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Raipur (खबरीलाल न्यूज़) :: एआई आधारित शिक्षा से भारत के युवाओं को मिलेगा वैश्विक मंच - सांसद बृजमोहन अग्रवाल:

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रायपुर/ नई दिल्ली 18 फरवरी - सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल बुधवार को नई दिल्ली में “शिक्षा में एआई का परिचय” विषय पर आयोजित शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हुए। बैठक में श्री अग्रवाल ने शिक्षा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समावेश को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि एआई न केवल शिक्षण पद्धतियों को आधुनिक बनाएगा, बल्कि छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए भी तैयार करेगा। 

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक का उपयोग भारतीय शिक्षा व्यवस्था की मूल भावना और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए, ताकि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सकें।बैठक के दौरान कोलंबिया यूनिवर्सिटी, अमेरिका के वाइस डीन डॉ. विशाल मिश्रा ने शिक्षा के क्षेत्र में एआई के बढ़ते प्रभाव, इसके व्यावहारिक उपयोग और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एआई व्यक्तिगत शिक्षण, मूल्यांकन प्रणाली और शिक्षकों की सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि भारत जैसे युवा देश के लिए एआई आधारित शिक्षा नवाचार का माध्यम बन सकती है, बशर्ते इसे समावेशी, नैतिक और छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाए। उन्होंने सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे डिजिटल और तकनीकी सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल भारत को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में और मजबूत करेगी। बैठक में उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विशेषज्ञों एवं संसदीय सदस्यों ने भी अपने विचार साझा किए।


रायपुर/ नई दिल्ली 18 फरवरी - सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल बुधवार को नई दिल्ली में “शिक्षा में एआई का परिचय” विषय पर आयोजित शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हुए। बैठक में श्री अग्रवाल ने शिक्षा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समावेश को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि एआई न केवल शिक्षण पद्धतियों को आधुनिक बनाएगा, बल्कि छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए भी तैयार करेगा। 

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक का उपयोग भारतीय शिक्षा व्यवस्था की मूल भावना और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए, ताकि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सकें।बैठक के दौरान कोलंबिया यूनिवर्सिटी, अमेरिका के वाइस डीन डॉ. विशाल मिश्रा ने शिक्षा के क्षेत्र में एआई के बढ़ते प्रभाव, इसके व्यावहारिक उपयोग और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एआई व्यक्तिगत शिक्षण, मूल्यांकन प्रणाली और शिक्षकों की सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि भारत जैसे युवा देश के लिए एआई आधारित शिक्षा नवाचार का माध्यम बन सकती है, बशर्ते इसे समावेशी, नैतिक और छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाए। उन्होंने सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे डिजिटल और तकनीकी सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल भारत को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में और मजबूत करेगी। बैठक में उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विशेषज्ञों एवं संसदीय सदस्यों ने भी अपने विचार साझा किए।


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