नई दिल्ली. भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर को लेकर एक बड़ा दिन आ चुका है। अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार निर्माता टेस्ला (Tesla) ने आखिरकार 15 जुलाई 2025 को अपनी आधिकारिक एंट्री कर ली है। कंपनी ने मुंबई के बीकेसी स्थित मेकर मैक्सिटी (Maker Maxity) मॉल में पहला शोरूम और एक्सपीरियंस सेंटर ओपेन किया है। इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक भी मौजूद रहे। उद्घाटन के मौके पर भारत में टेस्ला का वेलकम करते हुए फडणवीस ने कहा कि इसके लिए यही सही समय और सही जगह है।
टेस्ला मॉडल Y (Tesla Model Y) SUV की भारत में लॉन्चिंग हो चुकी है। कंपनी की शुरुआत फिलहाल CBU (Completely Built Unit) यानी पूरी बनी तरह विदेश में बनाई गई कारों के इंपोर्ट से होगी। वहीं, इसकी डिलीवरी सितंबर 2025 से शुरू होने की संभावना है। अभी सिर्फ मुंबई में स्टोर खुला है, लेकिन जल्द ही दिल्ली में दूसरा स्टोर खुल सकता है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्घाटन के समय कहा कि यह सिर्फ एक शोरूम नहीं, बल्कि यह एक बयान है कि टेस्ला आ चुकी है, वो भी सही समय पर, सही शहर में। मुंबई सिर्फ भारत की आर्थिक राजधानी नहीं, बल्कि इनोवेशन और उद्यमिता की राजधानी भी है।
महाराष्ट्र में EV पॉलिसी, चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव्स देश में सबसे बेहतरीन माने जाते हैं। फडणवीस ने कहा कि मुंबई में EV को लेकर बढ़िया इंफ्रास्ट्रक्चर है और टेस्ला की एंट्री से इसमें और सुधार होगा।
स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग पर बोलते हुए फडणवीस ने कहा कि फिलहाल टेस्ला शंघाई से गाड़ियां इंपोर्ट कर रही है, जिस पर 70–100% तक इंपोर्ट टैक्स लगता है। लेकिन, अगर सरकार टैक्स घटाकर 10% करती है, तो टेल्सा (Tesla) Giga Berlin से और मॉडल ला सकती है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि भविष्य में टेस्ला भारत में R&D और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करेगी।
आपको बता दें कि टेस्ला के साथ-साथ एलन मस्क की दूसरी कंपनी स्टारलिंक (Starlink) को भी भारत में मंजूरी मिल गई है। यह भारत के रूरल और रिमोट एरिया में हाई-स्पीड इंटरनेट लाने का काम करेगी।
टेस्ला (Tesla) की रणनीति होगी कि शुरुआत में लिमिटेड मॉडल्स और शोरूम्स के साथ ब्रांड पोजिशनिंग बनाई जाए। इसके बाद ग्राहकों की प्रतिक्रिया के आधार पर कंपनी लोकल असेंबली और मैन्युफैक्चरिंग पर आगे बढ़ सकती है। EV पॉलिसी में सुधार होने पर भारत टेस्ला (Tesla) की ग्लोबल सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बन सकती है।
टेस्ला (Tesla) की भारत में एंट्री सिर्फ एक नई कार लॉन्च नहीं, बल्कि एक नई सोच और दिशा की शुरुआत है। इससे न सिर्फ ऑटोपायलट मोड से लैस इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को लेकर लोगों में भरोसा बढ़ेगा, बल्कि भारत की EV इंडस्ट्री को भी ग्लोबल पहचान मिलेगी। अब देखना ये होगा कि टेस्ला (Tesla) कब और कैसे भारत में मैन्युफैक्चरिंग की नींव रखती है।
नई दिल्ली. भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर को लेकर एक बड़ा दिन आ चुका है। अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार निर्माता टेस्ला (Tesla) ने आखिरकार 15 जुलाई 2025 को अपनी आधिकारिक एंट्री कर ली है। कंपनी ने मुंबई के बीकेसी स्थित मेकर मैक्सिटी (Maker Maxity) मॉल में पहला शोरूम और एक्सपीरियंस सेंटर ओपेन किया है। इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक भी मौजूद रहे। उद्घाटन के मौके पर भारत में टेस्ला का वेलकम करते हुए फडणवीस ने कहा कि इसके लिए यही सही समय और सही जगह है।
टेस्ला मॉडल Y (Tesla Model Y) SUV की भारत में लॉन्चिंग हो चुकी है। कंपनी की शुरुआत फिलहाल CBU (Completely Built Unit) यानी पूरी बनी तरह विदेश में बनाई गई कारों के इंपोर्ट से होगी। वहीं, इसकी डिलीवरी सितंबर 2025 से शुरू होने की संभावना है। अभी सिर्फ मुंबई में स्टोर खुला है, लेकिन जल्द ही दिल्ली में दूसरा स्टोर खुल सकता है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्घाटन के समय कहा कि यह सिर्फ एक शोरूम नहीं, बल्कि यह एक बयान है कि टेस्ला आ चुकी है, वो भी सही समय पर, सही शहर में। मुंबई सिर्फ भारत की आर्थिक राजधानी नहीं, बल्कि इनोवेशन और उद्यमिता की राजधानी भी है।
महाराष्ट्र में EV पॉलिसी, चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव्स देश में सबसे बेहतरीन माने जाते हैं। फडणवीस ने कहा कि मुंबई में EV को लेकर बढ़िया इंफ्रास्ट्रक्चर है और टेस्ला की एंट्री से इसमें और सुधार होगा।
स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग पर बोलते हुए फडणवीस ने कहा कि फिलहाल टेस्ला शंघाई से गाड़ियां इंपोर्ट कर रही है, जिस पर 70–100% तक इंपोर्ट टैक्स लगता है। लेकिन, अगर सरकार टैक्स घटाकर 10% करती है, तो टेल्सा (Tesla) Giga Berlin से और मॉडल ला सकती है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि भविष्य में टेस्ला भारत में R&D और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करेगी।
आपको बता दें कि टेस्ला के साथ-साथ एलन मस्क की दूसरी कंपनी स्टारलिंक (Starlink) को भी भारत में मंजूरी मिल गई है। यह भारत के रूरल और रिमोट एरिया में हाई-स्पीड इंटरनेट लाने का काम करेगी।
टेस्ला (Tesla) की रणनीति होगी कि शुरुआत में लिमिटेड मॉडल्स और शोरूम्स के साथ ब्रांड पोजिशनिंग बनाई जाए। इसके बाद ग्राहकों की प्रतिक्रिया के आधार पर कंपनी लोकल असेंबली और मैन्युफैक्चरिंग पर आगे बढ़ सकती है। EV पॉलिसी में सुधार होने पर भारत टेस्ला (Tesla) की ग्लोबल सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बन सकती है।
टेस्ला (Tesla) की भारत में एंट्री सिर्फ एक नई कार लॉन्च नहीं, बल्कि एक नई सोच और दिशा की शुरुआत है। इससे न सिर्फ ऑटोपायलट मोड से लैस इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को लेकर लोगों में भरोसा बढ़ेगा, बल्कि भारत की EV इंडस्ट्री को भी ग्लोबल पहचान मिलेगी। अब देखना ये होगा कि टेस्ला (Tesla) कब और कैसे भारत में मैन्युफैक्चरिंग की नींव रखती है।



Journalist खबरीलाल














