रायपुर। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेश के 27 जिलों में संचालित
सखी वन स्टॉप सेंटर में विगत 2 वर्ष में 6 हजार 696 प्रकरणों का निराकरण
किया गया है और 3 हजार 694 प्रकरणों में महिलाओं को आसरा दिया गया।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पीडि़त व संकटग्रस्त महिला को एक ही छत के नीचे
आवश्यक सुविधा और सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सखी सेंटर का संचालन
किया जा रहा है। अब ये केन्द्र महिलाओं को एक छत के नीचे तत्काल सहायता
देने के एक सशक्त और सुलभ माध्यम बनते जा रहे हैं।
महिला एवं बाल विकास
मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिय़ा ने कहा कि राज्य सरकार हर महिला के सुख-दुख
में सहभागी है और हर संभव सहायता के लिए तत्पर है। कई एैसे मामले हैं
जिनमें सखी सेंटर के माध्यम से काउंसलिंग के माध्यम से पति-पत्नि के मध्य
समझौता कराकर उनकी गृहस्ती को फिर से बसने में मदद की गई हैै। समझौता न
होने की स्थिति में आवेदिकाओं को उनका स्त्री धन लौटाया गया है। महिलाओं को
पुलिस, विधिक और मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध करायी गई हैं। दूसरे प्रदेश में
भटकी महिलाओं को वापस लाया गया है। लड़ाई-झगड़े के चलते घर से रात में
निकाल देने की स्थिति में महिलाओं को सुरक्षित आसरा दिया गया है। निराश्रित
और बीमार बुजुर्ग महिलाओं का उपचार कराकर सुरक्षित स्थानों में भेजा गया
है। इन सेंटरों में सभी वर्ग, धर्म, संप्रदाय की महिलाओं को एक छत के नीचे
उनकी जरूरत के अनुसार चिकित्सा, विधिक सहायता, मनोवैज्ञानिक सलाह, पुलिस
सहायता,अस्थायी आश्रय, मानसिक चिकित्सा और परामर्श की सुविधा दी जाती है।
रायपुर। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रदेश के 27 जिलों में संचालित
सखी वन स्टॉप सेंटर में विगत 2 वर्ष में 6 हजार 696 प्रकरणों का निराकरण
किया गया है और 3 हजार 694 प्रकरणों में महिलाओं को आसरा दिया गया।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पीडि़त व संकटग्रस्त महिला को एक ही छत के नीचे
आवश्यक सुविधा और सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सखी सेंटर का संचालन
किया जा रहा है। अब ये केन्द्र महिलाओं को एक छत के नीचे तत्काल सहायता
देने के एक सशक्त और सुलभ माध्यम बनते जा रहे हैं।
महिला एवं बाल विकास
मंत्री श्रीमती अनिला भेंडिय़ा ने कहा कि राज्य सरकार हर महिला के सुख-दुख
में सहभागी है और हर संभव सहायता के लिए तत्पर है। कई एैसे मामले हैं
जिनमें सखी सेंटर के माध्यम से काउंसलिंग के माध्यम से पति-पत्नि के मध्य
समझौता कराकर उनकी गृहस्ती को फिर से बसने में मदद की गई हैै। समझौता न
होने की स्थिति में आवेदिकाओं को उनका स्त्री धन लौटाया गया है। महिलाओं को
पुलिस, विधिक और मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध करायी गई हैं। दूसरे प्रदेश में
भटकी महिलाओं को वापस लाया गया है। लड़ाई-झगड़े के चलते घर से रात में
निकाल देने की स्थिति में महिलाओं को सुरक्षित आसरा दिया गया है। निराश्रित
और बीमार बुजुर्ग महिलाओं का उपचार कराकर सुरक्षित स्थानों में भेजा गया
है। इन सेंटरों में सभी वर्ग, धर्म, संप्रदाय की महिलाओं को एक छत के नीचे
उनकी जरूरत के अनुसार चिकित्सा, विधिक सहायता, मनोवैज्ञानिक सलाह, पुलिस
सहायता,अस्थायी आश्रय, मानसिक चिकित्सा और परामर्श की सुविधा दी जाती है।


Journalist खबरीलाल












