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National (खबरीलाल न्यूज़) :: हाईवे मुआवजा घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 6 ठिकानों पर छापेमारी:

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दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ट्रांस-अरुणाचल हाईवे से जुड़े मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई की। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत इस मामले में छापेमारी अभियान शुरू किया।

यह मामला भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान मुआवजे के आकलन, उसके प्रमाणन और वितरण में हुई गंभीर अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम में सरकारी अधिकारियों और निजी लाभार्थियों की आपसी मिलीभगत के जरिए अपराध की आय अर्जित की गई और बाद में उसका धन शोधन किया गया। ईडी की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह परियोजना कुल 157.70 किलोमीटर लंबी थी, जिसे प्रशासनिक रूप से याचुली (0.00–43.635 किमी), जीरो (43.635–63.700 किमी) और रागा (63.700–149.440 किमी) सेक्टरों में विभाजित किया गया था। जांच में सामने आया है कि जीरो के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर द्वारा शुरुआत में पोटिन-बोपी खंड के लिए 289.40 करोड़ रुपए का मुआवजा आकलन तैयार किया गया था। हालांकि, बाद में राज्य स्तरीय बैठक में इस मुआवजा पैकेज को सीमित करते हुए कुल 198.56 करोड़ रुपए पर फ्रीज कर दिया गया।

 ईडी की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मुआवजा वितरण के दौरान भारी मात्रा में धन को बचत खातों में डायवर्ट किया गया और कई फर्जी लाभार्थियों के नाम पर चेक जारी किए गए। इससे सरकारी खजाने को लगभग 44 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। जांच एजेंसी के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों ने जानबूझकर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए ट्रांस-अरुणाचल हाईवे (पोटिन–बोपी) परियोजना के याजाली सेक्टर में संरचनाओं का फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर आकलन तैयार किया और उसका प्रमाणन किया। इसके जरिए अस्तित्वहीन संरचनाओं और अयोग्य लाभार्थियों के नाम जोड़कर अवैध रूप से मुआवजा दिलाया गया।

 जांच के तहत ईडी ने 6 आवासीय परिसरों पर तलाशी अभियान शुरू किया है। इनमें तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर, डीएलआरएसओ, आकलन से जुड़े अधिकारी और प्रमुख निजी लाभार्थी/कनड्यूट्स के ठिकाने शामिल हैं। छापेमारी का उद्देश्य दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्य जुटाना तथा अपराध की आय से अर्जित चल-अचल संपत्तियों की पहचान करना है। ईडी के अनुसार, इन छह परिसरों में से चार इटानगर और उसके आसपास स्थित हैं, एक लिकाबाली (डिब्रूगढ़ के पास) में और एक आलो में है, जो मेचुका-चीन सीमा के नजदीक स्थित है। तलाशी के ये स्थान अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी से पूर्वी हिस्सों तक फैले हुए हैं और इनमें सीमा से सटे, दुर्गम पहाड़ी इलाकों के संवेदनशील और दूरस्थ क्षेत्र भी शामिल हैं। तलाशी के दौरान एक फर्जी लाभार्थी के परिसर से 2.2 करोड़ रुपए नकद बरामद किए जाने की भी पुष्टि हुई है। ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।


दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ट्रांस-अरुणाचल हाईवे से जुड़े मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई की। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत इस मामले में छापेमारी अभियान शुरू किया।

यह मामला भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान मुआवजे के आकलन, उसके प्रमाणन और वितरण में हुई गंभीर अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम में सरकारी अधिकारियों और निजी लाभार्थियों की आपसी मिलीभगत के जरिए अपराध की आय अर्जित की गई और बाद में उसका धन शोधन किया गया। ईडी की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह परियोजना कुल 157.70 किलोमीटर लंबी थी, जिसे प्रशासनिक रूप से याचुली (0.00–43.635 किमी), जीरो (43.635–63.700 किमी) और रागा (63.700–149.440 किमी) सेक्टरों में विभाजित किया गया था। जांच में सामने आया है कि जीरो के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर द्वारा शुरुआत में पोटिन-बोपी खंड के लिए 289.40 करोड़ रुपए का मुआवजा आकलन तैयार किया गया था। हालांकि, बाद में राज्य स्तरीय बैठक में इस मुआवजा पैकेज को सीमित करते हुए कुल 198.56 करोड़ रुपए पर फ्रीज कर दिया गया।

 ईडी की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मुआवजा वितरण के दौरान भारी मात्रा में धन को बचत खातों में डायवर्ट किया गया और कई फर्जी लाभार्थियों के नाम पर चेक जारी किए गए। इससे सरकारी खजाने को लगभग 44 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। जांच एजेंसी के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों ने जानबूझकर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए ट्रांस-अरुणाचल हाईवे (पोटिन–बोपी) परियोजना के याजाली सेक्टर में संरचनाओं का फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर आकलन तैयार किया और उसका प्रमाणन किया। इसके जरिए अस्तित्वहीन संरचनाओं और अयोग्य लाभार्थियों के नाम जोड़कर अवैध रूप से मुआवजा दिलाया गया।

 जांच के तहत ईडी ने 6 आवासीय परिसरों पर तलाशी अभियान शुरू किया है। इनमें तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर, डीएलआरएसओ, आकलन से जुड़े अधिकारी और प्रमुख निजी लाभार्थी/कनड्यूट्स के ठिकाने शामिल हैं। छापेमारी का उद्देश्य दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्य जुटाना तथा अपराध की आय से अर्जित चल-अचल संपत्तियों की पहचान करना है। ईडी के अनुसार, इन छह परिसरों में से चार इटानगर और उसके आसपास स्थित हैं, एक लिकाबाली (डिब्रूगढ़ के पास) में और एक आलो में है, जो मेचुका-चीन सीमा के नजदीक स्थित है। तलाशी के ये स्थान अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी से पूर्वी हिस्सों तक फैले हुए हैं और इनमें सीमा से सटे, दुर्गम पहाड़ी इलाकों के संवेदनशील और दूरस्थ क्षेत्र भी शामिल हैं। तलाशी के दौरान एक फर्जी लाभार्थी के परिसर से 2.2 करोड़ रुपए नकद बरामद किए जाने की भी पुष्टि हुई है। ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है।


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