भारतीय रिजर्व बैंक ने अप्रैल की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक से ठीक एक सप्ताह पहले बैंकिंग प्रणाली में खुले बाजार परिचालन के जरिये 80,000 करोड़ रुपये डालने की घोषणा की। इसे बैंकों के लिए नीतिगत ब्याज दरों में कटौती का लाभ सुनिश्चित करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। अतिरिक्त नकदी होने से नीतिगत दरों का लाभ आगे बढ़ाने में मदद मिलती है और इसका विपरीत होने पर मुश्किल होता है।
रिजर्व बैंक की बॉन्ड खरीद चार खंडों में 3 अप्रैल, 8 अप्रैल, 22 अप्रैल और 29 अप्रैल को हर बार 20,000 करोड़ रुपये की होगी। रिजर्व बैंक के अनुसार इस कदम से नकदी की समुचित स्थिति सुनिश्चित होगी। केंद्रीय बैंक ने ओएमओ की घोषणा करते हुए कहा, ‘रिजर्व बैंक नकदी की समुचित स्थितियों का आकलन करने के लिए बढ़ती नकदी और मार्केट की बदलती स्थितियों पर नजर रखेगा।’ यह कदम चार महीने बाद शनिवार और रविवार को बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति अधिशेष होने के बाद उठाया गया है।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार ‘ओएमओ की खरीदारी योजना संकेत है कि रिजर्व बैंक का लक्ष्य बैंकिंग प्रणाली में समुचित अधिशेष नकदी को कायम रखने पर है। अधिशेष ब्याज दरों में कटौती के लिए अनिवार्य भी है।’
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा, ‘बीती स्थितियों ने दर्शाया है कि नकदी नियमित रूप से 1 लाख करोड़ से 2 लाख करोड़ रुपये रहने पर ही बदलाव होता है। इस उम्मीद के बावजूद रिजर्व बैंक अपने लाभांश के कारण इन गतिविधियों को सुस्त कर सकता है। केंद्रीय बैंक के कदमों से लगता है कि वह बदलाव के लिए समुचित नकदी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि रिजर्व बैंक की आगामी बैठक में रुख में बदलाव होने की उम्मीद नहीं है।’
यह उम्मीद जबरदस्त ढंग से लगाई जा रही है कि भारतीय रिजर्व बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति 7 से 9 अप्रैल को प्रस्तावित बैठक में दूसरी बार नीतिगत रीपो दर में 25 आधार अंक की कटौती कर सकती है। घरेलू दर तय करने वाली समिति ने नीतिगत रीपो दर को लगातार 11 बैठकों में यथावत रखने के बाद इसमें फरवरी की बैठक में 25 आधार अंक की कटौती की थी। भारतीय रिजर्व बैंक के नवीनतम आकंड़े के अनुसार रविवार को शुद्ध नकदी 89.398 करोड़ रुपये थी। मुख्य नकदी 21 मार्च को 1.1 लाख करोड़ रुपए अधिक थी।
भारतीय रिजर्व बैंक ने अप्रैल की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक से ठीक एक सप्ताह पहले बैंकिंग प्रणाली में खुले बाजार परिचालन के जरिये 80,000 करोड़ रुपये डालने की घोषणा की। इसे बैंकों के लिए नीतिगत ब्याज दरों में कटौती का लाभ सुनिश्चित करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। अतिरिक्त नकदी होने से नीतिगत दरों का लाभ आगे बढ़ाने में मदद मिलती है और इसका विपरीत होने पर मुश्किल होता है।
रिजर्व बैंक की बॉन्ड खरीद चार खंडों में 3 अप्रैल, 8 अप्रैल, 22 अप्रैल और 29 अप्रैल को हर बार 20,000 करोड़ रुपये की होगी। रिजर्व बैंक के अनुसार इस कदम से नकदी की समुचित स्थिति सुनिश्चित होगी। केंद्रीय बैंक ने ओएमओ की घोषणा करते हुए कहा, ‘रिजर्व बैंक नकदी की समुचित स्थितियों का आकलन करने के लिए बढ़ती नकदी और मार्केट की बदलती स्थितियों पर नजर रखेगा।’ यह कदम चार महीने बाद शनिवार और रविवार को बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति अधिशेष होने के बाद उठाया गया है।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार ‘ओएमओ की खरीदारी योजना संकेत है कि रिजर्व बैंक का लक्ष्य बैंकिंग प्रणाली में समुचित अधिशेष नकदी को कायम रखने पर है। अधिशेष ब्याज दरों में कटौती के लिए अनिवार्य भी है।’
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा, ‘बीती स्थितियों ने दर्शाया है कि नकदी नियमित रूप से 1 लाख करोड़ से 2 लाख करोड़ रुपये रहने पर ही बदलाव होता है। इस उम्मीद के बावजूद रिजर्व बैंक अपने लाभांश के कारण इन गतिविधियों को सुस्त कर सकता है। केंद्रीय बैंक के कदमों से लगता है कि वह बदलाव के लिए समुचित नकदी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि रिजर्व बैंक की आगामी बैठक में रुख में बदलाव होने की उम्मीद नहीं है।’
यह उम्मीद जबरदस्त ढंग से लगाई जा रही है कि भारतीय रिजर्व बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति 7 से 9 अप्रैल को प्रस्तावित बैठक में दूसरी बार नीतिगत रीपो दर में 25 आधार अंक की कटौती कर सकती है। घरेलू दर तय करने वाली समिति ने नीतिगत रीपो दर को लगातार 11 बैठकों में यथावत रखने के बाद इसमें फरवरी की बैठक में 25 आधार अंक की कटौती की थी। भारतीय रिजर्व बैंक के नवीनतम आकंड़े के अनुसार रविवार को शुद्ध नकदी 89.398 करोड़ रुपये थी। मुख्य नकदी 21 मार्च को 1.1 लाख करोड़ रुपए अधिक थी।