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Raipur (खबरीलाल न्यूज़) :: रूप चौदस एवं नरक चतुर्दशी का पर्व 7 और 8 नवंबर को, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र:

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khabrilalरायपुर। दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व में रूप चौदस अर्थात नरक चतुर्दशी का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे छोटी दीपावली, रूप चतुर्दशी और नरक निवारण चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, यमराज और माता काली की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही सूर्योदय से पूर्व अभ्यंग स्नान और यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है।

इस वर्ष चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर 2026 को प्रारंभ होकर 8 नवंबर तक रहेगी। इसलिए शनिवार, 7 नवंबर को यम दीपदान और रविवार, 8 नवंबर को रूप चौदस का अभ्यंग स्नान किया जाएगा। 

नरक चतुर्दशी का धार्मिक महत्व - पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक अत्याचारी असुर का वध करके लोगों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। इसी विजय की स्मृति में नरक चतुर्दशी का पर्व मनाने की मान्यता है।

रूप चौदस पर शरीर की शुद्धि, सौंदर्य और आरोग्य के लिए विशेष स्नान किया जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इस दिन तिल के तेल से मालिश और उबटन लगाकर स्नान करने से नकारात्मकता दूर होती है। वहीं यमराज के नाम से दीपदान करने को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और परिवार की मंगलकामना से जोड़ा जाता है।

नरक चतुर्दशी की सरल पूजन विधि -

अभ्यंग स्नान : रविवार, 8 नवंबर को प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर शरीर पर तिल का तेल लगाएं। इसके बाद बेसन, हल्दी और चंदन से तैयार उबटन लगाकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान श्रीकृष्ण और माता लक्ष्मी का स्मरण करें।

देवी-देवताओं की पूजा : घर के पूजा स्थल की सफाई करके भगवान श्रीकृष्ण, भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के चित्र या प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाएं। रोली, अक्षत, पुष्प, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति के लिए प्रार्थना करें।

यम दीपदान : शनिवार, 7 नवंबर की शाम प्रदोष काल में मिट्टी या आटे का चार बत्तियों वाला दीपक तैयार करें। उसमें सरसों का तेल डालकर यमराज का स्मरण करते हुए घर के बाहर सुरक्षित स्थान पर दक्षिण दिशा की ओर दीपदान करें। धार्मिक परंपरा में इसे विशेष पुण्यदायी माना गया है। 

पूजन के प्रमुख मंत्र ::

1. भगवान श्रीकृष्ण का मंत्र : ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।

2. यमराज का मंत्र : ॐ यमाय नमः।

3. यम दीपदान मंत्र : दत्तो दीपश्चतुर्दश्यां नरकप्रीतये मया।चतुर्वर्तिसमायुक्तः सर्वपापापनुत्तये॥

4. अभ्यंग स्नान मंत्र : सीतालोष्टसमायुक्त सकण्टकदलान्वित।हर पापमपामार्ग भ्राम्यमाणः पुनः पुनः॥

इस मंत्र का उच्चारण पारंपरिक रूप से अपामार्ग के पौधे को सिर के ऊपर घुमाते समय किया जाता है। 

रूप चौदस देता है स्वच्छता और सकारात्मकता का संदेश - रूप चौदस का पर्व केवल बाहरी सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन की शुद्धि, अच्छे विचारों और सकारात्मक जीवनशैली का भी संदेश देता है। इस दिन घर की साफ-सफाई, दीप प्रज्वलन, पूजा-अर्चना और जरूरतमंदों की सहायता करने की परंपरा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नरक चतुर्दशी पर विधिपूर्वक पूजा, स्नान और दीपदान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई तथा अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।



khabrilalरायपुर। दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व में रूप चौदस अर्थात नरक चतुर्दशी का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे छोटी दीपावली, रूप चतुर्दशी और नरक निवारण चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, यमराज और माता काली की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही सूर्योदय से पूर्व अभ्यंग स्नान और यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है।

इस वर्ष चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर 2026 को प्रारंभ होकर 8 नवंबर तक रहेगी। इसलिए शनिवार, 7 नवंबर को यम दीपदान और रविवार, 8 नवंबर को रूप चौदस का अभ्यंग स्नान किया जाएगा। 

नरक चतुर्दशी का धार्मिक महत्व - पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक अत्याचारी असुर का वध करके लोगों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। इसी विजय की स्मृति में नरक चतुर्दशी का पर्व मनाने की मान्यता है।

रूप चौदस पर शरीर की शुद्धि, सौंदर्य और आरोग्य के लिए विशेष स्नान किया जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इस दिन तिल के तेल से मालिश और उबटन लगाकर स्नान करने से नकारात्मकता दूर होती है। वहीं यमराज के नाम से दीपदान करने को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और परिवार की मंगलकामना से जोड़ा जाता है।

नरक चतुर्दशी की सरल पूजन विधि -

अभ्यंग स्नान : रविवार, 8 नवंबर को प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर शरीर पर तिल का तेल लगाएं। इसके बाद बेसन, हल्दी और चंदन से तैयार उबटन लगाकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान श्रीकृष्ण और माता लक्ष्मी का स्मरण करें।

देवी-देवताओं की पूजा : घर के पूजा स्थल की सफाई करके भगवान श्रीकृष्ण, भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के चित्र या प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाएं। रोली, अक्षत, पुष्प, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति के लिए प्रार्थना करें।

यम दीपदान : शनिवार, 7 नवंबर की शाम प्रदोष काल में मिट्टी या आटे का चार बत्तियों वाला दीपक तैयार करें। उसमें सरसों का तेल डालकर यमराज का स्मरण करते हुए घर के बाहर सुरक्षित स्थान पर दक्षिण दिशा की ओर दीपदान करें। धार्मिक परंपरा में इसे विशेष पुण्यदायी माना गया है। 

पूजन के प्रमुख मंत्र ::

1. भगवान श्रीकृष्ण का मंत्र : ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।

2. यमराज का मंत्र : ॐ यमाय नमः।

3. यम दीपदान मंत्र : दत्तो दीपश्चतुर्दश्यां नरकप्रीतये मया।चतुर्वर्तिसमायुक्तः सर्वपापापनुत्तये॥

4. अभ्यंग स्नान मंत्र : सीतालोष्टसमायुक्त सकण्टकदलान्वित।हर पापमपामार्ग भ्राम्यमाणः पुनः पुनः॥

इस मंत्र का उच्चारण पारंपरिक रूप से अपामार्ग के पौधे को सिर के ऊपर घुमाते समय किया जाता है। 

रूप चौदस देता है स्वच्छता और सकारात्मकता का संदेश - रूप चौदस का पर्व केवल बाहरी सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन की शुद्धि, अच्छे विचारों और सकारात्मक जीवनशैली का भी संदेश देता है। इस दिन घर की साफ-सफाई, दीप प्रज्वलन, पूजा-अर्चना और जरूरतमंदों की सहायता करने की परंपरा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नरक चतुर्दशी पर विधिपूर्वक पूजा, स्नान और दीपदान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई तथा अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।


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