रायगढ़। तमनार क्षेत्र में प्रस्तावित जनसुनवाई के
विरोध में पिछले तीन हफ्तों से लोकतांत्रिक तरीके से डटे 14 गांवों के
ग्रामीणों ने 27 दिसंबर को एक महिला आरक्षक के साथ हुई अमानवीय घटना पर कड़ा
आक्रोश व्यक्त किया है। ग्रामीणों ने एक स्वर में इस घटना की निंदा करते
हुए इसे शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने और बदनाम करने की एक “गहरी साजिश”
करार दिया है।
“असामाजिक तत्वों से हमारा कोई लेना-देना नहीं”
– ग्रामीणों द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया कि महिला
आरक्षक के साथ शर्मनाक कृत्य करने वाले लोग “असामाजिक तत्व” हैं, जिनका
आंदोलनकारी ग्रामीणों से कोई संबंध नहीं है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग
की है कि इस घृणित कार्य में शामिल असली दोषियों की पहचान कर उन्हें कड़ी से
कड़ी सजा दी जाए।
शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसा की भेंट चढ़ाने का प्रयास
– आंदोलनकारियों का कहना है कि वे पिछले 21 दिनों से पूरी तरह संवैधानिक
और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में हिंसा या दुर्व्यवहार
का आरोप निराधार है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि :
- आंदोलन को कमजोर करने के लिए बाहरी असामाजिक तत्वों की घुसपैठ कराने की कोशिश की गई।
- ग्रामीणों की सजगता ने पूर्व में भी ऐसी कोशिशों को नाकाम किया है।
- वर्ष
2008 में गारे-खम्हरिया कांड का जिक्र करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि
कैसे ‘बाहरी गुंडों’ ने प्रशासन और जनता पर पथराव किया था।
“हम
शांति और न्याय के लिए लड़ रहे हैं। महिला आरक्षक के साथ हुई घटना हमारे
संस्कारों और इस आंदोलन की मर्यादा के खिलाफ है। शासन इसकी सूक्ष्म जांच
करे ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।”14 गांवों की संघर्ष समिति
पारदर्शी जांच की मांग – प्रेस नोट के माध्यम से ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। उनका तर्क है कि यह घटना आंदोलन की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से प्रायोजित हो सकती है।
रायगढ़। तमनार क्षेत्र में प्रस्तावित जनसुनवाई के
विरोध में पिछले तीन हफ्तों से लोकतांत्रिक तरीके से डटे 14 गांवों के
ग्रामीणों ने 27 दिसंबर को एक महिला आरक्षक के साथ हुई अमानवीय घटना पर कड़ा
आक्रोश व्यक्त किया है। ग्रामीणों ने एक स्वर में इस घटना की निंदा करते
हुए इसे शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने और बदनाम करने की एक “गहरी साजिश”
करार दिया है।
“असामाजिक तत्वों से हमारा कोई लेना-देना नहीं”
– ग्रामीणों द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया कि महिला
आरक्षक के साथ शर्मनाक कृत्य करने वाले लोग “असामाजिक तत्व” हैं, जिनका
आंदोलनकारी ग्रामीणों से कोई संबंध नहीं है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग
की है कि इस घृणित कार्य में शामिल असली दोषियों की पहचान कर उन्हें कड़ी से
कड़ी सजा दी जाए।
शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसा की भेंट चढ़ाने का प्रयास
– आंदोलनकारियों का कहना है कि वे पिछले 21 दिनों से पूरी तरह संवैधानिक
और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में हिंसा या दुर्व्यवहार
का आरोप निराधार है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि :
- आंदोलन को कमजोर करने के लिए बाहरी असामाजिक तत्वों की घुसपैठ कराने की कोशिश की गई।
- ग्रामीणों की सजगता ने पूर्व में भी ऐसी कोशिशों को नाकाम किया है।
- वर्ष
2008 में गारे-खम्हरिया कांड का जिक्र करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि
कैसे ‘बाहरी गुंडों’ ने प्रशासन और जनता पर पथराव किया था।
“हम
शांति और न्याय के लिए लड़ रहे हैं। महिला आरक्षक के साथ हुई घटना हमारे
संस्कारों और इस आंदोलन की मर्यादा के खिलाफ है। शासन इसकी सूक्ष्म जांच
करे ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।”14 गांवों की संघर्ष समिति
पारदर्शी जांच की मांग – प्रेस नोट के माध्यम से ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। उनका तर्क है कि यह घटना आंदोलन की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से प्रायोजित हो सकती है।


Journalist खबरीलाल















