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Raipur (खबरीलाल न्यूज़) :: आधुनिक खेती से किसान कुनाल कश्यप को मिली बेहतर आमदनी, उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का मिला लाभ :

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बिलासपुर, 7 मई 2026/ जिले के तखतपुर विकासखंड के ग्राम बहतराई निवासी किसान श्री कुनाल कश्यप ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के अंतर्गत संरक्षित खेती अपनाकर सफलता की नई मिसाल पेश की है। वर्ष 2024-25 में उद्यान विभाग की सहायता से उन्हें 4000 वर्ग मीटर में शेडनेट हाउस निर्माण हेतु अनुदान प्राप्त हुआ। इसके बाद उन्होंने शेडनेट हाउस के अंदर हाईब्रिड पत्तागोभी के लगभग 20 हजार पौधों का रोपण किया, जिससे उन्हें पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक लाभ मिलने लगा है।

किसान कुनाल कश्यप ने बताया कि पहले वे सामान्य तरीके से सब्जी की खेती करते थे, लेकिन उतना लाभ नहीं मिल पाता था। संरक्षित खेती तकनीक अपनाने के बाद उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है। वर्तमान में 0.40 हेक्टेयर कृषि भूमि में की जा रही खेती से लगभग 70 से 90 क्विंटल उत्पादन का अनुमान है। इस खेती में लगभग 1 से 1.50 लाख रुपये की लागत आई है, जबकि बिक्री से 3 से 3.50 लाख रुपये तक की आय होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि उद्यान विभाग के मार्गदर्शन और नई तकनीक के उपयोग से कम क्षेत्र और कम लागत में अधिक मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है। किसान की इस सफलता से क्षेत्र के अन्य किसान भी संरक्षित खेती की ओर प्रेरित हो रहे हैं।


बिलासपुर, 7 मई 2026/ जिले के तखतपुर विकासखंड के ग्राम बहतराई निवासी किसान श्री कुनाल कश्यप ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के अंतर्गत संरक्षित खेती अपनाकर सफलता की नई मिसाल पेश की है। वर्ष 2024-25 में उद्यान विभाग की सहायता से उन्हें 4000 वर्ग मीटर में शेडनेट हाउस निर्माण हेतु अनुदान प्राप्त हुआ। इसके बाद उन्होंने शेडनेट हाउस के अंदर हाईब्रिड पत्तागोभी के लगभग 20 हजार पौधों का रोपण किया, जिससे उन्हें पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक लाभ मिलने लगा है।

किसान कुनाल कश्यप ने बताया कि पहले वे सामान्य तरीके से सब्जी की खेती करते थे, लेकिन उतना लाभ नहीं मिल पाता था। संरक्षित खेती तकनीक अपनाने के बाद उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है। वर्तमान में 0.40 हेक्टेयर कृषि भूमि में की जा रही खेती से लगभग 70 से 90 क्विंटल उत्पादन का अनुमान है। इस खेती में लगभग 1 से 1.50 लाख रुपये की लागत आई है, जबकि बिक्री से 3 से 3.50 लाख रुपये तक की आय होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि उद्यान विभाग के मार्गदर्शन और नई तकनीक के उपयोग से कम क्षेत्र और कम लागत में अधिक मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है। किसान की इस सफलता से क्षेत्र के अन्य किसान भी संरक्षित खेती की ओर प्रेरित हो रहे हैं।


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