इंडियन बुलियन ज्वेलरी एसोसिएशन (IBJA) के प्रदेश अध्यक्ष श्री तिलोकचंद बरड़िया ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा देशवासियों से एक वर्ष तक नए सोने की खरीद को सीमित रखने एवं घरेलू स्वर्ण संपदा के अधिकतम उपयोग की अपील का स्वागत करते हुए इसे राष्ट्रहित में लिया गया दूरदर्शी एवं ऐतिहासिक कदम बताया है।
तिलोकचंद बरड़िया ने कहा कि प्रधानमंत्री की यह सोच केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत को आर्थिक रूप से और अधिक आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि देशहित सर्वोपरि है और ज्वेलरी उद्योग सदैव राष्ट्र निर्माण में अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रतिबद्ध रहा है।
श्री बरड़िया ने कहा कि भारत विश्व के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता देशों में शामिल है तथा प्रतिवर्ष भारी मात्रा में सोने का आयात किया जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता तथा बढ़ती महंगाई के दौर में प्रधानमंत्री की यह अपील देश की आर्थिक मजबूती और दीर्घकालिक प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक एवं प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि भारतीय परिवारों के पास लगभग 25,000 टन से अधिक सोना सुरक्षित रूप में मौजूद है, जो यदि पुनः आर्थिक गतिविधियों में शामिल किया जाए तो देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है। पुराने एवं निष्क्रिय सोने को आधुनिक डिज़ाइनों वाली नई ज्वेलरी में परिवर्तित करने की प्रक्रिया न केवल उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी होगी, बल्कि इससे सोने के आयात में कमी आकर देश की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
प्रदेश अध्यक्ष तिलोकचंद बरड़िया ने कहा कि IBJA “Gold Exchange & Reuse Movement” के माध्यम से पूरे प्रदेश एवं देशभर में जनजागरूकता अभियान चलाएगी, ताकि लोग घरेलू स्वर्ण संपदा के महत्व को समझें और आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़ें। उन्होंने कहा कि यह समय केवल व्यापार करने का नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति में सहभागी बनने का है।
उन्होंने जानकारी दी कि अनोपचंद तिलोकचंद ज्वैलर्स प्रा. लि. द्वारा ग्राहकों के लिए विशेष “गोल्ड एक्सचेंज प्रोग्राम” प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत उपभोक्ता अपने पुराने एवं अनुपयोगी सोने के आभूषणों को आधुनिक डिज़ाइनों वाली नई ज्वेलरी में आसानी से एक्सचेंज कर सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य ग्राहकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ घरों में रखी निष्क्रिय स्वर्ण संपदा के पुनः उपयोग को बढ़ावा देना है, ताकि सोने के आयात पर निर्भरता कम हो तथा आत्मनिर्भर भारत की भावना को और अधिक मजबूती मिल सके।
श्री बरड़िया ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक व्यावसायिक योजना नहीं, बल्कि “राष्ट्रहित में व्यापार” की भावना का उदाहरण है। इससे उपभोक्ताओं को आधुनिक ज्वेलरी का लाभ मिलेगा, व्यापार को नई दिशा मिलेगी तथा देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्राप्त होगी। उन्होंने प्रदेश के ज्वेलर्स, व्यापारिक संगठनों एवं आम नागरिकों से अपील की कि वे “पुराना सोना – नया भारत” अभियान से जुड़कर प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि देशवासी घरेलू स्वर्ण संपदा के पुनः उपयोग को अपनाते हैं, तो भारत आर्थिक रूप से और अधिक सक्षम, मजबूत एवं आत्मनिर्भर बनकर उभरेगा।
अंत में तिलोकचंद बरड़िया ने कहा कि भारतीय ज्वेलरी उद्योग सदैव राष्ट्रहित, रोजगार सृजन, स्वदेशी व्यापार एवं आर्थिक विकास के साथ खड़ा रहा है और भविष्य में भी देश की प्रगति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।
इंडियन बुलियन ज्वेलरी एसोसिएशन (IBJA) के प्रदेश अध्यक्ष श्री तिलोकचंद बरड़िया ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा देशवासियों से एक वर्ष तक नए सोने की खरीद को सीमित रखने एवं घरेलू स्वर्ण संपदा के अधिकतम उपयोग की अपील का स्वागत करते हुए इसे राष्ट्रहित में लिया गया दूरदर्शी एवं ऐतिहासिक कदम बताया है।
तिलोकचंद बरड़िया ने कहा कि प्रधानमंत्री की यह सोच केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत को आर्थिक रूप से और अधिक आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि देशहित सर्वोपरि है और ज्वेलरी उद्योग सदैव राष्ट्र निर्माण में अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रतिबद्ध रहा है।
श्री बरड़िया ने कहा कि भारत विश्व के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता देशों में शामिल है तथा प्रतिवर्ष भारी मात्रा में सोने का आयात किया जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता तथा बढ़ती महंगाई के दौर में प्रधानमंत्री की यह अपील देश की आर्थिक मजबूती और दीर्घकालिक प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक एवं प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि भारतीय परिवारों के पास लगभग 25,000 टन से अधिक सोना सुरक्षित रूप में मौजूद है, जो यदि पुनः आर्थिक गतिविधियों में शामिल किया जाए तो देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है। पुराने एवं निष्क्रिय सोने को आधुनिक डिज़ाइनों वाली नई ज्वेलरी में परिवर्तित करने की प्रक्रिया न केवल उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी होगी, बल्कि इससे सोने के आयात में कमी आकर देश की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
प्रदेश अध्यक्ष तिलोकचंद बरड़िया ने कहा कि IBJA “Gold Exchange & Reuse Movement” के माध्यम से पूरे प्रदेश एवं देशभर में जनजागरूकता अभियान चलाएगी, ताकि लोग घरेलू स्वर्ण संपदा के महत्व को समझें और आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़ें। उन्होंने कहा कि यह समय केवल व्यापार करने का नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति में सहभागी बनने का है।
उन्होंने जानकारी दी कि अनोपचंद तिलोकचंद ज्वैलर्स प्रा. लि. द्वारा ग्राहकों के लिए विशेष “गोल्ड एक्सचेंज प्रोग्राम” प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत उपभोक्ता अपने पुराने एवं अनुपयोगी सोने के आभूषणों को आधुनिक डिज़ाइनों वाली नई ज्वेलरी में आसानी से एक्सचेंज कर सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य ग्राहकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ घरों में रखी निष्क्रिय स्वर्ण संपदा के पुनः उपयोग को बढ़ावा देना है, ताकि सोने के आयात पर निर्भरता कम हो तथा आत्मनिर्भर भारत की भावना को और अधिक मजबूती मिल सके।
श्री बरड़िया ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक व्यावसायिक योजना नहीं, बल्कि “राष्ट्रहित में व्यापार” की भावना का उदाहरण है। इससे उपभोक्ताओं को आधुनिक ज्वेलरी का लाभ मिलेगा, व्यापार को नई दिशा मिलेगी तथा देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्राप्त होगी। उन्होंने प्रदेश के ज्वेलर्स, व्यापारिक संगठनों एवं आम नागरिकों से अपील की कि वे “पुराना सोना – नया भारत” अभियान से जुड़कर प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि देशवासी घरेलू स्वर्ण संपदा के पुनः उपयोग को अपनाते हैं, तो भारत आर्थिक रूप से और अधिक सक्षम, मजबूत एवं आत्मनिर्भर बनकर उभरेगा।
अंत में तिलोकचंद बरड़िया ने कहा कि भारतीय ज्वेलरी उद्योग सदैव राष्ट्रहित, रोजगार सृजन, स्वदेशी व्यापार एवं आर्थिक विकास के साथ खड़ा रहा है और भविष्य में भी देश की प्रगति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।



Journalist खबरीलाल














