रायपुर । गरीब लोगों को बेहतर
स्वास्थ्य सेवाएं मिल सके। इसके लिए छत्तीसगढ़ माटी पुत्र दाऊ कल्याण सिंह
अग्रवाल ने देश की आजादी के पूर्व ही आज के शासकीय डीकेएस सुपरस्पेशियलिटी
अस्पताल और एम्स की नींव रख दी थी। दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल ने सन् 1944
में एक लाख 25 हजार रुपये की लागत से सिल्वर जुबली अस्पताल का निर्माण
कराया था, जिससे गरीब मरीजों का इलाज निश्शुल्क हो सके। अस्पताल का विस्तार
कर वर्तमान में यह डीकेएस सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल बन चुका है। जो प्रदेश
का एकमात्र सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल हैं। जहां सैकड़ों गंभीर रोग से पीड़ित
मरीजों का शासकीय योजना के तहत निश्शुल्क इलाज कर उन्हें संजीवनी देने का
काम कर रहा।
समाज के पदाधिकारी अनुराग अग्रवाल ने बताया कि एम्स जिस स्थान पर संचालित
है। करीब 78 वर्ष पूर्व 65 एकड़ जमीन दान कर इस स्थान पर दाऊ कल्याण सिंह
अग्रवाल ने अपने पिता दाऊ बसेसरनाथ बाह्यरोग आरोग्य धाम, टीबी अस्पताल
बनवाया। इसके संचालन के लिए अस्पताल के नाम से ग्राम अर्जुनी में 265 एकड़
जमीन भी दान में दी। इस जमीन पर खेती के आय से अस्पताल का संचालन किया जाता
था। इसी अस्पताल को बाद में बदलकर एम्स की नींव रखी गई।
ने बताया कि प्रदेश को कृषि के क्षेत्र में आगे करने और शिक्षा के विस्तार
के लिए दाउ कल्याण सिंह अग्रवाल ने कृषि महाविद्यालय बनाने के लिए 1729
एकड़ जमीन और उस समय एक लाख 12 हजार रुपये नकद दान की। जो आज इंदिरागांधी
कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के नाम से ना सिर्फ देश में ख्याति पा रहा है।
स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था हर गरीब तक निश्शुल्क पहुंचे। इसके लिए दाऊ
कल्याण सिंह अग्रवाल ने जनकल्याण के उद्देश्य से अपनी संपत्ति दान कर दी।
उनकी दूर दृष्टि का नतीजा है कि आज राज्य के सबसे बड़े दो अस्पताल डीकेएस
और एम्स अस्पताल गरीब मरीजों का सहारा बन रहा है। लेकिन विडंबना है कि उनके
योगदान को शासन के साथ अस्पताल प्रबंधन ने भी भुला दिया है। मैं शासन से
अपील करता हूं, शिक्षा पाठ्यक्रम में उनके योगदान को शामिल किया जाए। -अनुराग अग्रवाल, समाजसेवी
रायपुर । गरीब लोगों को बेहतर
स्वास्थ्य सेवाएं मिल सके। इसके लिए छत्तीसगढ़ माटी पुत्र दाऊ कल्याण सिंह
अग्रवाल ने देश की आजादी के पूर्व ही आज के शासकीय डीकेएस सुपरस्पेशियलिटी
अस्पताल और एम्स की नींव रख दी थी। दाऊ कल्याण सिंह अग्रवाल ने सन् 1944
में एक लाख 25 हजार रुपये की लागत से सिल्वर जुबली अस्पताल का निर्माण
कराया था, जिससे गरीब मरीजों का इलाज निश्शुल्क हो सके। अस्पताल का विस्तार
कर वर्तमान में यह डीकेएस सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल बन चुका है। जो प्रदेश
का एकमात्र सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल हैं। जहां सैकड़ों गंभीर रोग से पीड़ित
मरीजों का शासकीय योजना के तहत निश्शुल्क इलाज कर उन्हें संजीवनी देने का
काम कर रहा।
समाज के पदाधिकारी अनुराग अग्रवाल ने बताया कि एम्स जिस स्थान पर संचालित
है। करीब 78 वर्ष पूर्व 65 एकड़ जमीन दान कर इस स्थान पर दाऊ कल्याण सिंह
अग्रवाल ने अपने पिता दाऊ बसेसरनाथ बाह्यरोग आरोग्य धाम, टीबी अस्पताल
बनवाया। इसके संचालन के लिए अस्पताल के नाम से ग्राम अर्जुनी में 265 एकड़
जमीन भी दान में दी। इस जमीन पर खेती के आय से अस्पताल का संचालन किया जाता
था। इसी अस्पताल को बाद में बदलकर एम्स की नींव रखी गई।
ने बताया कि प्रदेश को कृषि के क्षेत्र में आगे करने और शिक्षा के विस्तार
के लिए दाउ कल्याण सिंह अग्रवाल ने कृषि महाविद्यालय बनाने के लिए 1729
एकड़ जमीन और उस समय एक लाख 12 हजार रुपये नकद दान की। जो आज इंदिरागांधी
कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के नाम से ना सिर्फ देश में ख्याति पा रहा है।
स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था हर गरीब तक निश्शुल्क पहुंचे। इसके लिए दाऊ
कल्याण सिंह अग्रवाल ने जनकल्याण के उद्देश्य से अपनी संपत्ति दान कर दी।
उनकी दूर दृष्टि का नतीजा है कि आज राज्य के सबसे बड़े दो अस्पताल डीकेएस
और एम्स अस्पताल गरीब मरीजों का सहारा बन रहा है। लेकिन विडंबना है कि उनके
योगदान को शासन के साथ अस्पताल प्रबंधन ने भी भुला दिया है। मैं शासन से
अपील करता हूं, शिक्षा पाठ्यक्रम में उनके योगदान को शामिल किया जाए। -अनुराग अग्रवाल, समाजसेवी


Journalist खबरीलाल












