रायपुर । छत्तीसगढ़ प्रदेश में अगले पांच
सालों में 15 लाख रोजगार के अवसर सृजन करने का लक्ष्य सरकार ने रखा है। इस
लक्ष्य को हासिल करने के लिए पिछले सप्ताह ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की
अध्यक्षता में रोजगार मिशन का गठन किया गया है। इसके साथ ही मिशन हरकत में आ
गया है और स्थानीय स्तर पर रोजगार की तलाश शुरू कर दी गई है। इसके लिए
प्रमुख सचिव व मिशन के सीईओ डा. आलोक शुक्ला ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखा
है। इसमें कलेक्टरों को अगले एक साल की कार्ययोजना तैयार करके भेजने के
निर्देश दिए हैं।
कलेक्टरों ने बीते तीन वर्षों में निर्मित रोजगार के अवसरों की भी जानकारी
मांगी गई है। सीईओ डा. शुक्ला ने कहा है कि तीन वर्षों में कोरोना महामारी
के बावजूद बड़ी संख्या में रोजगार निर्मित हुए हैं। इसमें छत्तीसगढ़ हर्बल्स,
गोधन न्याय योजना, स्व-सहायता समूहों के माध्यम से जिलों में किए गए
कार्यों और गोठानों के माध्यम से आजीविका के अवसर का निर्माण बहुत सफल रहा
है। बता दें कि मुख्यमंत्री बघेल ने अपनी रेडियो वार्ता लोकवाणी में तीन
वर्षों में राज्यों में सरकारी और निजी क्षेत्र में करीब पांच लोगों को
रोजगार देने की बात कही थी।
डा. शुक्ला के अनुसार रोजगार की परिभाषा क्या होगी इस संबंध में अभी विचार
चल रहा है। फिलहाल रोजगार का तात्पर्य ऐसे कामों से लिया जा सकता है,
जिनसे किसी परिवार की औसत वार्षिक आमदनी में कम से कम 32 हजार रुपये की
वृद्धि हुई हो। यह वृद्धि मजदूरी या स्वरोजगार किसी भी प्रकार से हो सकता
है। यह बढ़ोतरी उत्पादन कर माल को बाजार में बेचकर या सेवा क्षेत्र में सेवा
प्रदान करके भी हो सकती है।
रायपुर । छत्तीसगढ़ प्रदेश में अगले पांच
सालों में 15 लाख रोजगार के अवसर सृजन करने का लक्ष्य सरकार ने रखा है। इस
लक्ष्य को हासिल करने के लिए पिछले सप्ताह ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की
अध्यक्षता में रोजगार मिशन का गठन किया गया है। इसके साथ ही मिशन हरकत में आ
गया है और स्थानीय स्तर पर रोजगार की तलाश शुरू कर दी गई है। इसके लिए
प्रमुख सचिव व मिशन के सीईओ डा. आलोक शुक्ला ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखा
है। इसमें कलेक्टरों को अगले एक साल की कार्ययोजना तैयार करके भेजने के
निर्देश दिए हैं।
कलेक्टरों ने बीते तीन वर्षों में निर्मित रोजगार के अवसरों की भी जानकारी
मांगी गई है। सीईओ डा. शुक्ला ने कहा है कि तीन वर्षों में कोरोना महामारी
के बावजूद बड़ी संख्या में रोजगार निर्मित हुए हैं। इसमें छत्तीसगढ़ हर्बल्स,
गोधन न्याय योजना, स्व-सहायता समूहों के माध्यम से जिलों में किए गए
कार्यों और गोठानों के माध्यम से आजीविका के अवसर का निर्माण बहुत सफल रहा
है। बता दें कि मुख्यमंत्री बघेल ने अपनी रेडियो वार्ता लोकवाणी में तीन
वर्षों में राज्यों में सरकारी और निजी क्षेत्र में करीब पांच लोगों को
रोजगार देने की बात कही थी।
डा. शुक्ला के अनुसार रोजगार की परिभाषा क्या होगी इस संबंध में अभी विचार
चल रहा है। फिलहाल रोजगार का तात्पर्य ऐसे कामों से लिया जा सकता है,
जिनसे किसी परिवार की औसत वार्षिक आमदनी में कम से कम 32 हजार रुपये की
वृद्धि हुई हो। यह वृद्धि मजदूरी या स्वरोजगार किसी भी प्रकार से हो सकता
है। यह बढ़ोतरी उत्पादन कर माल को बाजार में बेचकर या सेवा क्षेत्र में सेवा
प्रदान करके भी हो सकती है।


Journalist खबरीलाल












