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छत्तीसगढ post authorJournalist खबरीलाल LAST UPDATED ON:Thursday ,June 04,2026

CG (खबरीलाल न्यूज़) :  “परिवहन की आड़ में उत्खनन का खेल?” नकपुरा के जागरूक ग्रामीणों ने पहले ही दी थी प्रशासन को चेतावनी:

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आरंग/रायपुर। आरंग ब्लॉक के ग्राम नकपुरा स्थित दर्री तालाब और चंडी मंदिर के समीप प्रस्तावित मुरूम उत्खनन को लेकर अब ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। गांव के जिम्मेदार नागरिकों ने शासन-प्रशासन को समय रहते आगाह करते हुए आरोप लगाया है कि “परिवहन अनुमति” की ओट में अवैध मुरूम उत्खनन का सुनियोजित षड्यंत्र रचा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा मामला केवल कागज़ी जाल बुनकर सरकारी तंत्र को गुमराह करने का प्रयास है।

ग्रामीणों द्वारा खनिज विभाग रायपुर को दिए गए लिखित आवेदन में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आवेदन के अनुसार नकपुरा गांव के दर्री तालाब स्थित चंडी मंदिर के आसपास वर्षों से न तो मनरेगा के तहत कोई गहरीकरण कार्य हुआ है, न ही किसी प्रकार का रोजगारमूलक निर्माण कार्य। यहां तक कि उक्त स्थल पर ऐसा कोई ओवरबर्डन या अतिरिक्त मुरूम भी मौजूद नहीं है, जिसे परिवहन योग्य बताया जा सके। इसके बावजूद पंचायत से प्रस्ताव मांगकर परिवहन अनुमति लेने की कवायद ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ कथित मुरूम माफिया “कूट रचित दस्तावेजों” और “भ्रामक जानकारी” का सहारा लेकर शासन-प्रशासन को चूना लगाने की तैयारी में हैं। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि योजनाबद्ध तरीके से परिवहन के नाम पर वास्तव में उत्खनन की जमीन तैयार की जा रही है। गांव के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो तालाब क्षेत्र और धार्मिक स्थल के आसपास पर्यावरणीय एवं सामाजिक संतुलन बिगड़ सकता है।

सबसे अहम बात यह है कि ग्रामीणों ने दावा किया है कि उन्होंने 18 मई 2026 को ही खनिज विभाग को लिखित रूप से पूरे घटनाक्रम और संभावित षड्यंत्र की जानकारी दे दी थी। इसके बावजूद यदि विभागीय स्तर पर लीज प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो यह प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े करेगा। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि विभागीय मौन कहीं न कहीं “मौन सहमति” का संकेत तो नहीं।

गांव के बुजुर्गों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल मिट्टी या मुरूम का मामला नहीं, बल्कि गांव की आस्था, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा का प्रश्न है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि “परिवहन” की आड़ में धरती का सीना छलनी करने वालों के मंसूबे कामयाब न हो सकें।




आरंग/रायपुर। आरंग ब्लॉक के ग्राम नकपुरा स्थित दर्री तालाब और चंडी मंदिर के समीप प्रस्तावित मुरूम उत्खनन को लेकर अब ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। गांव के जिम्मेदार नागरिकों ने शासन-प्रशासन को समय रहते आगाह करते हुए आरोप लगाया है कि “परिवहन अनुमति” की ओट में अवैध मुरूम उत्खनन का सुनियोजित षड्यंत्र रचा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा मामला केवल कागज़ी जाल बुनकर सरकारी तंत्र को गुमराह करने का प्रयास है।

ग्रामीणों द्वारा खनिज विभाग रायपुर को दिए गए लिखित आवेदन में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आवेदन के अनुसार नकपुरा गांव के दर्री तालाब स्थित चंडी मंदिर के आसपास वर्षों से न तो मनरेगा के तहत कोई गहरीकरण कार्य हुआ है, न ही किसी प्रकार का रोजगारमूलक निर्माण कार्य। यहां तक कि उक्त स्थल पर ऐसा कोई ओवरबर्डन या अतिरिक्त मुरूम भी मौजूद नहीं है, जिसे परिवहन योग्य बताया जा सके। इसके बावजूद पंचायत से प्रस्ताव मांगकर परिवहन अनुमति लेने की कवायद ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ कथित मुरूम माफिया “कूट रचित दस्तावेजों” और “भ्रामक जानकारी” का सहारा लेकर शासन-प्रशासन को चूना लगाने की तैयारी में हैं। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि योजनाबद्ध तरीके से परिवहन के नाम पर वास्तव में उत्खनन की जमीन तैयार की जा रही है। गांव के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो तालाब क्षेत्र और धार्मिक स्थल के आसपास पर्यावरणीय एवं सामाजिक संतुलन बिगड़ सकता है।

सबसे अहम बात यह है कि ग्रामीणों ने दावा किया है कि उन्होंने 18 मई 2026 को ही खनिज विभाग को लिखित रूप से पूरे घटनाक्रम और संभावित षड्यंत्र की जानकारी दे दी थी। इसके बावजूद यदि विभागीय स्तर पर लीज प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो यह प्रशासनिक संवेदनशीलता और जवाबदेही पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े करेगा। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि विभागीय मौन कहीं न कहीं “मौन सहमति” का संकेत तो नहीं।

गांव के बुजुर्गों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल मिट्टी या मुरूम का मामला नहीं, बल्कि गांव की आस्था, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा का प्रश्न है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि “परिवहन” की आड़ में धरती का सीना छलनी करने वालों के मंसूबे कामयाब न हो सकें।




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