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International (खबरीलाल न्यूज़) :: अपने शरीर पर हक मांग रही हैं जापान में महिलाएं :

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टोक्यो. जापान की 29 साल की काजाने काजिया ने 27 साल की उम्र में अमरीका जाकर नसबंदी करवाई थी क्योंकि वह कभी बच्चे नहीं चाहती थीं। उनका कहना है कि जापान का समाज महिलाओं पर मां बनने का दबाव डालता है। जापान में एक पुराना मातृत्व संरक्षण कानून है जिसके तहत किसी महिला को नसबंदी कराने की अनुमति तभी मिलती है जब उसके पहले से कई बच्चे हों और गर्भावस्था स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो। पति की इजाजत भी जरूरी होती है। अब कुछ महिलाएं नसबंदी से जुड़े कानून को चुनौती दे रही हैं।

महिलाओं को आजाद इंसान समझें... काजिया और चार अन्य महिलाओं की अपील पर फैसला अगले हफ्ते आने वाला है। इनका कहना है कि यह कानून महिलाओं को स्वतंत्र इंसान नहीं बल्कि भविष्य की 'माँ' के रूप में देखता है और उनके शरीर पर खुद फैसले लेने की आजादी छीनता है। इनके वकील ने कहा कि यह कानून पुराने समय की सोच से जुड़ा है, जब महिलाओं को जनसंख्या बढ़ाने के साधन की तरह देखा जाता था।


टोक्यो. जापान की 29 साल की काजाने काजिया ने 27 साल की उम्र में अमरीका जाकर नसबंदी करवाई थी क्योंकि वह कभी बच्चे नहीं चाहती थीं। उनका कहना है कि जापान का समाज महिलाओं पर मां बनने का दबाव डालता है। जापान में एक पुराना मातृत्व संरक्षण कानून है जिसके तहत किसी महिला को नसबंदी कराने की अनुमति तभी मिलती है जब उसके पहले से कई बच्चे हों और गर्भावस्था स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो। पति की इजाजत भी जरूरी होती है। अब कुछ महिलाएं नसबंदी से जुड़े कानून को चुनौती दे रही हैं।

महिलाओं को आजाद इंसान समझें... काजिया और चार अन्य महिलाओं की अपील पर फैसला अगले हफ्ते आने वाला है। इनका कहना है कि यह कानून महिलाओं को स्वतंत्र इंसान नहीं बल्कि भविष्य की 'माँ' के रूप में देखता है और उनके शरीर पर खुद फैसले लेने की आजादी छीनता है। इनके वकील ने कहा कि यह कानून पुराने समय की सोच से जुड़ा है, जब महिलाओं को जनसंख्या बढ़ाने के साधन की तरह देखा जाता था।


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