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धान चावल का व्यापार बनाम एमएसपी:

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संजय दुबे
एक
कानून बनता है कि किसान अपना उपजाया हुआ अन्न देश
के किसी भी कोने में बेच सकता है  दूसरी तरफ देश के पंजाब,छत्तीसगढ़ की
सीमा सील कर दी गयी है कि उनके राज्य में दीगर राज्यो का किसान सही मूल्य? 
में  अपना उपज नही बेच सकता है।ये सही मूल्य न्यूनतम समर्थन (एमएसपी)मूल्य
नही है बल्कि   वह मूल्य है जो  किसान को उसके राज्य में  नही मिल रहा
है।किसान को अपने उपजाए अन्न का अपने राज्य में  नही मिल रहा है बल्कि
दूसरे राज्य में बेहतर मूल्य मिल रहा है।झारखंड में धान का  मूल्य 1000
रुपये है,उत्तरप्रदेश में 1050 रु  प्रति क्विन्टल है। दूसरे राज्य में
किसान को 1350 रु मिल रहा है। वो  दीगर राज्य के व्यापारी को ज्यादा मूल्य
में बेचने के लिए स्वतंत्र है। फिर उन पर रोक लगाकर अघोषित रूप से देश के
राज्य सरकारों द्वारा शोषण को ही तो प्रोत्साहित किया जा रहा है।


छत्तीसगढ़
में सरकार 2500 रुपये में  किसानों का उनकी उपज का 15 क्विन्टल  धान खरीद
रही है यदि उसकी उपज 20 क्विन्टल भी है तो 05 क्विन्टल धान को सरकार एमएसपी
पर नही खरीदती,इस धान को किसान किस मोल बेचेगा ये किसी के  लिए विषय नही
है।
मोदी जी का नया कृषि कानून किसानों को इस बात की कोई गारंटी नही
देता है कि किसान को धान का बिक्री मूल्य उसके राज्य में 1860 रुपये ही
मिलेगा, ये 1860 रु मोदी सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी है। केवल न्यूनतम
समर्थन मूल्य घोषित कर देने से किसान को ये दाम नही मिल जाता है। इस बात को
समझने के लिए उत्तरप्रदेश,झारखंड,उड़ीसा चले जाइये। किसानों का धान
एमएसीपी से आधे मूल्य पर बिक रहा है। उनको जो मूल्य अपने राज्य में मिल रहा
है उससे ज्यादा मूल्य दूसरे राज्य के व्यापारी देने के लिए तैयार है लेकिन
पंजाब, छतीसगढ़  की सरकारों ने दूसरे राज्य के धान को ब्राउन शुगर मान
लिया है। आजकल एडवांस टेक्नोलॉजी है। सरकार के पास जमीन का हिसाब
है,उत्पादन का हिसाब है,खाते में पैसा ट्रांसफर होगा। राज्य को 20 लाख के
लगभग किसानों से 15 क्विन्टल प्रति एकड़ धान खरीदना ही है।दूसरे राज्य का
अपंजीकृत किसान धान ला ही नही सकता है। कोई भी दीगर राज्य का व्यापारी धान
खरीदी केंद्र में  घुस नही सकता है। इतने सुव्यवस्थित व्यवस्था छत्तीसगढ़
राज्य में है।छतीसगढ़ की सरकार को चाहिए कि वे अपने मिलर्स को दीगर राज्यो
से धान खरीदने के लिए नियम बनाए। उन्हें  देश के दूसरे राज्यों के
व्यापारियों से धान  खरीदने,चाँवल व्यापार  निर्यात को बढ़ावा देना चाहिए।
इससे राज्य के राइस मिलर्स को बड़े व्यापार का अवसर मिलेगा।


इस मामले
में पहले से नियम है कि देश का कोई भी किसान अपने उत्पादन या व्यापारी अपने
खरीदे वस्तु को कही भी बेचने के लिए स्वतंत्र है। हम दोनों के बेहतर जीवन
जीने के अधिकार  से वंचित कर रहे है। व्यापारको व्यवस्थित करना प्रशासन की
जिम्मेदारी है। प्रदेश की चाँवल मिलों से राज्य के लाखों लोगों को रोजगार
मिलता है। राज्य के मुख्यमंत्री जी सहित खाद्य मंत्री जी को छत्तीसगढ़ के
चाँवल व्यापार को ध्यान में रख व्यापारियों को  दीगर राज्यो से धान खरीदने
के लिए नियम बनाने की आवश्यकता है।



संजय दुबे
एक
कानून बनता है कि किसान अपना उपजाया हुआ अन्न देश
के किसी भी कोने में बेच सकता है  दूसरी तरफ देश के पंजाब,छत्तीसगढ़ की
सीमा सील कर दी गयी है कि उनके राज्य में दीगर राज्यो का किसान सही मूल्य? 
में  अपना उपज नही बेच सकता है।ये सही मूल्य न्यूनतम समर्थन (एमएसपी)मूल्य
नही है बल्कि   वह मूल्य है जो  किसान को उसके राज्य में  नही मिल रहा
है।किसान को अपने उपजाए अन्न का अपने राज्य में  नही मिल रहा है बल्कि
दूसरे राज्य में बेहतर मूल्य मिल रहा है।झारखंड में धान का  मूल्य 1000
रुपये है,उत्तरप्रदेश में 1050 रु  प्रति क्विन्टल है। दूसरे राज्य में
किसान को 1350 रु मिल रहा है। वो  दीगर राज्य के व्यापारी को ज्यादा मूल्य
में बेचने के लिए स्वतंत्र है। फिर उन पर रोक लगाकर अघोषित रूप से देश के
राज्य सरकारों द्वारा शोषण को ही तो प्रोत्साहित किया जा रहा है।


छत्तीसगढ़
में सरकार 2500 रुपये में  किसानों का उनकी उपज का 15 क्विन्टल  धान खरीद
रही है यदि उसकी उपज 20 क्विन्टल भी है तो 05 क्विन्टल धान को सरकार एमएसपी
पर नही खरीदती,इस धान को किसान किस मोल बेचेगा ये किसी के  लिए विषय नही
है।
मोदी जी का नया कृषि कानून किसानों को इस बात की कोई गारंटी नही
देता है कि किसान को धान का बिक्री मूल्य उसके राज्य में 1860 रुपये ही
मिलेगा, ये 1860 रु मोदी सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी है। केवल न्यूनतम
समर्थन मूल्य घोषित कर देने से किसान को ये दाम नही मिल जाता है। इस बात को
समझने के लिए उत्तरप्रदेश,झारखंड,उड़ीसा चले जाइये। किसानों का धान
एमएसीपी से आधे मूल्य पर बिक रहा है। उनको जो मूल्य अपने राज्य में मिल रहा
है उससे ज्यादा मूल्य दूसरे राज्य के व्यापारी देने के लिए तैयार है लेकिन
पंजाब, छतीसगढ़  की सरकारों ने दूसरे राज्य के धान को ब्राउन शुगर मान
लिया है। आजकल एडवांस टेक्नोलॉजी है। सरकार के पास जमीन का हिसाब
है,उत्पादन का हिसाब है,खाते में पैसा ट्रांसफर होगा। राज्य को 20 लाख के
लगभग किसानों से 15 क्विन्टल प्रति एकड़ धान खरीदना ही है।दूसरे राज्य का
अपंजीकृत किसान धान ला ही नही सकता है। कोई भी दीगर राज्य का व्यापारी धान
खरीदी केंद्र में  घुस नही सकता है। इतने सुव्यवस्थित व्यवस्था छत्तीसगढ़
राज्य में है।छतीसगढ़ की सरकार को चाहिए कि वे अपने मिलर्स को दीगर राज्यो
से धान खरीदने के लिए नियम बनाए। उन्हें  देश के दूसरे राज्यों के
व्यापारियों से धान  खरीदने,चाँवल व्यापार  निर्यात को बढ़ावा देना चाहिए।
इससे राज्य के राइस मिलर्स को बड़े व्यापार का अवसर मिलेगा।


इस मामले
में पहले से नियम है कि देश का कोई भी किसान अपने उत्पादन या व्यापारी अपने
खरीदे वस्तु को कही भी बेचने के लिए स्वतंत्र है। हम दोनों के बेहतर जीवन
जीने के अधिकार  से वंचित कर रहे है। व्यापारको व्यवस्थित करना प्रशासन की
जिम्मेदारी है। प्रदेश की चाँवल मिलों से राज्य के लाखों लोगों को रोजगार
मिलता है। राज्य के मुख्यमंत्री जी सहित खाद्य मंत्री जी को छत्तीसगढ़ के
चाँवल व्यापार को ध्यान में रख व्यापारियों को  दीगर राज्यो से धान खरीदने
के लिए नियम बनाने की आवश्यकता है।



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