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Chhattisgarh (खबरीलाल न्यूज़) :: वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, कुसमुरा के उमाशंकर सॉ मिल को किया गया सील:

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रायगढ़। जिले में अवैध रूप से संचालित हो रही सॉ मिलों के खिलाफ वन विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है। आज ग्राम कुसमुरा स्थित उमाशंकर सॉ मिल पर वनमंडलाधिकारी रायगढ़ के निर्देश पर उपवनमंडलाधिकारी रायगढ़ के नेतृत्व में 10 सदस्यीय टीम ने छापामार कार्रवाई की। छापे के दौरान सॉ मिल संचालन में पाया गया और परिसर में बड़ी मात्रा में काष्ठ (लकड़ी) भी जमा था। वन विभाग की टीम ने सॉ मिल संचालक से सॉ मिल लाइसेंस, वनोपज से संबंधित दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर, निवर्तन रजिस्टर और आवक रजिस्टर प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन संचालक आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं कर सका।

जांच में स्पष्ट हुआ कि संचालक ने काष्ठ चिरान अधिनियम 1984 की धारा 4, 7, 9 और 10 का उल्लंघन किया। इसके चलते वन विभाग ने नियमानुसार सॉ मिल को सील कर दिया और आगे की वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी। वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि अवैध सॉ मिल संचालन और वन उपज के नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इस कार्रवाई में प्रमुख रूप से तनमय कौशिक (प्रशिक्षु भा.व.स.), परिक्षेत्राधिकारी संजय लकड़ा, उड़नदस्ता प्रभारी रोशन सिदार, राजेश तिवारी, संदीप नामदेव, स्वर्णलता लकड़ा (उपवनक्षेत्राधिकारी), वनपाल रजनी टोप्पो, टीकाराम सिदार और शुकलाल खड़िया की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

वन विभाग ने स्थानीय लोगों को चेताया कि अवैध लकड़ी कटाई, सॉ मिल संचालन और नियमों का उल्लंघन गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वन अधिकारियों ने बताया कि कार्रवाई का उद्देश्य वन संरक्षण, वन्य जीवन सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना है। विभाग लगातार निगरानी रख रहा है और अवैध गतिविधियों की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। इस घटना से स्पष्ट हुआ कि छत्तीसगढ़ में वन विभाग अपनी निगरानी और कार्रवाई के माध्यम से जंगल संरक्षण और अवैध लकड़ी व्यापार को रोकने में सक्षम है। संचालकों और व्यापारियों को चेतावनी दी गई है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी और उन्हें वन कानूनों के तहत सजा भुगतनी पड़ेगी। वन विभाग का मानना है कि ऐसी कार्रवाई से न केवल अवैध सॉ मिलों की संख्या में कमी आएगी, बल्कि वन संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा और स्थानीय समुदायों के लिए पारिस्थितिक संतुलन बना रहेगा।


रायगढ़। जिले में अवैध रूप से संचालित हो रही सॉ मिलों के खिलाफ वन विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है। आज ग्राम कुसमुरा स्थित उमाशंकर सॉ मिल पर वनमंडलाधिकारी रायगढ़ के निर्देश पर उपवनमंडलाधिकारी रायगढ़ के नेतृत्व में 10 सदस्यीय टीम ने छापामार कार्रवाई की। छापे के दौरान सॉ मिल संचालन में पाया गया और परिसर में बड़ी मात्रा में काष्ठ (लकड़ी) भी जमा था। वन विभाग की टीम ने सॉ मिल संचालक से सॉ मिल लाइसेंस, वनोपज से संबंधित दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर, निवर्तन रजिस्टर और आवक रजिस्टर प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन संचालक आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं कर सका।

जांच में स्पष्ट हुआ कि संचालक ने काष्ठ चिरान अधिनियम 1984 की धारा 4, 7, 9 और 10 का उल्लंघन किया। इसके चलते वन विभाग ने नियमानुसार सॉ मिल को सील कर दिया और आगे की वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी। वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि अवैध सॉ मिल संचालन और वन उपज के नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इस कार्रवाई में प्रमुख रूप से तनमय कौशिक (प्रशिक्षु भा.व.स.), परिक्षेत्राधिकारी संजय लकड़ा, उड़नदस्ता प्रभारी रोशन सिदार, राजेश तिवारी, संदीप नामदेव, स्वर्णलता लकड़ा (उपवनक्षेत्राधिकारी), वनपाल रजनी टोप्पो, टीकाराम सिदार और शुकलाल खड़िया की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

वन विभाग ने स्थानीय लोगों को चेताया कि अवैध लकड़ी कटाई, सॉ मिल संचालन और नियमों का उल्लंघन गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वन अधिकारियों ने बताया कि कार्रवाई का उद्देश्य वन संरक्षण, वन्य जीवन सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना है। विभाग लगातार निगरानी रख रहा है और अवैध गतिविधियों की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। इस घटना से स्पष्ट हुआ कि छत्तीसगढ़ में वन विभाग अपनी निगरानी और कार्रवाई के माध्यम से जंगल संरक्षण और अवैध लकड़ी व्यापार को रोकने में सक्षम है। संचालकों और व्यापारियों को चेतावनी दी गई है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी और उन्हें वन कानूनों के तहत सजा भुगतनी पड़ेगी। वन विभाग का मानना है कि ऐसी कार्रवाई से न केवल अवैध सॉ मिलों की संख्या में कमी आएगी, बल्कि वन संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा और स्थानीय समुदायों के लिए पारिस्थितिक संतुलन बना रहेगा।


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