
भुवनेश्वर। ओडिशा के बालासोर वन क्षेत्र से बचाए गए पांच दुर्लभ शिशु ओरंगुटान (वनमानुषों) को भुवनेश्वर के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में सुरक्षित शिफ्ट कर दिया गया है. यहां, इनको म्यूजिक थेरेपी दी जा रही है. खासकर शास्त्रीय संगीत (क्लासिकल म्यूजिक). विशेषज्ञों का कहना है कि मां के बिना उनके मूड में बार-बार बदलाव होते देखा जा रहा है, इसलिए उन्हें म्यूजिक थेरेपी दी जा रही है. इस बीच, एथोलॉजिस्ट वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए उनके मूड की जांच कर रहे हैं.
तनाव में हैं ओरंगुटान - मिली जानकारी के अनुसार अलग-अलग समय पर वे अपनी मां की याद में उदास हो जाते हैं. इसलिए उन्हें समय बिताने के लिए पिंजरे दिए गए हैं. इसके साथ ही, कपड़े का एक बैग बनाया गया है और उनके लटकने के इंतजाम किए गए हैं. तनाव के कारण 'सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ हेल्थ कमेटी' ने उनके सैंपल लेने से इनकार कर दिया है. नंदनकानन के डिप्टी डायरेक्टर प्रदीप मिरासे ने बताया कि 10 दिनों के बाद, जब उनका तनाव कम हो जाएगा, तब सैंपल इकट्ठा किए जाएंगे.
कैसे बिता रहे हैं समय - सभी ओरंगुटान अपने समूह में एक साथ रह रहे हैं. वे एक साथ खाते हैं, एक साथ खेलते हैं और एक साथ सोते हैं. उन्हें हर दो घंटे में खाना खिलाया जा रहा है. रात में भी उनमें से दो एक साथ रहते हैं, जबकि अन्य तीन अलग सोते हैं.
24 घंटे एसी की व्यवस्था - डिप्टी डायरेक्टर प्रदीप मिरासे ने बताया कि इन ओरंगुटानों के आराम को ध्यान में रखते हुए उनके कमरे में एसी लगाया गया है. सुबह ताजी हवा आने के लिए खिड़कियां खोली जाती हैं. इनमें से एक को बुधवार को बुखार था, लेकिन अब कम हुआ है. सभी की स्वास्थ्य सुरक्षा की जांच के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है, ताकि वे नंदनकानन चिड़ियाघर (Zoo) में रह सकें.
वन मंत्री गणेश राम खुंटिया ने कहा कि ओरंगुटान की तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए राष्ट्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को पत्र लिखा गया है. उन्होंने कहा, "नंदनकानन में रखे गए ओरंगुटानों (वनमानुषों) का स्वास्थ्य अच्छा है. उनके डीएनए रिपोर्ट आने के बाद, वे कहां से लाए गए हैं इस बारे में पता चल सकेगा." बता दें कि ये ओरंगुटान इंडोनेशिया और मलेशिया में पाए जाते हैं.
मंत्री ने बताया कि तस्करी की इस घटना की जांच के लिए पुलिस, प्रशासन, वन विभाग, स्पेशल टास्क फोर्स और स्थानीय प्रशासन मिलकर काम कर रहे हैं. जांच में पश्चिम बंगाल पुलिस और वहां के स्थानीय प्रशासन का भी सहयोग लिया जाएगा. वन्यजीवों से जुड़ी घटनाओं में राज्यों के बीच आपस में सहयोग करने की एक व्यवस्था होती है. चूंकि भारत में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कानून समान रूप से लागू होते हैं, इसलिए जांच में केंद्रीय नियमों और निर्देशों का पालन किया जाएगा.

भुवनेश्वर। ओडिशा के बालासोर वन क्षेत्र से बचाए गए पांच दुर्लभ शिशु ओरंगुटान (वनमानुषों) को भुवनेश्वर के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में सुरक्षित शिफ्ट कर दिया गया है. यहां, इनको म्यूजिक थेरेपी दी जा रही है. खासकर शास्त्रीय संगीत (क्लासिकल म्यूजिक). विशेषज्ञों का कहना है कि मां के बिना उनके मूड में बार-बार बदलाव होते देखा जा रहा है, इसलिए उन्हें म्यूजिक थेरेपी दी जा रही है. इस बीच, एथोलॉजिस्ट वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए उनके मूड की जांच कर रहे हैं.
तनाव में हैं ओरंगुटान - मिली जानकारी के अनुसार अलग-अलग समय पर वे अपनी मां की याद में उदास हो जाते हैं. इसलिए उन्हें समय बिताने के लिए पिंजरे दिए गए हैं. इसके साथ ही, कपड़े का एक बैग बनाया गया है और उनके लटकने के इंतजाम किए गए हैं. तनाव के कारण 'सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ हेल्थ कमेटी' ने उनके सैंपल लेने से इनकार कर दिया है. नंदनकानन के डिप्टी डायरेक्टर प्रदीप मिरासे ने बताया कि 10 दिनों के बाद, जब उनका तनाव कम हो जाएगा, तब सैंपल इकट्ठा किए जाएंगे.
कैसे बिता रहे हैं समय - सभी ओरंगुटान अपने समूह में एक साथ रह रहे हैं. वे एक साथ खाते हैं, एक साथ खेलते हैं और एक साथ सोते हैं. उन्हें हर दो घंटे में खाना खिलाया जा रहा है. रात में भी उनमें से दो एक साथ रहते हैं, जबकि अन्य तीन अलग सोते हैं.
24 घंटे एसी की व्यवस्था - डिप्टी डायरेक्टर प्रदीप मिरासे ने बताया कि इन ओरंगुटानों के आराम को ध्यान में रखते हुए उनके कमरे में एसी लगाया गया है. सुबह ताजी हवा आने के लिए खिड़कियां खोली जाती हैं. इनमें से एक को बुधवार को बुखार था, लेकिन अब कम हुआ है. सभी की स्वास्थ्य सुरक्षा की जांच के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है, ताकि वे नंदनकानन चिड़ियाघर (Zoo) में रह सकें.
वन मंत्री गणेश राम खुंटिया ने कहा कि ओरंगुटान की तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए राष्ट्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को पत्र लिखा गया है. उन्होंने कहा, "नंदनकानन में रखे गए ओरंगुटानों (वनमानुषों) का स्वास्थ्य अच्छा है. उनके डीएनए रिपोर्ट आने के बाद, वे कहां से लाए गए हैं इस बारे में पता चल सकेगा." बता दें कि ये ओरंगुटान इंडोनेशिया और मलेशिया में पाए जाते हैं.
मंत्री ने बताया कि तस्करी की इस घटना की जांच के लिए पुलिस, प्रशासन, वन विभाग, स्पेशल टास्क फोर्स और स्थानीय प्रशासन मिलकर काम कर रहे हैं. जांच में पश्चिम बंगाल पुलिस और वहां के स्थानीय प्रशासन का भी सहयोग लिया जाएगा. वन्यजीवों से जुड़ी घटनाओं में राज्यों के बीच आपस में सहयोग करने की एक व्यवस्था होती है. चूंकि भारत में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कानून समान रूप से लागू होते हैं, इसलिए जांच में केंद्रीय नियमों और निर्देशों का पालन किया जाएगा.


Journalist खबरीलाल














