रायपुर। कन्फेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स एसोसिएशन (कैट) ने आनलाइन
कंपनियों पर कार्रवाई के लिए प्रवर्तन निदेशालय को पत्र लिखा है। इन
कंपनियों द्वारा भारतीय कानूूनों का उल्लंघन किया जा रहा है। इस पत्र में
सभी जरूरी तथ्यों को रखा है जिसके जरिये ये साबित किया गया है कि ये
कंपनियां भारतीय कानूनों, नियमों और विनियमों का उल्लंघन करते आ रही है।
कैट
के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी व प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम
सिंहदेव ने बताया कि इससे देश के छोटे बड़े करोड़ो व्यापारियों को नुकसान
पहुंचा है, जबकि सरकार ने एफडीआइ नीति और फेमा नियमों और विनियमों में उनके
व्यापार को संरक्षित रखने के सभी प्रावधान किए है। इन कंपनियों द्वारा
कानूनों का उल्लंघन किया जा रहा है फिर भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बताते चलें कि कैट विदेशी आनलाइन कंपनियों के खिलाफ अभियान भी चला रहा है,
जो 31 दिसंबर तक चलेगा। इसके तहत लोगों से देशी सामान खरीदने की अपील की जा
रही है।
प्रवर्तन निदेशालय को अब तत्काल इनके खिलाफ कार्रवाई करनी
चाहिए और कानूनी प्रावधानों के अनुसार उल्लंघन करने के लिए अधिकतम जुर्माना
लगाकर दंडित करना चाहिए जो करीब 48,500 करोड़ रुपये के अवैध निवेश के
मूल्य का तीन गुना राशि यानी 1,44,500 करोड़ रुपये बन रहा है। उन्होंने
बताया कि इस संबंध में सारे सबूत और दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए हैं।
उन्होंने कहा कि ये कंपनियां एफडीआइ नीति, संबंधित प्रेस नोट्स और फेमा
अधिनियम, नियमों और विनियमों का पूर्ण उल्लंघन कर रही हैं। कैट हमेशा ही
व्यापारिक हितों का ध्यान रखती है और इससे देश के सात करोड़ व्यापारी जुड़े
हुए हैं।
रायपुर। कन्फेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स एसोसिएशन (कैट) ने आनलाइन
कंपनियों पर कार्रवाई के लिए प्रवर्तन निदेशालय को पत्र लिखा है। इन
कंपनियों द्वारा भारतीय कानूूनों का उल्लंघन किया जा रहा है। इस पत्र में
सभी जरूरी तथ्यों को रखा है जिसके जरिये ये साबित किया गया है कि ये
कंपनियां भारतीय कानूनों, नियमों और विनियमों का उल्लंघन करते आ रही है।
कैट
के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी व प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम
सिंहदेव ने बताया कि इससे देश के छोटे बड़े करोड़ो व्यापारियों को नुकसान
पहुंचा है, जबकि सरकार ने एफडीआइ नीति और फेमा नियमों और विनियमों में उनके
व्यापार को संरक्षित रखने के सभी प्रावधान किए है। इन कंपनियों द्वारा
कानूनों का उल्लंघन किया जा रहा है फिर भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बताते चलें कि कैट विदेशी आनलाइन कंपनियों के खिलाफ अभियान भी चला रहा है,
जो 31 दिसंबर तक चलेगा। इसके तहत लोगों से देशी सामान खरीदने की अपील की जा
रही है।
प्रवर्तन निदेशालय को अब तत्काल इनके खिलाफ कार्रवाई करनी
चाहिए और कानूनी प्रावधानों के अनुसार उल्लंघन करने के लिए अधिकतम जुर्माना
लगाकर दंडित करना चाहिए जो करीब 48,500 करोड़ रुपये के अवैध निवेश के
मूल्य का तीन गुना राशि यानी 1,44,500 करोड़ रुपये बन रहा है। उन्होंने
बताया कि इस संबंध में सारे सबूत और दस्तावेज भी उपलब्ध कराए गए हैं।
उन्होंने कहा कि ये कंपनियां एफडीआइ नीति, संबंधित प्रेस नोट्स और फेमा
अधिनियम, नियमों और विनियमों का पूर्ण उल्लंघन कर रही हैं। कैट हमेशा ही
व्यापारिक हितों का ध्यान रखती है और इससे देश के सात करोड़ व्यापारी जुड़े
हुए हैं।



Journalist खबरीलाल














