नयी दिल्ली/पणजी. केंद्र
सरकार ने महात्मा गांधी के प्रिय रहे भजनों में से एक ‘ अबाइड विथ मी’ को
इस साल से ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह से हटाने का फैसला किया है क्योंकि उसका
मानना है कि देश की आजादी के 75वें साल आलोक में मनाए जा रहे ‘‘आजादी का
अमृत महोत्सव’ में भारतीय धुन अधिक अनुकूल हैं. वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ
नेता पी चिदंबरम ने सरकार के इस कदम पर आपत्ति जताई है और कहा कि यह
विचारशील और संवेदनशील लोगों को आहत करता है.
उल्लेखनीय
हैकि ‘अबाइड विथ मी’ की रचना स्कॉटिश एंजलिकन कवि और भजन ज्ञानी हेनरी
फ्रांसिस लाइट ने सन 1847 में की थी और वर्ष 1950 से ही यह ‘बीटिंग
रिट्रीट’ समारोह का हिस्सा है. भारतीय सेना ने शनिवार को घोषणा की कि इस
साल से समारोह में इसे शामिल नहीं किया जाएगा.
सूत्रों
ने बताया कि केंद्र चाहता था कि अधिकतर भारतीय धुनों को समारोह में शामिल
किया जाए, जिसके फलस्वरूप फैसला किया गया कि 29 जनवरी को आयोजित होने वाले
समारोह में केवल भारतीय मूल के धुनों को ही बजाया जाएगा. उन्होंने बताया कि
केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में भी ‘अबाइड विथ मी’ को समारोह से हटाने का
फैसला किया था लेकिन बाद में विवाद होने पर इसे यथावत रहने दिया गया. उन्होंने
बताया कि इस वर्ष के समारोह के लिए ‘ अबाइड विथ मी’ भजन के स्थान पर
लोकप्रिय देशभक्ति गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ को लिया गया है जिसकी रचना
कवि प्रदीप ने वर्ष-1962 के भारत-चीन युद्ध में भारतीय जवानों द्वारा दी गई
शहादत को याद करने के लिए की थी.
सूत्रों
ने रेखांकित किया कि ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ भारतीय धुन है और उन सभी के
प्रति सम्मान प्रकट करती है जिन्होंने देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए
अपने जीवन का बलिदान किया. इस साल से ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह से इस भजन को
हटाने का सरकार का फैसला इंडिया गेट पर जल रही अमर जवार जवान ज्योति को
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की ज्योति से मिलाने के फैसले के बाद आया है.
ज्योति को मिलाने का संक्षित समारोह शुक्रवार को आयोजित किया गया था.
कुछ
सैन्य अधिकारियों ने ज्योति को मिलाने के फैसले का बचाव किया था वहीं,
कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया था कि भाजपा नीति केंद्र
सरकार ‘‘इतिहास को मिटा’’रही है.गौरतलब है कि सेना द्वारा शनिवार को इस
साल विजय चौक पर होने वाले ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह के लिए जारी ब्रॉशर में
26 धुनों की सूची दी गई है जिन्हें बजाया जाएगा. इनमें ‘हे कांछा’, ‘चन्ना
बिलौरी’, ‘जय जन्म भूमि’, ‘ नृत्य सरिता’, ‘ विजय जोश’, ‘ केसरिया बन्ना’,
‘वीर सियाचीन’ आदि शामिल हैं.
सरकार
के इस फैसले पर टिप्पणी करते हुए कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने रविवार को
पणजी में पत्रकारों से कहा, ‘‘ अबाइड विथ मी’ पुराना भजन है जिसकी रचना
1847 में की गई थी. यह महात्मा गांधी का प्रिय भजन है. वर्ष 1950 में जबसे
हम गणतंत्र हुये हैं गणंतत्र दिवस समारोह का आखिरी कार्यक्रम बीटिंग
रिट्रीट का समापन इसी धुन से होता रहा है.’’
उन्होंने
कहा, ‘‘ यह बहुत दुखी करने वाला है कि ईसाई भजन जो अब ईसाई भजन नहीं रह
गया है बल्कि धर्मनिरपेक्ष भजन है, गणतंत्र दिवस परेड से हटाया जा रहा है.
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह दुखी करने वाला है कि सरकार ने भारत की
आजादी के 75वें साल में भजन को हटाने का फैसला किया है.
कांग्रेस
नेता ने कहा, ‘‘इस फैसले ने विचारशील और संवेदनशील लोगों को बहुत आहत किया
है. मुझे उम्मीद है कि गणतंत्र दिवस पर बेहतर समझ होगी और इसे बहाल किया
जाएगा जिसपर हमारी टुकड़ी मार्च करेगी.’’ उल्लेखनीय है कि बीटिंग रिट्रीट के
साथ 24 जनवरी से शुरू करीब एक सप्ताह के गणतंत्र दिवस समारोह का समापन
होता है.हालांकि, सरकार ने इस साल से 23 जनवरी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की
जयंती से ही गणतंत्र दिवस समारोह शुरू करने का फैसला किया है.
नयी दिल्ली/पणजी. केंद्र
सरकार ने महात्मा गांधी के प्रिय रहे भजनों में से एक ‘ अबाइड विथ मी’ को
इस साल से ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह से हटाने का फैसला किया है क्योंकि उसका
मानना है कि देश की आजादी के 75वें साल आलोक में मनाए जा रहे ‘‘आजादी का
अमृत महोत्सव’ में भारतीय धुन अधिक अनुकूल हैं. वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ
नेता पी चिदंबरम ने सरकार के इस कदम पर आपत्ति जताई है और कहा कि यह
विचारशील और संवेदनशील लोगों को आहत करता है.
उल्लेखनीय
हैकि ‘अबाइड विथ मी’ की रचना स्कॉटिश एंजलिकन कवि और भजन ज्ञानी हेनरी
फ्रांसिस लाइट ने सन 1847 में की थी और वर्ष 1950 से ही यह ‘बीटिंग
रिट्रीट’ समारोह का हिस्सा है. भारतीय सेना ने शनिवार को घोषणा की कि इस
साल से समारोह में इसे शामिल नहीं किया जाएगा.
सूत्रों
ने बताया कि केंद्र चाहता था कि अधिकतर भारतीय धुनों को समारोह में शामिल
किया जाए, जिसके फलस्वरूप फैसला किया गया कि 29 जनवरी को आयोजित होने वाले
समारोह में केवल भारतीय मूल के धुनों को ही बजाया जाएगा. उन्होंने बताया कि
केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में भी ‘अबाइड विथ मी’ को समारोह से हटाने का
फैसला किया था लेकिन बाद में विवाद होने पर इसे यथावत रहने दिया गया. उन्होंने
बताया कि इस वर्ष के समारोह के लिए ‘ अबाइड विथ मी’ भजन के स्थान पर
लोकप्रिय देशभक्ति गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ को लिया गया है जिसकी रचना
कवि प्रदीप ने वर्ष-1962 के भारत-चीन युद्ध में भारतीय जवानों द्वारा दी गई
शहादत को याद करने के लिए की थी.
सूत्रों
ने रेखांकित किया कि ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ भारतीय धुन है और उन सभी के
प्रति सम्मान प्रकट करती है जिन्होंने देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए
अपने जीवन का बलिदान किया. इस साल से ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह से इस भजन को
हटाने का सरकार का फैसला इंडिया गेट पर जल रही अमर जवार जवान ज्योति को
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की ज्योति से मिलाने के फैसले के बाद आया है.
ज्योति को मिलाने का संक्षित समारोह शुक्रवार को आयोजित किया गया था.
कुछ
सैन्य अधिकारियों ने ज्योति को मिलाने के फैसले का बचाव किया था वहीं,
कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया था कि भाजपा नीति केंद्र
सरकार ‘‘इतिहास को मिटा’’रही है.गौरतलब है कि सेना द्वारा शनिवार को इस
साल विजय चौक पर होने वाले ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह के लिए जारी ब्रॉशर में
26 धुनों की सूची दी गई है जिन्हें बजाया जाएगा. इनमें ‘हे कांछा’, ‘चन्ना
बिलौरी’, ‘जय जन्म भूमि’, ‘ नृत्य सरिता’, ‘ विजय जोश’, ‘ केसरिया बन्ना’,
‘वीर सियाचीन’ आदि शामिल हैं.
सरकार
के इस फैसले पर टिप्पणी करते हुए कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने रविवार को
पणजी में पत्रकारों से कहा, ‘‘ अबाइड विथ मी’ पुराना भजन है जिसकी रचना
1847 में की गई थी. यह महात्मा गांधी का प्रिय भजन है. वर्ष 1950 में जबसे
हम गणतंत्र हुये हैं गणंतत्र दिवस समारोह का आखिरी कार्यक्रम बीटिंग
रिट्रीट का समापन इसी धुन से होता रहा है.’’
उन्होंने
कहा, ‘‘ यह बहुत दुखी करने वाला है कि ईसाई भजन जो अब ईसाई भजन नहीं रह
गया है बल्कि धर्मनिरपेक्ष भजन है, गणतंत्र दिवस परेड से हटाया जा रहा है.
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह दुखी करने वाला है कि सरकार ने भारत की
आजादी के 75वें साल में भजन को हटाने का फैसला किया है.
कांग्रेस
नेता ने कहा, ‘‘इस फैसले ने विचारशील और संवेदनशील लोगों को बहुत आहत किया
है. मुझे उम्मीद है कि गणतंत्र दिवस पर बेहतर समझ होगी और इसे बहाल किया
जाएगा जिसपर हमारी टुकड़ी मार्च करेगी.’’ उल्लेखनीय है कि बीटिंग रिट्रीट के
साथ 24 जनवरी से शुरू करीब एक सप्ताह के गणतंत्र दिवस समारोह का समापन
होता है.हालांकि, सरकार ने इस साल से 23 जनवरी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की
जयंती से ही गणतंत्र दिवस समारोह शुरू करने का फैसला किया है.


Journalist खबरीलाल












