रायपुर - बिजली की नई दरों से पहले उद्योग जगत में टैरिफ को लेकर चर्चाएं गर्म है। छत्तीसगढ़ के मिनी स्टील प्लांट (फर्नेस) उद्योगों ने आगामी वर्ष 2026-27 की बिजली दरों को लेकर कहा कि टैरिफ न बढ़ाया जाए और उद्योगों को स्थिर व प्रतिस्पर्धी दरें दी रें दी जाए। इस संबंध में मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग को सुझाव-पत्र सौपा है। संघ के महासचिव मनीष धुप्पड़ ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में स्टील हब के रूप में पहचान बना चुका है। यहां कम पूंजी में अधिक उत्पादन करने वाले छोटे और मध्यम लौह उद्योग बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार दे रहे है। ऐसे में बिजली दरों में वृद्धि से पूरे औद्योगिक तंत्र पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। संघ ने कहा कि
राज्य में करीब 100 इकाइयों के अंतर्गत लगभग 300 मिनी स्टील प्लांट संचालित है। ये उद्योग कुल बिजली खपत का लगभग 30 से 35 प्रतिशत उपयोग करते हैं। प्रतिवर्ष लगभग 750 करोड़ यूनिट बिजली की खपत करते हुए 5 से 6 हजार करोड़ रुपए का राजस्व बिजली कंपनियों को देते हैं। वस्तु एवं सेवा कर के रूप में राज्य और केंद्र को 9 से 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक का योगदान मिलता है।
छग मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन की प्रमुख मांगें -
1. पांच साल के लिए बहुवर्षीय दर व्यवस्था लागू की जाए, ताकि उद्योग भविष्य की योजना बना सकें।
2. अत्यधिक बिजली खपत वाले उद्योगों के लिए अलग श्रेणी बनाई जाए।
3. औसत बिलिंग दर लगभग 5.50 रुपए प्रति यूनिट रखी जाए, ताकि अन्य स्टील उत्पादक राज्यों के बराबर प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
4. लोड फैक्टर प्रोत्साहन योजना पहले की तरह जारी रहे।
5. ईंधन एवं बिजली खरीद समायोजन अधिभार को शून्य पर लाया जाए।
6. सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त शुल्क में छूट दी जाए।
7. विलंब भुगतान अधिभार को दैनिक आधार पर तर्कसंगत बनाया जाए।
8. अग्रिम भुगतान पर प्रोत्साहन और प्री-पेड मीटर का विकल्प दिया जाए।
रायपुर - बिजली की नई दरों से पहले उद्योग जगत में टैरिफ को लेकर चर्चाएं गर्म है। छत्तीसगढ़ के मिनी स्टील प्लांट (फर्नेस) उद्योगों ने आगामी वर्ष 2026-27 की बिजली दरों को लेकर कहा कि टैरिफ न बढ़ाया जाए और उद्योगों को स्थिर व प्रतिस्पर्धी दरें दी रें दी जाए। इस संबंध में मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग को सुझाव-पत्र सौपा है। संघ के महासचिव मनीष धुप्पड़ ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में स्टील हब के रूप में पहचान बना चुका है। यहां कम पूंजी में अधिक उत्पादन करने वाले छोटे और मध्यम लौह उद्योग बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार दे रहे है। ऐसे में बिजली दरों में वृद्धि से पूरे औद्योगिक तंत्र पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। संघ ने कहा कि
राज्य में करीब 100 इकाइयों के अंतर्गत लगभग 300 मिनी स्टील प्लांट संचालित है। ये उद्योग कुल बिजली खपत का लगभग 30 से 35 प्रतिशत उपयोग करते हैं। प्रतिवर्ष लगभग 750 करोड़ यूनिट बिजली की खपत करते हुए 5 से 6 हजार करोड़ रुपए का राजस्व बिजली कंपनियों को देते हैं। वस्तु एवं सेवा कर के रूप में राज्य और केंद्र को 9 से 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक का योगदान मिलता है।
छग मिनी स्टील प्लांट एसोसिएशन की प्रमुख मांगें -
1. पांच साल के लिए बहुवर्षीय दर व्यवस्था लागू की जाए, ताकि उद्योग भविष्य की योजना बना सकें।
2. अत्यधिक बिजली खपत वाले उद्योगों के लिए अलग श्रेणी बनाई जाए।
3. औसत बिलिंग दर लगभग 5.50 रुपए प्रति यूनिट रखी जाए, ताकि अन्य स्टील उत्पादक राज्यों के बराबर प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
4. लोड फैक्टर प्रोत्साहन योजना पहले की तरह जारी रहे।
5. ईंधन एवं बिजली खरीद समायोजन अधिभार को शून्य पर लाया जाए।
6. सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त शुल्क में छूट दी जाए।
7. विलंब भुगतान अधिभार को दैनिक आधार पर तर्कसंगत बनाया जाए।
8. अग्रिम भुगतान पर प्रोत्साहन और प्री-पेड मीटर का विकल्प दिया जाए।



Journalist खबरीलाल














