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News (खबरीलाल न्यूज़) : सावन के अंतिम सोमवार पर जलाभिषेक के लिए दोपहर का समय भी अत्यंत शुभ:

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नई दिल्ली.  सावन का अंतिम सोमवार आज है। सावन के सोमवार का बहुत अधिक महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार का दिन भोले शंकर को समर्पित होता है। इस दिन विधि- विधान से भगवान शंकर की पूजा-अर्चना की जाती है। शिव जी को प्रसन्न करने के लिए शिवजी का जलाभिषक करना चाहिए। इस दिन जलाभिषेक और पूजा से महादेव जल्द प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामना पूरा करते हैं।

जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त- शुभ मुहूर्त में कार्य करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। वैसे तो आप आज दिनभर भगवान शंकर का जलाभिषेक कर सकते हैं, लेकिन अभिजित मुहूर्त में भगवान शंकर का जलाभिषेक करना बेहद ही शुभ माना जाता है। आज अभिजीत मुहूर्त दोपहर 2:42 से 3:36 बजे तक रहेगा।

जलाभिषेक ऐसे करें- गंगाजल में जल मिलाकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद भगवान शिव को जल अर्पित करना चाहिए। इसके बाद विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस दौरान शिवजी के मंत्रों का जाप करते रहें। इस दिन रूद्राष्टक, शिव चालीसा या शिवस्तुति का पाठ करना शुभ माना गया है।

शिवलिंग पर जल चढ़ाने के नियम- भगवान शिव को जल चढ़ाने के लिए तांबे, चांदी या कांच का लोटा लें। शिवलिंग पर जलाभिषेक हमेशा उत्तर की दिशा में करना चाहिए। उत्तर की दिशा शिव जी का बाया अंग मानी जाती है, जो पार्वती माता को समर्पित है। सबसे पहले शिवलिंग के जलाधारी के दिशा में जल चढ़ाना चाहिए, जहां गणेश जी का वास माना जाता है। अब शिवलिंग के जलाधारी के दाएं दिशा में जल चढ़ाएं, जो भगवान कार्तिकेय की जगह मानी गई है। इसके बाद शिवलिंग के जलाधारी के बीचो-बीच जल चढ़ाना चाहिए, जो भोलेनाथ की पुत्री अशोक सुंदरी को समर्पित है। अब शिवलिंग के चारों ओर जल चढ़ाएं, जो माता पार्वती की जगह मानी जाती है। आखिर में शिवलिंग के ऊपरी भाग में जल चढ़ाएं।


नई दिल्ली.  सावन का अंतिम सोमवार आज है। सावन के सोमवार का बहुत अधिक महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार का दिन भोले शंकर को समर्पित होता है। इस दिन विधि- विधान से भगवान शंकर की पूजा-अर्चना की जाती है। शिव जी को प्रसन्न करने के लिए शिवजी का जलाभिषक करना चाहिए। इस दिन जलाभिषेक और पूजा से महादेव जल्द प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामना पूरा करते हैं।

जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त- शुभ मुहूर्त में कार्य करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। वैसे तो आप आज दिनभर भगवान शंकर का जलाभिषेक कर सकते हैं, लेकिन अभिजित मुहूर्त में भगवान शंकर का जलाभिषेक करना बेहद ही शुभ माना जाता है। आज अभिजीत मुहूर्त दोपहर 2:42 से 3:36 बजे तक रहेगा।

जलाभिषेक ऐसे करें- गंगाजल में जल मिलाकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद भगवान शिव को जल अर्पित करना चाहिए। इसके बाद विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस दौरान शिवजी के मंत्रों का जाप करते रहें। इस दिन रूद्राष्टक, शिव चालीसा या शिवस्तुति का पाठ करना शुभ माना गया है।

शिवलिंग पर जल चढ़ाने के नियम- भगवान शिव को जल चढ़ाने के लिए तांबे, चांदी या कांच का लोटा लें। शिवलिंग पर जलाभिषेक हमेशा उत्तर की दिशा में करना चाहिए। उत्तर की दिशा शिव जी का बाया अंग मानी जाती है, जो पार्वती माता को समर्पित है। सबसे पहले शिवलिंग के जलाधारी के दिशा में जल चढ़ाना चाहिए, जहां गणेश जी का वास माना जाता है। अब शिवलिंग के जलाधारी के दाएं दिशा में जल चढ़ाएं, जो भगवान कार्तिकेय की जगह मानी गई है। इसके बाद शिवलिंग के जलाधारी के बीचो-बीच जल चढ़ाना चाहिए, जो भोलेनाथ की पुत्री अशोक सुंदरी को समर्पित है। अब शिवलिंग के चारों ओर जल चढ़ाएं, जो माता पार्वती की जगह मानी जाती है। आखिर में शिवलिंग के ऊपरी भाग में जल चढ़ाएं।


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