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वैदिक पंचांग के अनुसार चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई से होने जा रही है :

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khabrilalहर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है. इसका समापन देवप्रबोधिनी एकादशी के साथ होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में विश्राम करने चले जाते हैं, जिसके बाद सृष्टि का संचालन महादेव संभालते हैं. साथ ही भगवान विष्णु देव उठनी एकादशी तक विश्राम करते हैं. इसी अवधि को चातुर्मास कहा जाता है और इसमें विवाह समेत सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं. इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस साल चातुर्मास की शुरुआत कब से होगी और इस दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए.. 

कब से शुरू हो रहा है चातुर्मास ? - वैदिक पंचांग के अनुसार चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई से होने जा रही है. वहीं, इस पवित्र काल का समापन 20 नवंबर को होगा. इस अवधि में सभी मांगलिक कार्यों की मनाही होती है और व्यक्ति को जप, तप और दान का कई गुना फल मिलता है. 

चातुर्मास के नियम - चातुर्मास बारिश के मौसम से जुड़ा होता है और इस दौरान वातावरण में नमी भी बढ़ जाती है. साथ ही संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी काफी ज्यादा बढ़ जाता है. ऐसे में चातुर्मास के दौरान हमेशा सात्विक भोजन ही करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें.

चातुर्मास के दौरान शादी-ब्याह, गृह प्रवेश समेत अन्य मांगलिक कार्यों की मनाही होती है. साथ ही इस दौरान किसी भी तरह के नए कार्यों की शुरुआत नहीं करनी चाहिए. इसके अलावा इन चार महीनों में पेड़-पौधों को काटने से भी बचना चाहिए.

चातुर्मास के 4 महीनों में भगवान विष्णु और भगवान शिव का ज्यादा से ज्यादा ध्यान करना चाहिए. आप इस दौरान 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का रोजाना जाप कर सकते हैं.

चातुर्मास के दौरान मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए. 



khabrilalहर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है. इसका समापन देवप्रबोधिनी एकादशी के साथ होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में विश्राम करने चले जाते हैं, जिसके बाद सृष्टि का संचालन महादेव संभालते हैं. साथ ही भगवान विष्णु देव उठनी एकादशी तक विश्राम करते हैं. इसी अवधि को चातुर्मास कहा जाता है और इसमें विवाह समेत सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं. इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस साल चातुर्मास की शुरुआत कब से होगी और इस दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए.. 

कब से शुरू हो रहा है चातुर्मास ? - वैदिक पंचांग के अनुसार चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई से होने जा रही है. वहीं, इस पवित्र काल का समापन 20 नवंबर को होगा. इस अवधि में सभी मांगलिक कार्यों की मनाही होती है और व्यक्ति को जप, तप और दान का कई गुना फल मिलता है. 

चातुर्मास के नियम - चातुर्मास बारिश के मौसम से जुड़ा होता है और इस दौरान वातावरण में नमी भी बढ़ जाती है. साथ ही संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी काफी ज्यादा बढ़ जाता है. ऐसे में चातुर्मास के दौरान हमेशा सात्विक भोजन ही करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें.

चातुर्मास के दौरान शादी-ब्याह, गृह प्रवेश समेत अन्य मांगलिक कार्यों की मनाही होती है. साथ ही इस दौरान किसी भी तरह के नए कार्यों की शुरुआत नहीं करनी चाहिए. इसके अलावा इन चार महीनों में पेड़-पौधों को काटने से भी बचना चाहिए.

चातुर्मास के 4 महीनों में भगवान विष्णु और भगवान शिव का ज्यादा से ज्यादा ध्यान करना चाहिए. आप इस दौरान 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का रोजाना जाप कर सकते हैं.

चातुर्मास के दौरान मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए. 


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