नई दिल्ली। देशभर में प्रतिवर्ष 31 अक्टूबर को भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह दिवस देशवासियों को राष्ट्रीय एकता, अखंडता, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का संदेश देता है। वर्ष 2014 से भारत सरकार द्वारा सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न रियासतों को एकजुट कर एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण करना था। सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी दूरदर्शिता, दृढ़ इच्छाशक्ति और कुशल नेतृत्व से 560 से अधिक देशी रियासतों के भारतीय संघ में एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके इसी ऐतिहासिक योगदान के कारण उन्हें आधुनिक भारत का शिल्पकार और लौह पुरुष कहा जाता है।
राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर देशभर में एकता की शपथ, प्रभात फेरियां, जागरूकता कार्यक्रम तथा 'रन फॉर यूनिटी' जैसे आयोजन किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विशेषकर युवा पीढ़ी को राष्ट्रीय एकता के महत्व से परिचित कराना और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।
भारत विविध भाषाओं, धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं वाला विशाल देश है। विविधता में एकता ही इसकी सबसे बड़ी पहचान और शक्ति है। वर्तमान समय में जब समाज के सामने जातिवाद, क्षेत्रवाद, सांप्रदायिक तनाव और सामाजिक विभाजन जैसी चुनौतियां मौजूद हैं, तब सरदार पटेल के विचार और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। राष्ट्रीय एकता दिवस केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को यह याद दिलाने का दिन है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है। देश की प्रगति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए आपसी विश्वास, भाईचारा तथा एकजुटता अत्यंत आवश्यक है।
नई दिल्ली। देशभर में प्रतिवर्ष 31 अक्टूबर को भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह दिवस देशवासियों को राष्ट्रीय एकता, अखंडता, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का संदेश देता है। वर्ष 2014 से भारत सरकार द्वारा सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न रियासतों को एकजुट कर एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण करना था। सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी दूरदर्शिता, दृढ़ इच्छाशक्ति और कुशल नेतृत्व से 560 से अधिक देशी रियासतों के भारतीय संघ में एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके इसी ऐतिहासिक योगदान के कारण उन्हें आधुनिक भारत का शिल्पकार और लौह पुरुष कहा जाता है।
राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर देशभर में एकता की शपथ, प्रभात फेरियां, जागरूकता कार्यक्रम तथा 'रन फॉर यूनिटी' जैसे आयोजन किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विशेषकर युवा पीढ़ी को राष्ट्रीय एकता के महत्व से परिचित कराना और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।
भारत विविध भाषाओं, धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं वाला विशाल देश है। विविधता में एकता ही इसकी सबसे बड़ी पहचान और शक्ति है। वर्तमान समय में जब समाज के सामने जातिवाद, क्षेत्रवाद, सांप्रदायिक तनाव और सामाजिक विभाजन जैसी चुनौतियां मौजूद हैं, तब सरदार पटेल के विचार और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। राष्ट्रीय एकता दिवस केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी को श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को यह याद दिलाने का दिन है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है। देश की प्रगति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए आपसी विश्वास, भाईचारा तथा एकजुटता अत्यंत आवश्यक है।


Journalist खबरीलाल











