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CG (खबरीलाल न्यूज़) : बिलासपुर; तालाब की खुदाई में मिला प्राचीन स्नान घाट..छतौना में उमड़ी लोगों की भीड़!:

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बिलासपुर। तखतपुर विकासखंड के ग्राम छतौना में तालाब की सफाई और गहरीकरण के दौरान प्राचीन स्नान घाट और कुंडनुमा संरचना मिलने से इलाके में उत्सुकता का माहौल है। जूनी तालाब में मिले इन अवशेषों को देखने आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

ग्रामीण इसे ऐतिहासिक धरोहर के साथ आस्था का केंद्र भी मान रहे हैं। जानकारी के अनुसार जूनी तालाब में खुदाई के दौरान जमीन के भीतर से एक विशाल पचरी यानी सीढ़ीदार स्नान घाट सामने आया। ग्रामीणों का दावा है कि घाट लगभग 40 फीट लंबा और 15 फीट चौड़ा है। इसके नीचे एक कुंडनुमा संरचना भी मिली है, जिससे इसके प्राचीन और धार्मिक महत्व की संभावना जताई जा रही है। खोज की खबर फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी।

कई ग्रामीण यहां पूजा-अर्चना कर इसे दैवीय संकेत मान रहे हैं। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पहले इस स्थान के बारे में ऐसी कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन खुदाई में निकली संरचनाओं ने सभी को हैरान कर दिया है। ग्रामीणों ने पुरातत्व विभाग से स्थल की जांच कर इसे संरक्षित घोषित करने की मांग की है। उनका मानना है कि वैज्ञानिक अध्ययन से क्षेत्र के इतिहास से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।


बिलासपुर। तखतपुर विकासखंड के ग्राम छतौना में तालाब की सफाई और गहरीकरण के दौरान प्राचीन स्नान घाट और कुंडनुमा संरचना मिलने से इलाके में उत्सुकता का माहौल है। जूनी तालाब में मिले इन अवशेषों को देखने आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

ग्रामीण इसे ऐतिहासिक धरोहर के साथ आस्था का केंद्र भी मान रहे हैं। जानकारी के अनुसार जूनी तालाब में खुदाई के दौरान जमीन के भीतर से एक विशाल पचरी यानी सीढ़ीदार स्नान घाट सामने आया। ग्रामीणों का दावा है कि घाट लगभग 40 फीट लंबा और 15 फीट चौड़ा है। इसके नीचे एक कुंडनुमा संरचना भी मिली है, जिससे इसके प्राचीन और धार्मिक महत्व की संभावना जताई जा रही है। खोज की खबर फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी।

कई ग्रामीण यहां पूजा-अर्चना कर इसे दैवीय संकेत मान रहे हैं। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पहले इस स्थान के बारे में ऐसी कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन खुदाई में निकली संरचनाओं ने सभी को हैरान कर दिया है। ग्रामीणों ने पुरातत्व विभाग से स्थल की जांच कर इसे संरक्षित घोषित करने की मांग की है। उनका मानना है कि वैज्ञानिक अध्ययन से क्षेत्र के इतिहास से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।


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