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रेत खनन मामलों में लापरवाही, राजनांदगांव खनिज अधिकारी निलंबित:

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रायपुर । खनिज साधन विभाग ने जिला राजनांदगांव के खनिज अधिकारी प्रवीन चन्द्राकर को अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण में विफल रहने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह आदेश अपर सचिव एम. चन्द्रशेखर द्वारा जारी किया गया।


आदेश में उल्लेख किया गया है कि चन्द्राकर द्वारा खनिज रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के प्रकरणों में संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3(1) और 3(2) का उल्लंघन है। इस आधार पर उन्हें निलंबन की श्रेणी में रखते हुए राज्य शासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।


आदेश के अनुसार, निलंबन की अवधि में प्रवीन चन्द्राकर का मुख्यालय संचालालय, भौमिकी तथा खनिकर्म, रायपुर निर्धारित किया गया है। साथ ही निलंबन के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।


पृष्ठभूमि

राजनांदगांव जिले में बीते कुछ समय से रेत के अवैध खनन को लेकर शिकायतें बढ़ती जा रही थीं। स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही को लेकर जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों द्वारा आपत्ति भी जताई जा रही थी। सरकार की सख्त मंशा के तहत अब जिम्मेदार अधिकारियों पर प्रत्यक्ष प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है।




रायपुर । खनिज साधन विभाग ने जिला राजनांदगांव के खनिज अधिकारी प्रवीन चन्द्राकर को अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण में विफल रहने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह आदेश अपर सचिव एम. चन्द्रशेखर द्वारा जारी किया गया।


आदेश में उल्लेख किया गया है कि चन्द्राकर द्वारा खनिज रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के प्रकरणों में संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3(1) और 3(2) का उल्लंघन है। इस आधार पर उन्हें निलंबन की श्रेणी में रखते हुए राज्य शासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।


आदेश के अनुसार, निलंबन की अवधि में प्रवीन चन्द्राकर का मुख्यालय संचालालय, भौमिकी तथा खनिकर्म, रायपुर निर्धारित किया गया है। साथ ही निलंबन के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।


पृष्ठभूमि

राजनांदगांव जिले में बीते कुछ समय से रेत के अवैध खनन को लेकर शिकायतें बढ़ती जा रही थीं। स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही को लेकर जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों द्वारा आपत्ति भी जताई जा रही थी। सरकार की सख्त मंशा के तहत अब जिम्मेदार अधिकारियों पर प्रत्यक्ष प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है।




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