Breaking News

बड़ी खबर (खबरीलाल न्यूज़) :: IIT, IIM के बाद IAS बनी दिव्या मित्तल न दिया इस्तीफा; बीडीए उपाध्यक्ष के साथ कई जिलों में जिलाधिकारी के रूप में उत्कृष्ट एवं प्रशंसनीय कार्य कर दिव्या ने हर किसी को अपना कायल बनाया :

post


khabrilal

बरेली। कर्ज तले दबे बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) और 300 एकड़ से अधिक में फैले रामगंगा नगर आवासीय योजना में अवैध कब्जों के मकड़जाल में फंसे बीडीए को उबारने और बरेली को संवारने की नींव पूर्व बीडीए उपाध्यक्ष आईएएस दिव्या मित्तल ने ही रखी। महज 19 माह के कार्यकाल में उन्होंने बीडीए के ऊपर 32 करोड़ से अधिक के सरकारी ऋण को चुकाकर प्राधिकरण को डिफॉल्टर होने से बचाया।

दिव्या के कुशल प्रशासनिक क्षमता का प्रदर्शन रामगंगा नगर आवासीय योजना में देखने को मिला। जब उन्होंने 300 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में विकसित होने वाले रामगंगा नगर आवासीय योजना पर हुए कब्जों को चिह्नित कर उसे तत्काल हटाने की कार्रवाई आरंभ की। साथ ही योजना को तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ाने के लिए भूखंड आवंटन की प्रक्रिया भी शुरू कराई।

वह जनसुलभ होने के साथ सख्त अफसर के रूप में भी पहचानी जाती थीं, जिसका उदाहरण बरेली के स्टेडियम रोड पर बने फोकस अस्पताल पर हुई कार्रवाई के रूप में सामने आया। जब फोकस अस्पताल प्रबंधन द्वारा मानचित्र स्वीकृति से अधिक निर्माण कर लिया गया और बीडीए के ध्वस्तीकरण आदेश से बचने को कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सिफारिशें की जाने लगी।

सिफारिशों की बाढ़ आने के बाद वह खुद बुलडोजर लेकर फोकस अस्पताल पहुंच गईं। अस्पताल की तीसरी मंजिल को ध्वस्त कराकर बड़े-बड़े रसूखदारों को सीधे चुनौती दे दिया।सख्ती कार्यशैली के साथ विकास को प्राथमिकता में रखते हुए दिव्या ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज और वेदांता अस्पताल समेत कई अन्य बड़े संस्थान-प्रतिष्ठानों को उन्होंने सबसे पहले भूखंड आवंटित कर रामगंगा के विकास का पहिया आगे बढ़ाया।

फरवरी-2019 से सितंबर-2020 तक बीडीए बीडीए उपाध्यक्ष का कार्यभार संभालने वाली दिव्या के रविवार को इंटरनेट मीडिया पर इस्तीफे का पत्र प्रसारित होने के बाद हर ओर उनकी कुशल और जनसुलभ कार्यशैली की चर्चा हर ओर होती रही। बरेली में बीडीए उपाध्यक्ष रहने के दौरान उन्हें कोरोना संक्रमण को नियंत्रण करने के लिए नोडल बना दिया गया। बतौर नोडल उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और तहसील व जिला प्रशासन द्वारा आमजन के लिए किए जाने वाले प्रयासों को समन्वय बनाया।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े संगठनों को 13 हजार में उपलब्ध कराया भूखंड शहर के सुनियोजित विकास की नींव रखने में बीडीए की पूर्व उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने फरवरी-2019 में जब चार्ज संभाला तब बीडीए कर्ज से दबे होने के साथ अपने कर्मचारियों के वेतन-पेंशन देने में भी अक्षम था।

उन्होंने बीडीए को डिफॉल्टर होने से बचाने के साथ शहर व जिले के बड़े स्वास्थ्य संगठनों के साथ वार्ता की। सभी को भविष्य में बरेली के विकास की तस्वीर दिखाते हुए भूखंड लेने की पेशकश की। उन्होंने, उस दौरान 13 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर में वेदांता, आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, आईएमए समेत अन्य कई संस्थानों को बड़े-बड़े भूखंड आवंटित किए।बीडीए उपाध्यक्ष के रूप में दिव्या के लिए गए निर्णय का असर है कि वर्तमान में रामगंगा नगर आवासीय योजना के बाद ग्रेटर बरेली और अब पीलीभीत बाइपास रोड और रामपुर-दिल्ली रोड पर औद्योगिक टाउनशिप को सृजित कर रहा।

बीडीए उपाध्यक्ष के साथ कई जिलों में जिलाधिकारी के रूप में उत्कृष्ट एवं प्रशंसनीय कार्य कर दिव्या ने हर किसी को अपना कायल बना लिया। उन्होंने 20 फरवरी 2019 में जब बीडीए उपाध्यक्ष का चार्ज संभाला तब प्राधिकरण पर पंजाब नेशनल बैंक का 32 करोड़ का कर्ज था। यह कर्ज रामगंगा नगर आवासीय योजना में किसानों से लिए गए भूमि अधिग्रहण के दौरान बतौर मुआवजा वितरण के दौरान हुए थे। बीडीए उपाध्यक्ष के रूप में सबसे पहले उन्होंने बीडीए के कर्ज को खत्म किया फिर रामगंगा नगर आवासीय योजना को धरातल पर उतारने की पहल शुरू की।

साथ ही शहर में अवैध निर्माणों पर सख्ती कर कंपाउंडिंग प्रक्रिया में भी तेजी दिखाते हुए प्राधिकरण की आर्थिकी को प्रगति के पथ पर लाया।फ्लाॅप हो चुकी करगैना योजना को किया जीवंत बदायूं रोड पर बीडीए की करगैना आवासीय योजना में बड़ी संख्या में बिना आवंटन के लोगों ने कब्जे कर लिए। कई डिफॉल्टर भी निवास करने लगे। दिव्या मित्तल के पहले कई आईएएस बतौर बीडीए उपाध्यक्ष कामकाज किया लेकिन उन्होंने करगैना योजना की तरफ देखा भी नहीं। फ्लॉप हो चुकी करगैना योजना को उन्होंने संवाद-समन्वय के जरिए अड़चनों को दूर कराया, जिसका असर रहा कि 132 से अधिक रजिस्ट्री हुई और बीडीए को बड़ी धनराशि प्राप्त हुई।



khabrilal

बरेली। कर्ज तले दबे बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) और 300 एकड़ से अधिक में फैले रामगंगा नगर आवासीय योजना में अवैध कब्जों के मकड़जाल में फंसे बीडीए को उबारने और बरेली को संवारने की नींव पूर्व बीडीए उपाध्यक्ष आईएएस दिव्या मित्तल ने ही रखी। महज 19 माह के कार्यकाल में उन्होंने बीडीए के ऊपर 32 करोड़ से अधिक के सरकारी ऋण को चुकाकर प्राधिकरण को डिफॉल्टर होने से बचाया।

दिव्या के कुशल प्रशासनिक क्षमता का प्रदर्शन रामगंगा नगर आवासीय योजना में देखने को मिला। जब उन्होंने 300 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में विकसित होने वाले रामगंगा नगर आवासीय योजना पर हुए कब्जों को चिह्नित कर उसे तत्काल हटाने की कार्रवाई आरंभ की। साथ ही योजना को तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ाने के लिए भूखंड आवंटन की प्रक्रिया भी शुरू कराई।

वह जनसुलभ होने के साथ सख्त अफसर के रूप में भी पहचानी जाती थीं, जिसका उदाहरण बरेली के स्टेडियम रोड पर बने फोकस अस्पताल पर हुई कार्रवाई के रूप में सामने आया। जब फोकस अस्पताल प्रबंधन द्वारा मानचित्र स्वीकृति से अधिक निर्माण कर लिया गया और बीडीए के ध्वस्तीकरण आदेश से बचने को कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सिफारिशें की जाने लगी।

सिफारिशों की बाढ़ आने के बाद वह खुद बुलडोजर लेकर फोकस अस्पताल पहुंच गईं। अस्पताल की तीसरी मंजिल को ध्वस्त कराकर बड़े-बड़े रसूखदारों को सीधे चुनौती दे दिया।सख्ती कार्यशैली के साथ विकास को प्राथमिकता में रखते हुए दिव्या ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज और वेदांता अस्पताल समेत कई अन्य बड़े संस्थान-प्रतिष्ठानों को उन्होंने सबसे पहले भूखंड आवंटित कर रामगंगा के विकास का पहिया आगे बढ़ाया।

फरवरी-2019 से सितंबर-2020 तक बीडीए बीडीए उपाध्यक्ष का कार्यभार संभालने वाली दिव्या के रविवार को इंटरनेट मीडिया पर इस्तीफे का पत्र प्रसारित होने के बाद हर ओर उनकी कुशल और जनसुलभ कार्यशैली की चर्चा हर ओर होती रही। बरेली में बीडीए उपाध्यक्ष रहने के दौरान उन्हें कोरोना संक्रमण को नियंत्रण करने के लिए नोडल बना दिया गया। बतौर नोडल उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और तहसील व जिला प्रशासन द्वारा आमजन के लिए किए जाने वाले प्रयासों को समन्वय बनाया।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े संगठनों को 13 हजार में उपलब्ध कराया भूखंड शहर के सुनियोजित विकास की नींव रखने में बीडीए की पूर्व उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने फरवरी-2019 में जब चार्ज संभाला तब बीडीए कर्ज से दबे होने के साथ अपने कर्मचारियों के वेतन-पेंशन देने में भी अक्षम था।

उन्होंने बीडीए को डिफॉल्टर होने से बचाने के साथ शहर व जिले के बड़े स्वास्थ्य संगठनों के साथ वार्ता की। सभी को भविष्य में बरेली के विकास की तस्वीर दिखाते हुए भूखंड लेने की पेशकश की। उन्होंने, उस दौरान 13 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर में वेदांता, आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, आईएमए समेत अन्य कई संस्थानों को बड़े-बड़े भूखंड आवंटित किए।बीडीए उपाध्यक्ष के रूप में दिव्या के लिए गए निर्णय का असर है कि वर्तमान में रामगंगा नगर आवासीय योजना के बाद ग्रेटर बरेली और अब पीलीभीत बाइपास रोड और रामपुर-दिल्ली रोड पर औद्योगिक टाउनशिप को सृजित कर रहा।

बीडीए उपाध्यक्ष के साथ कई जिलों में जिलाधिकारी के रूप में उत्कृष्ट एवं प्रशंसनीय कार्य कर दिव्या ने हर किसी को अपना कायल बना लिया। उन्होंने 20 फरवरी 2019 में जब बीडीए उपाध्यक्ष का चार्ज संभाला तब प्राधिकरण पर पंजाब नेशनल बैंक का 32 करोड़ का कर्ज था। यह कर्ज रामगंगा नगर आवासीय योजना में किसानों से लिए गए भूमि अधिग्रहण के दौरान बतौर मुआवजा वितरण के दौरान हुए थे। बीडीए उपाध्यक्ष के रूप में सबसे पहले उन्होंने बीडीए के कर्ज को खत्म किया फिर रामगंगा नगर आवासीय योजना को धरातल पर उतारने की पहल शुरू की।

साथ ही शहर में अवैध निर्माणों पर सख्ती कर कंपाउंडिंग प्रक्रिया में भी तेजी दिखाते हुए प्राधिकरण की आर्थिकी को प्रगति के पथ पर लाया।फ्लाॅप हो चुकी करगैना योजना को किया जीवंत बदायूं रोड पर बीडीए की करगैना आवासीय योजना में बड़ी संख्या में बिना आवंटन के लोगों ने कब्जे कर लिए। कई डिफॉल्टर भी निवास करने लगे। दिव्या मित्तल के पहले कई आईएएस बतौर बीडीए उपाध्यक्ष कामकाज किया लेकिन उन्होंने करगैना योजना की तरफ देखा भी नहीं। फ्लॉप हो चुकी करगैना योजना को उन्होंने संवाद-समन्वय के जरिए अड़चनों को दूर कराया, जिसका असर रहा कि 132 से अधिक रजिस्ट्री हुई और बीडीए को बड़ी धनराशि प्राप्त हुई।


...
...
...
...
...
...
Sidebar Banner
Sidebar Banner
Sidebar Banner
Sidebar Banner
Sidebar Banner