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News (खबरीलाल न्यूज़) : पेट्रोल-डीजल गाड़ियों का अब कोई भविष्य नहीं! नितिन गडकरी ने कंपनियों को दिया नया अल्टीमेटम:

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सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों से निकलने वाला धुआं और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें अब गुजरे जमाने की बात होने वाली हैं। आजतक के रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने साफ कर दिया है कि भविष्य अब क्लीन फ्यूल का है।

नई दिल्ली में आयोजित 'बसवर्ल्ड कॉन्क्लेव 2026' के दौरान गडकरी ने ऑटो सेक्टर को एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि पारंपरिक ईंधन यानी पेट्रोल और डीजल पर चलने वाले वाहनों का अब कोई भविष्य नहीं बचा है।

नितिन गडकरी ने वाहन निर्माता कंपनियों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे जितनी जल्दी हो सके बायोफ्यूल और अन्य ऑप्शन की ओर रुख करें। उनके अनुसार, देश के लिए पेट्रोल-डीजल न केवल आर्थिक बोझ हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा बन चुके हैं।
गडकरी ने बताया कि भारत हर साल बहुत बड़ी मात्रा में फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) का आयात करता है, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब वक्त आ गया है जब हमें सस्ता, प्रदूषण मुक्त और स्वदेशी रास्ता चुनना होगा।

परिवहन क्षेत्र में बदलाव की बात करते हुए गडकरी ने हाइड्रोजन को 'फ्यूचर फ्यूल' करार दिया। उन्होंने कहा कि देश में इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है और कई रूट्स पर हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रक और बसों की टेस्टिंग भी शुरू हो चुकी है। गडकरी के मुताबिक, हाईवे और शहरों में बढ़ती मोबिलिटी को देखते हुए एक मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम का होना अनिवार्य है, जो पूरी तरह स्वदेशी और किफायती हो।

मंत्री ने देश में बसों की खराब हालत और उनकी कमी पर भी चिंता जताई। उन्होंने एक चौंकाने वाला आंकड़ा देते हुए बताया कि भारत में फिलहाल प्रति 1,000 लोगों पर सिर्फ 2 बसें उपलब्ध हैं, जबकि दुनिया का औसत 8 बसों का है। यह अंतर दिखाता है कि इस सेक्टर में कितनी ज्यादा संभावना है।

वर्तमान में भारत का बस उद्योग 35,000 करोड़ रुपये का है, जहां सालाना 70,000 बसें बनती हैं। हालांकि, गडकरी ने एक बड़ी भविष्यवाणी करते हुए कहा कि अगले तीन साल में सिर्फ इलेक्ट्रिक बसों की मांग ही 1.5 लाख यूनिट तक पहुंच सकती है। उन्होंने कंपनियों को सलाह दी कि वे यात्रियों के आराम और सुरक्षा के लिए ग्लोबल स्टैंडर्ड की बसों का निर्माण करें।


सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों से निकलने वाला धुआं और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें अब गुजरे जमाने की बात होने वाली हैं। आजतक के रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने साफ कर दिया है कि भविष्य अब क्लीन फ्यूल का है।

नई दिल्ली में आयोजित 'बसवर्ल्ड कॉन्क्लेव 2026' के दौरान गडकरी ने ऑटो सेक्टर को एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि पारंपरिक ईंधन यानी पेट्रोल और डीजल पर चलने वाले वाहनों का अब कोई भविष्य नहीं बचा है।

नितिन गडकरी ने वाहन निर्माता कंपनियों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे जितनी जल्दी हो सके बायोफ्यूल और अन्य ऑप्शन की ओर रुख करें। उनके अनुसार, देश के लिए पेट्रोल-डीजल न केवल आर्थिक बोझ हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा बन चुके हैं।
गडकरी ने बताया कि भारत हर साल बहुत बड़ी मात्रा में फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) का आयात करता है, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब वक्त आ गया है जब हमें सस्ता, प्रदूषण मुक्त और स्वदेशी रास्ता चुनना होगा।

परिवहन क्षेत्र में बदलाव की बात करते हुए गडकरी ने हाइड्रोजन को 'फ्यूचर फ्यूल' करार दिया। उन्होंने कहा कि देश में इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है और कई रूट्स पर हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रक और बसों की टेस्टिंग भी शुरू हो चुकी है। गडकरी के मुताबिक, हाईवे और शहरों में बढ़ती मोबिलिटी को देखते हुए एक मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम का होना अनिवार्य है, जो पूरी तरह स्वदेशी और किफायती हो।

मंत्री ने देश में बसों की खराब हालत और उनकी कमी पर भी चिंता जताई। उन्होंने एक चौंकाने वाला आंकड़ा देते हुए बताया कि भारत में फिलहाल प्रति 1,000 लोगों पर सिर्फ 2 बसें उपलब्ध हैं, जबकि दुनिया का औसत 8 बसों का है। यह अंतर दिखाता है कि इस सेक्टर में कितनी ज्यादा संभावना है।

वर्तमान में भारत का बस उद्योग 35,000 करोड़ रुपये का है, जहां सालाना 70,000 बसें बनती हैं। हालांकि, गडकरी ने एक बड़ी भविष्यवाणी करते हुए कहा कि अगले तीन साल में सिर्फ इलेक्ट्रिक बसों की मांग ही 1.5 लाख यूनिट तक पहुंच सकती है। उन्होंने कंपनियों को सलाह दी कि वे यात्रियों के आराम और सुरक्षा के लिए ग्लोबल स्टैंडर्ड की बसों का निर्माण करें।


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