
नई दिल्ली। सफदरजंग अस्पताल में भर्ती जलवायु कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद् सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर वांगचुक को प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की है।
इस याचिका पर सुनवाई के दौरान वांगचुक की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सफदरजंग अस्पताल में समस्या यह है कि उनके डॉक्टरों और वकीलों तक हमारी पहुंच नहीं है, हमें कोई जानकारी नहीं है। हमने तय किया कि उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाना चाहिए। हम अपनी पसंद के डॉक्टर और अस्पताल चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सीमित मांग है और वेदांता अस्पताल से बात हो चुकी है। हम सोनम को वहां ले जाकर इलाज करवाना चाहते हैं।
केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए एएसजी चेतन शर्मा ने कहा कि मैं याचिका के तकनीकी पहलू आदि पर कोई मुद्दा नहीं उठा रहा हूं। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश द्वारा जनहित याचिका पर पारित आदेश पर कहा कि हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को सुधारने के लिए जो भी चिकित्सीय हस्तक्षेप आवश्यक हो, वह किया जाएगा।
एएसजी ने कहा कि उनकी सेहत बिगड़ रही थी। इस मौसम में 18 दिन तक उपवास करने से 'कीटोसिस' नाम की स्थिति पैदा हो सकती है। हो सकता है कि यह मेडिकल पैरामीटर्स में न दिखे, लेकिन इससे शॉक जैसी स्थिति बन सकती है। अगर पोटैशियम का स्तर गिरता है, तो इससे एक स्थिति होती है जिसे हाइपोग्लाइसीमिया कहते हैं। इलाज की गुणवत्ता पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का इलाज एम्स में होता है। इसलिए यह कोर्ट खास तौर पर निर्देश देता है कि एक सरकारी बोर्ड इसकी जांच करे। कोर्ट सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता को मानता है।

नई दिल्ली। सफदरजंग अस्पताल में भर्ती जलवायु कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद् सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर वांगचुक को प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की है।
इस याचिका पर सुनवाई के दौरान वांगचुक की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि सफदरजंग अस्पताल में समस्या यह है कि उनके डॉक्टरों और वकीलों तक हमारी पहुंच नहीं है, हमें कोई जानकारी नहीं है। हमने तय किया कि उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाना चाहिए। हम अपनी पसंद के डॉक्टर और अस्पताल चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सीमित मांग है और वेदांता अस्पताल से बात हो चुकी है। हम सोनम को वहां ले जाकर इलाज करवाना चाहते हैं।
केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए एएसजी चेतन शर्मा ने कहा कि मैं याचिका के तकनीकी पहलू आदि पर कोई मुद्दा नहीं उठा रहा हूं। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश द्वारा जनहित याचिका पर पारित आदेश पर कहा कि हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को सुधारने के लिए जो भी चिकित्सीय हस्तक्षेप आवश्यक हो, वह किया जाएगा।
एएसजी ने कहा कि उनकी सेहत बिगड़ रही थी। इस मौसम में 18 दिन तक उपवास करने से 'कीटोसिस' नाम की स्थिति पैदा हो सकती है। हो सकता है कि यह मेडिकल पैरामीटर्स में न दिखे, लेकिन इससे शॉक जैसी स्थिति बन सकती है। अगर पोटैशियम का स्तर गिरता है, तो इससे एक स्थिति होती है जिसे हाइपोग्लाइसीमिया कहते हैं। इलाज की गुणवत्ता पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का इलाज एम्स में होता है। इसलिए यह कोर्ट खास तौर पर निर्देश देता है कि एक सरकारी बोर्ड इसकी जांच करे। कोर्ट सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता को मानता है।


Journalist खबरीलाल















