रायपुर। हिंदू संवत्सर के अगहन मास की अमावस्या तिथि और सोमवार का संयोग
यानी सोमवती अमावस्या पडऩे से महादेवघाट पर पुण्य की डुबकी लगाने श्रद्धालु
उमड़ पड़े। डुबकी लगाने के बाद हटकेश्वर महादेव के दर्शन किए। हालांकि
कोरोना संक्रमण के चलते कम ही भक्तों ने डुबकी लगाने के साथ ही उन्होंने
शारीरिक दूरी का भी पालन किया।
हटकेश्वर महादेव घाट के पुजारी पंडित
सुरेश गोस्वामी ने बताया कि सोमवती अमावस्या पर सुबह भक्तों ने घाट पर
स्नान किया। इसके बाद महाआरती में शामिल हुए। राजधानी के प्रसिद्ध
महादेवघाट के अलावा बूढ़ा तालाब के बूढ़ेश्वर मंदिर, नर्मदा पारा के नील
कंठेश्वर मंदिर समेत अनेक मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। कई
भक्तों ने मौन व्रत का भी संकल्प लिया। वहीं दूसरी ओर पति की लंबी उम्र और
खुशहाली की कामना करते हुए महिलाओं ने व्रत रखा और पीपल वृक्ष की पूजा की।
इसके साथ ही तिल मिश्रित जल को पीपल के पेड़ पर अर्पित किए। पीपल की
परिक्रमा करते हुए सुख, समृद्धि की कामना की। ऐसी मान्यता है कि पीपल वृक्ष
में भगवान विष्णु का वास होता है। पीपल पूजने से देवगण प्रसन्न होते हैं
और पापों का नाश हो जाता है।
रायपुर। हिंदू संवत्सर के अगहन मास की अमावस्या तिथि और सोमवार का संयोग
यानी सोमवती अमावस्या पडऩे से महादेवघाट पर पुण्य की डुबकी लगाने श्रद्धालु
उमड़ पड़े। डुबकी लगाने के बाद हटकेश्वर महादेव के दर्शन किए। हालांकि
कोरोना संक्रमण के चलते कम ही भक्तों ने डुबकी लगाने के साथ ही उन्होंने
शारीरिक दूरी का भी पालन किया।
हटकेश्वर महादेव घाट के पुजारी पंडित
सुरेश गोस्वामी ने बताया कि सोमवती अमावस्या पर सुबह भक्तों ने घाट पर
स्नान किया। इसके बाद महाआरती में शामिल हुए। राजधानी के प्रसिद्ध
महादेवघाट के अलावा बूढ़ा तालाब के बूढ़ेश्वर मंदिर, नर्मदा पारा के नील
कंठेश्वर मंदिर समेत अनेक मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। कई
भक्तों ने मौन व्रत का भी संकल्प लिया। वहीं दूसरी ओर पति की लंबी उम्र और
खुशहाली की कामना करते हुए महिलाओं ने व्रत रखा और पीपल वृक्ष की पूजा की।
इसके साथ ही तिल मिश्रित जल को पीपल के पेड़ पर अर्पित किए। पीपल की
परिक्रमा करते हुए सुख, समृद्धि की कामना की। ऐसी मान्यता है कि पीपल वृक्ष
में भगवान विष्णु का वास होता है। पीपल पूजने से देवगण प्रसन्न होते हैं
और पापों का नाश हो जाता है।


Journalist खबरीलाल












