पश्चिम बंगाल में प्राइमरी टीचर भर्ती घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम अभिषेक बनर्जी के घर पहुंची है. ईडी इस मामले में उन्हें समन देने आई है और उन्हें 15 जून को पूछताछ में शामिल होने के लिए बुलाया गया है. इस कार्रवाई के बाद मामले को लेकर सियासी हलचल भी तेज हो गई है.
क्या है शिक्षक भर्ती घोटाला ? - पश्चिम बंगाल का प्राइमरी टीचर भर्ती घोटाला सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ा एक बड़ा भ्रष्टाचार मामला है. यह विवाद मुख्य रूप से 2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग द्वारा की गई भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और घोटाले के आरोप सामने आए. जांच एजेंसियों और अदालतों के मुताबिक भर्ती प्रक्रिया में मेरिट की अनदेखी कर पैसे लेकर नियुक्तियां दी गईं, कई उम्मीदवारों की ओएमआर शीट और मेरिट लिस्ट में हेरफेर किया गया, यहां तक कि कुछ ऐसे लोगों को भी नौकरी मिल गई जिन्होंने परीक्षा तक नहीं दी थी.
हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर धोखाधड़ी माना और लगभग 25 हजार से ज्यादा नियुक्तियों को रद्द कर दिया. जांच के दौरान पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी समेत कई नेताओं और अधिकारियों पर कार्रवाई हुई, जबकि सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस पूरे नेटवर्क और पैसों के लेन-देन की जांच कर रहे हैं.
पश्चिम बंगाल में प्राइमरी टीचर भर्ती घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम अभिषेक बनर्जी के घर पहुंची है. ईडी इस मामले में उन्हें समन देने आई है और उन्हें 15 जून को पूछताछ में शामिल होने के लिए बुलाया गया है. इस कार्रवाई के बाद मामले को लेकर सियासी हलचल भी तेज हो गई है.
क्या है शिक्षक भर्ती घोटाला ? - पश्चिम बंगाल का प्राइमरी टीचर भर्ती घोटाला सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ा एक बड़ा भ्रष्टाचार मामला है. यह विवाद मुख्य रूप से 2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग द्वारा की गई भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और घोटाले के आरोप सामने आए. जांच एजेंसियों और अदालतों के मुताबिक भर्ती प्रक्रिया में मेरिट की अनदेखी कर पैसे लेकर नियुक्तियां दी गईं, कई उम्मीदवारों की ओएमआर शीट और मेरिट लिस्ट में हेरफेर किया गया, यहां तक कि कुछ ऐसे लोगों को भी नौकरी मिल गई जिन्होंने परीक्षा तक नहीं दी थी.
हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर धोखाधड़ी माना और लगभग 25 हजार से ज्यादा नियुक्तियों को रद्द कर दिया. जांच के दौरान पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी समेत कई नेताओं और अधिकारियों पर कार्रवाई हुई, जबकि सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस पूरे नेटवर्क और पैसों के लेन-देन की जांच कर रहे हैं.



Journalist खबरीलाल













