संवाददाता, सौरभ साहू , रायपुर छत्तीसगढ़।
रायपुर। भारतीय संस्कृति में तीर्थ केवल यात्रा का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मिक चेतना, सांस्कृतिक एकात्मता और सामाजिक समरसता का प्रतीक रहे हैं। अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम के दर्शन करना करोड़ों भारतीयों की श्रद्धा और भावनाओं से जुड़ा जीवन का एक महत्वपूर्ण संकल्प होता है। वर्षों तक अनेक परिवार आर्थिक, सामाजिक अथवा व्यवस्थागत कारणों से इस पुण्य अवसर से वंचित रह जाते थे। ऐसे समय में मुख्यमंत्री, विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रारंभ की गई रामलला दर्शन योजना जन-आस्था को सम्मान देने वाली एक ऐतिहासिक पहल बनकर सामने आई है।
यह योजना केवल तीर्थयात्रा का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह गरीब, जरूरतमंद, बुजुर्ग और सामान्य नागरिकों के सपनों को साकार करने का एक संवेदनशील प्रयास है। राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक अभाव किसी श्रद्धालु की आस्था के मार्ग में बाधा न बने। इसी भावना के साथ वर्ष 2024 में इस योजना की शुरुआत की गई और आज यह जनविश्वास तथा जनसहभागिता का एक सशक्त उदाहरण बन चुकी है।
मुझे यह बताते हुए अत्यंत संतोष और गर्व का अनुभव हो रहा है कि अब तक 56 विशेष ट्रेनों के माध्यम से 47 हजार 600 से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम में रामलला के दर्शन कराए जा चुके हैं। यह केवल एक सांख्यिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों की भावनाओं, विश्वास और संतोष की अभिव्यक्ति है। जब कोई बुजुर्ग श्रद्धालु वर्षों बाद अपने आराध्य के दर्शन कर भावविभोर होता है, जब किसी ग्रामीण परिवार का सपना सरकार के सहयोग से साकार होता है, तब यह योजना अपने वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त करती है।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा इस योजना के क्रियान्वयन को अत्यंत सुव्यवस्थित और गरिमापूर्ण ढंग से संचालित किया जा रहा है। यात्रियों के लिए सुरक्षित परिवहन, स्वच्छ एवं व्यवस्थित आवास, गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। हमारी प्राथमिकता यह रही है कि प्रत्येक श्रद्धालु को सम्मान, सुविधा और आत्मीयता के साथ यात्रा का अनुभव प्राप्त हो।
मैं सदैव यह मानता हूं कि शासन की सफलता केवल योजनाएं बनाने में नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक उनका लाभ पहुंचाने में निहित होती है। इसी दृष्टिकोण से रामलला दर्शन योजना को पारदर्शी, सरल और सर्वसुलभ बनाया गया है। पात्र हितग्राहियों का चयन निष्पक्ष प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर मिल सके।
रामलला दर्शन योजना सामाजिक समावेश और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह योजना ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को समान रूप से जोड़ रही है। प्रभु श्रीराम भारतीय जीवन-मूल्यों के आदर्श हैं। उनकी मर्यादा, करुणा, न्याय और लोककल्याण की भावना भारतीय समाज को सदैव प्रेरित करती रही है। यह योजना उन्हीं आदर्शों को जनजीवन से जोड़ने का एक विनम्र प्रयास है।
आज जब भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा के साथ विश्व पटल पर स्थापित कर रहा है, तब छत्तीसगढ़ भी अपनी समृद्ध परंपराओं, लोकसंस्कृति और धार्मिक चेतना के साथ इस राष्ट्रीय सांस्कृतिक जागरण का सक्रिय सहभागी बना है। रामलला दर्शन योजना इसी व्यापक दृष्टि का हिस्सा है। यह धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में भी सकारात्मक योगदान दे रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार “सबका साथ, सबका विकास” और “जनहित सर्वाेपरि” की भावना के साथ कार्य कर रही है। हमारी सरकार का विश्वास है कि विकास केवल भौतिक संसाधनों का विस्तार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक संतुलन और सामाजिक आत्मविश्वास का भी संवर्धन है। रामलला दर्शन योजना इसी सोच का जीवंत उदाहरण है।
योजना के अंतर्गत आवेदन प्रक्रिया को भी अत्यंत सरल रखा गया है। इच्छुक नागरिक अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय, पर्यटन विभाग, नगर निगम, नगर पंचायत अथवा जनपद पंचायत कार्यालय से आवेदन प्राप्त कर सकते हैं। आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा करने के बाद जिला प्रशासन द्वारा पात्र हितग्राहियों का चयन किया जाता है। यात्रा से पूर्व स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जाता है, ताकि सभी श्रद्धालु सुरक्षित एवं स्वस्थ यात्रा कर सकें।
हमारा प्रयास है कि आने वाले समय में इस योजना का दायरा और अधिक व्यापक हो तथा अधिक से अधिक श्रद्धालु इसका लाभ प्राप्त कर सकें। छत्तीसगढ़ सरकार जनआस्था, सांस्कृतिक गौरव और लोककल्याण के इस अभियान को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
रामलला दर्शन योजना केवल अयोध्या तक की यात्रा नहीं, बल्कि यह श्रद्धा से सम्मान तक, आस्था से आत्मविश्वास तक और जनकल्याण से सांस्कृतिक उत्थान तक की यात्रा है। मुझे विश्वास है कि यह पहल आने वाले वर्षों में जनसेवा और सांस्कृतिक समन्वय के एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित होगी।
संवाददाता, सौरभ साहू , रायपुर छत्तीसगढ़।
रायपुर। भारतीय संस्कृति में तीर्थ केवल यात्रा का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मिक चेतना, सांस्कृतिक एकात्मता और सामाजिक समरसता का प्रतीक रहे हैं। अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम के दर्शन करना करोड़ों भारतीयों की श्रद्धा और भावनाओं से जुड़ा जीवन का एक महत्वपूर्ण संकल्प होता है। वर्षों तक अनेक परिवार आर्थिक, सामाजिक अथवा व्यवस्थागत कारणों से इस पुण्य अवसर से वंचित रह जाते थे। ऐसे समय में मुख्यमंत्री, विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रारंभ की गई रामलला दर्शन योजना जन-आस्था को सम्मान देने वाली एक ऐतिहासिक पहल बनकर सामने आई है।
यह योजना केवल तीर्थयात्रा का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह गरीब, जरूरतमंद, बुजुर्ग और सामान्य नागरिकों के सपनों को साकार करने का एक संवेदनशील प्रयास है। राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक अभाव किसी श्रद्धालु की आस्था के मार्ग में बाधा न बने। इसी भावना के साथ वर्ष 2024 में इस योजना की शुरुआत की गई और आज यह जनविश्वास तथा जनसहभागिता का एक सशक्त उदाहरण बन चुकी है।
मुझे यह बताते हुए अत्यंत संतोष और गर्व का अनुभव हो रहा है कि अब तक 56 विशेष ट्रेनों के माध्यम से 47 हजार 600 से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम में रामलला के दर्शन कराए जा चुके हैं। यह केवल एक सांख्यिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों की भावनाओं, विश्वास और संतोष की अभिव्यक्ति है। जब कोई बुजुर्ग श्रद्धालु वर्षों बाद अपने आराध्य के दर्शन कर भावविभोर होता है, जब किसी ग्रामीण परिवार का सपना सरकार के सहयोग से साकार होता है, तब यह योजना अपने वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त करती है।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा इस योजना के क्रियान्वयन को अत्यंत सुव्यवस्थित और गरिमापूर्ण ढंग से संचालित किया जा रहा है। यात्रियों के लिए सुरक्षित परिवहन, स्वच्छ एवं व्यवस्थित आवास, गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। हमारी प्राथमिकता यह रही है कि प्रत्येक श्रद्धालु को सम्मान, सुविधा और आत्मीयता के साथ यात्रा का अनुभव प्राप्त हो।
मैं सदैव यह मानता हूं कि शासन की सफलता केवल योजनाएं बनाने में नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक उनका लाभ पहुंचाने में निहित होती है। इसी दृष्टिकोण से रामलला दर्शन योजना को पारदर्शी, सरल और सर्वसुलभ बनाया गया है। पात्र हितग्राहियों का चयन निष्पक्ष प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर मिल सके।
रामलला दर्शन योजना सामाजिक समावेश और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह योजना ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को समान रूप से जोड़ रही है। प्रभु श्रीराम भारतीय जीवन-मूल्यों के आदर्श हैं। उनकी मर्यादा, करुणा, न्याय और लोककल्याण की भावना भारतीय समाज को सदैव प्रेरित करती रही है। यह योजना उन्हीं आदर्शों को जनजीवन से जोड़ने का एक विनम्र प्रयास है।
आज जब भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा के साथ विश्व पटल पर स्थापित कर रहा है, तब छत्तीसगढ़ भी अपनी समृद्ध परंपराओं, लोकसंस्कृति और धार्मिक चेतना के साथ इस राष्ट्रीय सांस्कृतिक जागरण का सक्रिय सहभागी बना है। रामलला दर्शन योजना इसी व्यापक दृष्टि का हिस्सा है। यह धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में भी सकारात्मक योगदान दे रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार “सबका साथ, सबका विकास” और “जनहित सर्वाेपरि” की भावना के साथ कार्य कर रही है। हमारी सरकार का विश्वास है कि विकास केवल भौतिक संसाधनों का विस्तार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक संतुलन और सामाजिक आत्मविश्वास का भी संवर्धन है। रामलला दर्शन योजना इसी सोच का जीवंत उदाहरण है।
योजना के अंतर्गत आवेदन प्रक्रिया को भी अत्यंत सरल रखा गया है। इच्छुक नागरिक अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय, पर्यटन विभाग, नगर निगम, नगर पंचायत अथवा जनपद पंचायत कार्यालय से आवेदन प्राप्त कर सकते हैं। आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा करने के बाद जिला प्रशासन द्वारा पात्र हितग्राहियों का चयन किया जाता है। यात्रा से पूर्व स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित किया जाता है, ताकि सभी श्रद्धालु सुरक्षित एवं स्वस्थ यात्रा कर सकें।
हमारा प्रयास है कि आने वाले समय में इस योजना का दायरा और अधिक व्यापक हो तथा अधिक से अधिक श्रद्धालु इसका लाभ प्राप्त कर सकें। छत्तीसगढ़ सरकार जनआस्था, सांस्कृतिक गौरव और लोककल्याण के इस अभियान को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
रामलला दर्शन योजना केवल अयोध्या तक की यात्रा नहीं, बल्कि यह श्रद्धा से सम्मान तक, आस्था से आत्मविश्वास तक और जनकल्याण से सांस्कृतिक उत्थान तक की यात्रा है। मुझे विश्वास है कि यह पहल आने वाले वर्षों में जनसेवा और सांस्कृतिक समन्वय के एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित होगी।



Journalist खबरीलाल














