बिलासपुर। राज्य शासन की इंदिरा वन
मितान योजना के तहत वन विभाग में सुरक्षा श्रमिकों को रखने का प्रावधान है।
ये सुरक्षा श्रमिक जंगल में अवैध कटाई, शिकार व तस्करी रोकने का काम करते
हुए वन विभाग की मदद करते हैं। बड़ी जिम्मेदारी के बाद भी उनके लिए वर्दी
के रूप में अलग पहचान नहीं दी गई। ऐसे में जब वे निगरानी करते कहीं दिख
जाते हैं तो अन्य ग्रामीण उन्हें ही तस्कर या शिकारी समझकर उनकी शिकायत कर
देते हैं।
सर्किल की इस समस्या को देखते हुए बिलासपुर वनमंडल के
बेलतरा सर्किल प्रभारी वेद प्रकाश शर्मा ने लिम्हा, धौरामुडा व बिटकुली के
इन श्रमिकों को अलग पहचान देते हुए अपने खर्च से 11 वर्दी दी है। तीनों
सर्किल के बेहद संवदेनशील बीट है। पहले यहां हरे- पेड़ों की कटाई और तस्करी
भी होती थी। इसके साथ- साथ रोपे गए पौधों की रखवाली नहीं हो पाती थी। इसके
कारण पौधे मर जाते या फिर मवेशी चट कर देते थे। पौधरोपण की बेहतर निगरानी
और वन अपराध पर अंकुश लगाने के लिए सुरक्षा श्रमिकों तैनात किया गया।
श्रमिक इन्हीं गांव के रहवासी है।
इसका फायदा जंगल के अंदर जांच के दौरान मिलता है। वे जंगल के चप्पे- चप्पे
से वाकिब है। इसलिए बेधडक किसी भी समय गश्त करने पहुंच जाते हैं। उनका काम
देखते हुए पहचान दी गई है। साथ ही उन्हें बकायदा टार्च और लाठी भी थमाई गई।
इन सामानों की उपलब्धता के बाद अब श्रमिकों का साहस बढा है। इसके अलावा
कार्यशैली में कसावट आई है। सभी अपने- अपने क्षेत्र में जंगल व पौधरोपण की
सुरक्षा के लिए निगरानी करते हैं। इसके अलावा रात्रिकालीन गश्त भी कर रहे
हैं। विभाग में उनकी कार्यशैली से प्रभावित है। गांव में भी अब उनका कद बढ़
गया है।
वन प्रबंधन समिति भी करती है रखवाली
सरकार
ने वनांचल के गांवों को स्वावलंबी बनाने के लिए इंदिरा वन मितान योजना की
शुरूआत की है। इस योजना से आदिवासी क्षेत्र के 10 हजार गांव में युवाओं का
समूह गठित कर उन्हें वन प्रबंधन का पूरा अधिकार दिया गया हे। इन समूहों के
माध्यम से वनोपज की खरीदी, प्रंस्ककरण एंव मार्केटिंग की व्यवस्था की गई
है। इसके साथ- साथ वन प्रबंधन समिति भी बनाई गई है। इस समिति की भी
जवाबदारी जंगल की सुरक्षा होती है।
3500 रुपये भुगतान
इंदिरा मितान योजना
के तहत कार्यरत सुरक्षा श्रमिकों को समिति की ओर से 3500 रूपये का भुगतान
किया जाता है। इस योजना से युवाओं को रोजगार भी मिला है।
मदद के बाद विभाग ने कार्रवाई
सुरक्षा
श्रमिकों की मदद से वन विभाग धौरामुडा, बिटकुली और लिम्हा बीट में
कार्रवाई कर चुका है। श्रमिकों ने लकडी काटने व तस्करी के उद्देश्ये से
घुसे आरोपितों को रंगे हाथों पकडवाया। इसके अलावा चार आरोपितों पर कार्रवाई
की गई।
इंदिरा वन मितान के तहत गांव के बेरोजगार युवकों को वन सुरक्षा सहित
विभिन्न तरह की जिम्मेदारी दी गई है। हालही में इन तीनों गांवों के
श्रमिकों को पहचान के लिए वर्दी दी गई है। इससे उनका साहस बढ़ा है।
- कुमार निशांत, वनमंडलाधिकारी, बिलासपुर
बिलासपुर। राज्य शासन की इंदिरा वन
मितान योजना के तहत वन विभाग में सुरक्षा श्रमिकों को रखने का प्रावधान है।
ये सुरक्षा श्रमिक जंगल में अवैध कटाई, शिकार व तस्करी रोकने का काम करते
हुए वन विभाग की मदद करते हैं। बड़ी जिम्मेदारी के बाद भी उनके लिए वर्दी
के रूप में अलग पहचान नहीं दी गई। ऐसे में जब वे निगरानी करते कहीं दिख
जाते हैं तो अन्य ग्रामीण उन्हें ही तस्कर या शिकारी समझकर उनकी शिकायत कर
देते हैं।
सर्किल की इस समस्या को देखते हुए बिलासपुर वनमंडल के
बेलतरा सर्किल प्रभारी वेद प्रकाश शर्मा ने लिम्हा, धौरामुडा व बिटकुली के
इन श्रमिकों को अलग पहचान देते हुए अपने खर्च से 11 वर्दी दी है। तीनों
सर्किल के बेहद संवदेनशील बीट है। पहले यहां हरे- पेड़ों की कटाई और तस्करी
भी होती थी। इसके साथ- साथ रोपे गए पौधों की रखवाली नहीं हो पाती थी। इसके
कारण पौधे मर जाते या फिर मवेशी चट कर देते थे। पौधरोपण की बेहतर निगरानी
और वन अपराध पर अंकुश लगाने के लिए सुरक्षा श्रमिकों तैनात किया गया।
श्रमिक इन्हीं गांव के रहवासी है।
इसका फायदा जंगल के अंदर जांच के दौरान मिलता है। वे जंगल के चप्पे- चप्पे
से वाकिब है। इसलिए बेधडक किसी भी समय गश्त करने पहुंच जाते हैं। उनका काम
देखते हुए पहचान दी गई है। साथ ही उन्हें बकायदा टार्च और लाठी भी थमाई गई।
इन सामानों की उपलब्धता के बाद अब श्रमिकों का साहस बढा है। इसके अलावा
कार्यशैली में कसावट आई है। सभी अपने- अपने क्षेत्र में जंगल व पौधरोपण की
सुरक्षा के लिए निगरानी करते हैं। इसके अलावा रात्रिकालीन गश्त भी कर रहे
हैं। विभाग में उनकी कार्यशैली से प्रभावित है। गांव में भी अब उनका कद बढ़
गया है।
वन प्रबंधन समिति भी करती है रखवाली
सरकार
ने वनांचल के गांवों को स्वावलंबी बनाने के लिए इंदिरा वन मितान योजना की
शुरूआत की है। इस योजना से आदिवासी क्षेत्र के 10 हजार गांव में युवाओं का
समूह गठित कर उन्हें वन प्रबंधन का पूरा अधिकार दिया गया हे। इन समूहों के
माध्यम से वनोपज की खरीदी, प्रंस्ककरण एंव मार्केटिंग की व्यवस्था की गई
है। इसके साथ- साथ वन प्रबंधन समिति भी बनाई गई है। इस समिति की भी
जवाबदारी जंगल की सुरक्षा होती है।
3500 रुपये भुगतान
इंदिरा मितान योजना
के तहत कार्यरत सुरक्षा श्रमिकों को समिति की ओर से 3500 रूपये का भुगतान
किया जाता है। इस योजना से युवाओं को रोजगार भी मिला है।
मदद के बाद विभाग ने कार्रवाई
सुरक्षा
श्रमिकों की मदद से वन विभाग धौरामुडा, बिटकुली और लिम्हा बीट में
कार्रवाई कर चुका है। श्रमिकों ने लकडी काटने व तस्करी के उद्देश्ये से
घुसे आरोपितों को रंगे हाथों पकडवाया। इसके अलावा चार आरोपितों पर कार्रवाई
की गई।
इंदिरा वन मितान के तहत गांव के बेरोजगार युवकों को वन सुरक्षा सहित
विभिन्न तरह की जिम्मेदारी दी गई है। हालही में इन तीनों गांवों के
श्रमिकों को पहचान के लिए वर्दी दी गई है। इससे उनका साहस बढ़ा है।
- कुमार निशांत, वनमंडलाधिकारी, बिलासपुर



Journalist खबरीलाल














