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News (खबरीलाल न्यूज़) : एसईसीएल की कार्रवाई : किसानों की जमीन और फसल पर जबरन कब्जा करने का आरोप:

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अंबिकापुर / सरगुजा जिले के लखनपुर क्षेत्र स्थित अमेरा कोल माइंस एक बार फिर विवादों में घिर गई है। कोयला खदान विस्तार के नाम पर एसईसीएल (SECL) प्रबंधन और उसके सुरक्षाकर्मियों पर किसानों की जमीन और फसल पर जबरन कब्जा करने का आरोप लगा है। घटना परसोड़ी कला गांव की है, जहां किसानों के खेतों में लहलहा रही धान की फसल को बुलडोजर से रौंद दिया गया। जिस समय यह सब चल रहा था इस समय secl के अधिकारी भी नजर आ रहे है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना उचित मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पूरी किए कंपनी किसानों की उपजाऊ जमीन हथियाना चाहती है। जब गांव की महिलाएं विरोध करने मौके पर पहुंचीं तो वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने उन पर लाठियां बरसा दीं। अचानक हुए इस हमले से कई महिलाएं घायल हो गईं और गांव में तनाव का माहौल फैल गया।
पीड़ित किसानों का कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है। बरसों से वे इसी जमीन पर मेहनत कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। लेकिन एसईसीएल प्रबंधन उनकी आजीविका छीनकर उन्हें बिना भविष्य की सुरक्षा के उजाड़ना चाह रहा है। ग्रामीणों ने साफ कहा कि जब तक उन्हें उचित मुआवजा और वैकल्पिक जमीन उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक वे अपनी जमीन से एक इंच भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इस पूरे मामले ने प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद प्रशासनिक अमला चुप्पी साधे बैठा है। इससे कंपनी के हौसले बुलंद हैं और वे खुलेआम किसानों के हक पर बुलडोजर चला रहे हैं। फिलहाल, परसोड़ी कला गांव में गुस्सा और आक्रोश दोनों चरम पर है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। यह घटना न केवल किसानों की आजीविका पर हमला है बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।


अंबिकापुर / सरगुजा जिले के लखनपुर क्षेत्र स्थित अमेरा कोल माइंस एक बार फिर विवादों में घिर गई है। कोयला खदान विस्तार के नाम पर एसईसीएल (SECL) प्रबंधन और उसके सुरक्षाकर्मियों पर किसानों की जमीन और फसल पर जबरन कब्जा करने का आरोप लगा है। घटना परसोड़ी कला गांव की है, जहां किसानों के खेतों में लहलहा रही धान की फसल को बुलडोजर से रौंद दिया गया। जिस समय यह सब चल रहा था इस समय secl के अधिकारी भी नजर आ रहे है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना उचित मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पूरी किए कंपनी किसानों की उपजाऊ जमीन हथियाना चाहती है। जब गांव की महिलाएं विरोध करने मौके पर पहुंचीं तो वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने उन पर लाठियां बरसा दीं। अचानक हुए इस हमले से कई महिलाएं घायल हो गईं और गांव में तनाव का माहौल फैल गया।
पीड़ित किसानों का कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है। बरसों से वे इसी जमीन पर मेहनत कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। लेकिन एसईसीएल प्रबंधन उनकी आजीविका छीनकर उन्हें बिना भविष्य की सुरक्षा के उजाड़ना चाह रहा है। ग्रामीणों ने साफ कहा कि जब तक उन्हें उचित मुआवजा और वैकल्पिक जमीन उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक वे अपनी जमीन से एक इंच भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इस पूरे मामले ने प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद प्रशासनिक अमला चुप्पी साधे बैठा है। इससे कंपनी के हौसले बुलंद हैं और वे खुलेआम किसानों के हक पर बुलडोजर चला रहे हैं। फिलहाल, परसोड़ी कला गांव में गुस्सा और आक्रोश दोनों चरम पर है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। यह घटना न केवल किसानों की आजीविका पर हमला है बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।


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