाले सभी समुद्री खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला अचानक लिया गया, जिससे जापान को बड़ा नुकसान हुआ है, लेकिन भारत के सीफूड निर्यातकों के लिए यह एक सुनहरा मौका बन गया है। चीन अब जापान की जगह भारत जैसे देशों से समुद्री उत्पाद खरीदने की दिशा में बढ़ सकता है।





जापान और चीन के बीच यह तनाव ताइवान को लेकर चल रहे राजनीतिक मतभेदों के कारण और बढ़ गया है। फुकुशिमा परमाणु संयंत्र से संबंधित चिंताओं की वजह से चीन पहले भी जापानी समुद्री खाद्य पर रोक लगा चुका था, लेकिन हाल ही में जब जापान ने चीन को फिर से निर्यात शुरू किया, तभी यह नया प्रतिबंध लगा दिया गया। 





भारतीय निर्यातकों के लिए सुनहरा मौका





जानकारी के मुताबिक, जापान के कुल निर्यात में समुद्री खाद्य का हिस्सा भले ही केवल 1% हो, लेकिन चीन उसका सबसे बड़ा खरीदार रहा है, जो उसके कुल सीफूड निर्यात का 20–25% तक हिस्सा लेता है। इसलिए यह कदम जापान के लिए झटका साबित हुआ है। दूसरी ओर, भारतीय निर्यातकों के लिए यह खबर राहत लेकर आई है। 





दरअसल अमेरिका भारत का सबसे बड़ा समुद्री खाद्य बाजार रहा है, लेकिन हाल में अमेरिका ने भारत पर भारी टैरिफ लगा दिए। इसका कारण भारत द्वारा रूस से सस्ता तेल खरीदना बताया गया है। इन टैरिफ्स की वजह से भारतीय झींगे और मछलियाँ अमेरिकी बाजार में महंगी और कम प्रतिस्पर्धी हो गईं। नतीजा यह हुआ कि अमेरिका को भारतीय निर्यात में लगभग 9% की गिरावट आई। 





चीन बन सकता है नया बाजार





अब चीन के इस नए कदम से भारत के लिए नए बाजार खुल सकते हैं। भारत पहले ही चीन, वियतनाम और थाईलैंड जैसे एशियाई देशों में अपने निर्यात को बढ़ा रहा है। पिछले वित्त वर्ष में भारत ने करीब 7.4 अरब डॉलर मूल्य का सीफूड निर्यात किया था, जिसमें फ्रोजन झींगे और मछलियों का हिस्सा 40% से अधिक था।





सरकार ने भी इस सेक्टर को मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं। हाल में केंद्र सरकार ने कपड़ा, आभूषण और समुद्री खाद्य जैसे श्रम-आधारित उद्योगों के लिए 4.5 लाख करोड़ रुपये का सहायता पैकेज जारी किया है। इसमें झींगा उत्पादकों और निर्यातकों को विशेष लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर, चीन के जापानी सीफूड पर प्रतिबंध से भारत के निर्यातकों को बड़ी राहत मिल सकती है। 



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