Breaking News

Bilaspur (खबरीलाल न्यूज़) :: मृत्युकालीन कथन लेखबद्ध करने की प्रक्रिया पर प्रशिक्षण:

post


khabrilalबिलासपुर। मृत्युकालीन कथन लेखबद्ध करने की मानक संचालन प्रक्रिया के प्रभावी पालन के लिए आज मंथन सभा कक्ष, बिलासपुर में कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी, लोक अभियोजक एवं चिकित्सा अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण एवं कार्यशाला आयोजित की गई। प्रशिक्षण में कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल एवं एसएसपी श्री रजनेश सिंह उपस्थित रहे।

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि अपराधी को सजा दिलाने में मृत्युकालीन कथन महत्वपूर्ण साक्ष्य होता है। उन्होंने कहा कि मृत्युकालीन बयान को उच्च स्तर के साक्ष्य की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन बयान दर्ज करते समय यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि संबंधित व्यक्ति किसी दबाव में तो बयान नहीं दे रहा है। बयान व्यक्ति के पूर्ण होशो-हवास में होना चाहिए, तभी उसकी वैधानिकता सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा कि दोषी तक पहुंचकर उसे सजा दिलाना और समाज को सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाना हम सभी का दायित्व है। दोषियों को सजा मिलने से अपराध पर प्रभावी अंकुश लगता है। पुलिस, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और अभियोजन के समन्वय से मजबूत साक्ष्य जुटाए जाएं, ताकि न्यायालय में प्रकरण प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर दोषियों को सजा दिलाई जा सके।

एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि फील्ड स्तर पर विवेचना के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को कार्यशाला में साझा करें। उन्होंने अधिकारियों से निर्देशानुसार विवेचना की प्रक्रिया अपनाने और साक्ष्यों का बेहतर संकलन सुनिश्चित करने कहा, ताकि आरोपियों को न्यायालय से सजा दिलाई जा सके। लोक अभियोजन अधिकारी सुश्री वीणा सिंह और सुश्री श्वेता कुर्रे ने प्रशिक्षण में मृत्युकालीन कथन लेखबद्ध किए जाने के संबंध में एसओपी की बारीकियों की विस्तार से जानकारी दी और उनकी जिज्ञासाओं का निराकरण किया। एडीएम शिवकुमार बनर्जी भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग के निर्देश तथा माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में मृत्युकालीन कथन लेखबद्ध किए जाने संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया के पालन के लिए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया।



khabrilalबिलासपुर। मृत्युकालीन कथन लेखबद्ध करने की मानक संचालन प्रक्रिया के प्रभावी पालन के लिए आज मंथन सभा कक्ष, बिलासपुर में कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी, लोक अभियोजक एवं चिकित्सा अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण एवं कार्यशाला आयोजित की गई। प्रशिक्षण में कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल एवं एसएसपी श्री रजनेश सिंह उपस्थित रहे।

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि अपराधी को सजा दिलाने में मृत्युकालीन कथन महत्वपूर्ण साक्ष्य होता है। उन्होंने कहा कि मृत्युकालीन बयान को उच्च स्तर के साक्ष्य की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन बयान दर्ज करते समय यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि संबंधित व्यक्ति किसी दबाव में तो बयान नहीं दे रहा है। बयान व्यक्ति के पूर्ण होशो-हवास में होना चाहिए, तभी उसकी वैधानिकता सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा कि दोषी तक पहुंचकर उसे सजा दिलाना और समाज को सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाना हम सभी का दायित्व है। दोषियों को सजा मिलने से अपराध पर प्रभावी अंकुश लगता है। पुलिस, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और अभियोजन के समन्वय से मजबूत साक्ष्य जुटाए जाएं, ताकि न्यायालय में प्रकरण प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर दोषियों को सजा दिलाई जा सके।

एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि फील्ड स्तर पर विवेचना के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को कार्यशाला में साझा करें। उन्होंने अधिकारियों से निर्देशानुसार विवेचना की प्रक्रिया अपनाने और साक्ष्यों का बेहतर संकलन सुनिश्चित करने कहा, ताकि आरोपियों को न्यायालय से सजा दिलाई जा सके। लोक अभियोजन अधिकारी सुश्री वीणा सिंह और सुश्री श्वेता कुर्रे ने प्रशिक्षण में मृत्युकालीन कथन लेखबद्ध किए जाने के संबंध में एसओपी की बारीकियों की विस्तार से जानकारी दी और उनकी जिज्ञासाओं का निराकरण किया। एडीएम शिवकुमार बनर्जी भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग के निर्देश तथा माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में मृत्युकालीन कथन लेखबद्ध किए जाने संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया के पालन के लिए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया।


...
...
...
...
...
...
Sidebar Banner
Sidebar Banner
Sidebar Banner
Sidebar Banner
Sidebar Banner