रायपुर । प्रदेश में राष्ट्रीय
स्वास्थ्य मिशन द्वारा संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) विभागीय
उदासीनता की भेंट चढ़ रही है। स्थिति यह है कि सरकार द्वारा करोड़ों रुपये
खर्चने के बाद भी केंद्रों तक कुपोषित बच्चों के नहीं पहुंच पाने से जिला
अस्पतालों के केंद्र खाली पड़े रहते हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, वर्ष 2021 में सभी जिलों के एनआरसी में
करीब 7000 कुपोषित बच्चे पहुंचे। इसमें सर्वाधिक कुपोषित 860 बच्चे बस्तर
के केंद्र में जबकि रायपुर के जिला अस्पताल, कालीबाड़ी के एनआरसी में 78
कुपोषित बच्चे ही पहुंचे। इनमें से लगभग 50 फीसद बच्चे ही स्वस्थ हुए।
जानकारी के मुताबिक, 10 बिस्तरों वाला यह सेंटर अक्सर खाली रहते हें।
चिकित्सा स्टाफ भी गायब मिलते हैं। कुछ केंद्रों को छोड़ दें तो जंग लगी
व्यवस्था के चलते राज्य के सभी एनआरसी की स्थिति लगभग ऐसी ही है। हालांकि
संख्या के कम होने का एक कारण कोरोना को भी गिनाया जा रहा है।
क्या है पोषण पुनर्वास केंद्र
राष्ट्रीय
स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा कुपोषित बच्चों की स्थिति
को सुधारने जिला अस्पतालों में पोषण पुनर्वास केंद्र स्थापित किए गए हैं।
इसमें जन्म से पांच वर्ष तक के उन बच्चों को भर्ती किया जाता है जो
कुपोषित व अतिकुपोषित की श्रेणी में आते हैं। विशेष चिकित्सा सुविधा,
खानपान के माध्यम से 15 दिन तक इन्हें भर्ती कर उपचार दिया जाता है।
निश्शुल्क जांच, इलाज व खान-पान के साथ बच्चों को सुपोषित करने माताओं को
भी प्रशिक्षण दिया जाता है। डिस्चार्ज के दौरान प्रत्येक बच्चों को 2250
रुपये की सहायता दी जाती है।
जहां बच्चे कम आ रहे है वहां करेंगे समीक्षा
एनआरसी
में शतप्रतिशत कुपोषित बच्चों को लाभ मिलें, इसके लिए हम पूरी कोशिश कर
रहे हैं। कुपोषित बच्चों को केंद्रों तक लाने की एक बड़ी जिम्मेदारी महिला
एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का है। जहां बच्चे
कम आ रहे हैं और व्यवस्थाएं खराब है। वहां की समीक्षा करेंगे।
डा. वीआर भगत, राज्य नोडल अधिकारी, एनआरसी प्रोग्राम
रायपुर । प्रदेश में राष्ट्रीय
स्वास्थ्य मिशन द्वारा संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) विभागीय
उदासीनता की भेंट चढ़ रही है। स्थिति यह है कि सरकार द्वारा करोड़ों रुपये
खर्चने के बाद भी केंद्रों तक कुपोषित बच्चों के नहीं पहुंच पाने से जिला
अस्पतालों के केंद्र खाली पड़े रहते हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, वर्ष 2021 में सभी जिलों के एनआरसी में
करीब 7000 कुपोषित बच्चे पहुंचे। इसमें सर्वाधिक कुपोषित 860 बच्चे बस्तर
के केंद्र में जबकि रायपुर के जिला अस्पताल, कालीबाड़ी के एनआरसी में 78
कुपोषित बच्चे ही पहुंचे। इनमें से लगभग 50 फीसद बच्चे ही स्वस्थ हुए।
जानकारी के मुताबिक, 10 बिस्तरों वाला यह सेंटर अक्सर खाली रहते हें।
चिकित्सा स्टाफ भी गायब मिलते हैं। कुछ केंद्रों को छोड़ दें तो जंग लगी
व्यवस्था के चलते राज्य के सभी एनआरसी की स्थिति लगभग ऐसी ही है। हालांकि
संख्या के कम होने का एक कारण कोरोना को भी गिनाया जा रहा है।
क्या है पोषण पुनर्वास केंद्र
राष्ट्रीय
स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा कुपोषित बच्चों की स्थिति
को सुधारने जिला अस्पतालों में पोषण पुनर्वास केंद्र स्थापित किए गए हैं।
इसमें जन्म से पांच वर्ष तक के उन बच्चों को भर्ती किया जाता है जो
कुपोषित व अतिकुपोषित की श्रेणी में आते हैं। विशेष चिकित्सा सुविधा,
खानपान के माध्यम से 15 दिन तक इन्हें भर्ती कर उपचार दिया जाता है।
निश्शुल्क जांच, इलाज व खान-पान के साथ बच्चों को सुपोषित करने माताओं को
भी प्रशिक्षण दिया जाता है। डिस्चार्ज के दौरान प्रत्येक बच्चों को 2250
रुपये की सहायता दी जाती है।
जहां बच्चे कम आ रहे है वहां करेंगे समीक्षा
एनआरसी
में शतप्रतिशत कुपोषित बच्चों को लाभ मिलें, इसके लिए हम पूरी कोशिश कर
रहे हैं। कुपोषित बच्चों को केंद्रों तक लाने की एक बड़ी जिम्मेदारी महिला
एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का है। जहां बच्चे
कम आ रहे हैं और व्यवस्थाएं खराब है। वहां की समीक्षा करेंगे।
डा. वीआर भगत, राज्य नोडल अधिकारी, एनआरसी प्रोग्राम


Journalist खबरीलाल












