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News (खबरीलाल न्यूज़) : द्रौपदी ही नहीं, महाभारत की इन 3 महिलाओं ने भी रचा था इतिहास:

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 जब महाभारत में महिलाओं की चर्चा होती है, तो द्रौपदी का नाम सबसे पहले आता है, लेकिन महाभारत केवल द्रौपदी और माता कुंती तक ही सीमित नहीं है बल्कि कई ऐसी महिलाएं भी है, जिनका महाभारत में अहम योगदान रहा है।

कहा जाता है कि द्रौपदी अकेली ऐसी स्त्री नहीं थी, जिनके पांच पति थे। कुछ महिलाओं के सात पति थे, तो कुछ के दस। एक महिला की कहानी में उसके पूरे जीवन काल में व जिंदगी के अलग-अलग पड़ाव पर कई शादियों का जिक्र मिलता है।

इन किरदारों के बारे में न तो कोई चर्चा होती है और न ही इतिहास के पन्नों में इनका जिक्र मिलता है। फिर भी इनकी कहानियां प्राचीन भारतीय समाज के बारे में कई धारणाओं को चुनौती देती हैं।

जटिला की कहानी

महाभारत में जटिला गौतम गोत्र की एक अत्यंत पवित्र और तपस्विनी महिला थीं। कुछ पौराणिक ग्रंथों में जटिला को ऋषि गौतम की बेटी बताया गया है। कुछ कथाओं में कहा गया है कि उनकी शादी सात पतियों से हुई थी, जिन्हें अक्सर सम्मानित सप्त ऋषियों के रूप में पहचाना जाता है। हालांकि अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग विवरण मिलता है, लेकिन प्राचीन साहित्य में उनकी कहानी सबसे अनोखी कहानियों में से एक है। महर्षि वेदव्यास ने द्रौपदी के पांच पतियों से विवाह को उचित ठहराने और द्रुपद के संदेह को दूर करने के लिए जटिला का उदाहरण दिया था।

माधवी का रहस्य

महाभारत में माधवी राजा ययाति और एक अप्सरा की तेजस्वी पुत्री थीं। उन्हें एक दिव्य वरदान प्राप्त था, जिसके अनुसार वे हर पुत्र को जन्म देने के बाद पुनः कुंवारी हो जाती थीं। उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य मुनि गालव की गुरु दक्षिणा को पूरी करना था। द्रौपदी के पति एक ही समय में थे, लेकिन माधवी की शादियां उसके जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर कई बार हुई।

वर्क्षी के थे दस पति











































वर्क्षी महाभारत काल की एक विदुषी महिला थीं, जिनका जिक्र महाभारत के आदि पर्व में मिलता है। वर्क्षी दस पतियों के साथ बहुपति विवाह में थी। महर्षि वेदव्यास ने यह सिद्ध करने के लिए इनके संदर्भ का इस्तेमाल किया था कि द्रौपदी का पांच पांडवों से विवाह अनुचित नहीं है। अब सवाल है कि इतनी दिलचस्प कहानी को प्रमुखता से क्यों नहीं सहेज कर रखा गया? इतिहासकारों और विद्वानों का मानना है कि कई बार क्षेत्रीय परंपराओं में ऐसे पात्र होते हैं जो धीरे-धीरे मुख्यधारा की कहानियों से गायब हो जाते हैं।



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 जब महाभारत में महिलाओं की चर्चा होती है, तो द्रौपदी का नाम सबसे पहले आता है, लेकिन महाभारत केवल द्रौपदी और माता कुंती तक ही सीमित नहीं है बल्कि कई ऐसी महिलाएं भी है, जिनका महाभारत में अहम योगदान रहा है।

कहा जाता है कि द्रौपदी अकेली ऐसी स्त्री नहीं थी, जिनके पांच पति थे। कुछ महिलाओं के सात पति थे, तो कुछ के दस। एक महिला की कहानी में उसके पूरे जीवन काल में व जिंदगी के अलग-अलग पड़ाव पर कई शादियों का जिक्र मिलता है।

इन किरदारों के बारे में न तो कोई चर्चा होती है और न ही इतिहास के पन्नों में इनका जिक्र मिलता है। फिर भी इनकी कहानियां प्राचीन भारतीय समाज के बारे में कई धारणाओं को चुनौती देती हैं।

जटिला की कहानी

महाभारत में जटिला गौतम गोत्र की एक अत्यंत पवित्र और तपस्विनी महिला थीं। कुछ पौराणिक ग्रंथों में जटिला को ऋषि गौतम की बेटी बताया गया है। कुछ कथाओं में कहा गया है कि उनकी शादी सात पतियों से हुई थी, जिन्हें अक्सर सम्मानित सप्त ऋषियों के रूप में पहचाना जाता है। हालांकि अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग विवरण मिलता है, लेकिन प्राचीन साहित्य में उनकी कहानी सबसे अनोखी कहानियों में से एक है। महर्षि वेदव्यास ने द्रौपदी के पांच पतियों से विवाह को उचित ठहराने और द्रुपद के संदेह को दूर करने के लिए जटिला का उदाहरण दिया था।

माधवी का रहस्य

महाभारत में माधवी राजा ययाति और एक अप्सरा की तेजस्वी पुत्री थीं। उन्हें एक दिव्य वरदान प्राप्त था, जिसके अनुसार वे हर पुत्र को जन्म देने के बाद पुनः कुंवारी हो जाती थीं। उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य मुनि गालव की गुरु दक्षिणा को पूरी करना था। द्रौपदी के पति एक ही समय में थे, लेकिन माधवी की शादियां उसके जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर कई बार हुई।

वर्क्षी के थे दस पति











































वर्क्षी महाभारत काल की एक विदुषी महिला थीं, जिनका जिक्र महाभारत के आदि पर्व में मिलता है। वर्क्षी दस पतियों के साथ बहुपति विवाह में थी। महर्षि वेदव्यास ने यह सिद्ध करने के लिए इनके संदर्भ का इस्तेमाल किया था कि द्रौपदी का पांच पांडवों से विवाह अनुचित नहीं है। अब सवाल है कि इतनी दिलचस्प कहानी को प्रमुखता से क्यों नहीं सहेज कर रखा गया? इतिहासकारों और विद्वानों का मानना है कि कई बार क्षेत्रीय परंपराओं में ऐसे पात्र होते हैं जो धीरे-धीरे मुख्यधारा की कहानियों से गायब हो जाते हैं।


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