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News (खबरीलाल न्यूज़) : रक्षाबंधन पर 95 साल बाद दुर्लभ संयोग, जानें राखी बांधने की सही विधि, जानें कितने गांठ होती हैं शुभ:

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सावन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है और इस बार यह शुभ तिथि 9 अगस्त दिन शनिवार को है. इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उसकी लंबी उम्र, सुरक्षा और समृद्धि की कामना करती हैं. राखी बांधने के बाद भाई बहनों को रक्षा और सहयोग का वचन देता है. इस साल रक्षाबंधन पर 95 साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है, इससे पहले ऐसा संयोग साल 1930 में बना था. उस समय भी तिथि, नक्षत्र और योग लगभग एक ही थे. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राखी बांधन के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है. इन नियमों का पालन करते हुए राखी बांधना शुभ माना जाता है. आइए जानते हैं राखी बांधने की सही विधि क्या है…

रक्षाबंधन का महत्व
भाई बहन का यह पवित्र त्योहार सभी त्योहार में सबसे ज्यादा खुशियां देने वाला होता है. इस दिन बहनें सुबह तैयार होती हैं और भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं. जब बहनें राखी बांधती हैं, तब भाई की लंबी उम्र, उज्जल भविष्य, सुख-शांति की कामना करती हैं. ज्योतिष में राखी बांधने की एक विधि बताई गई है, इसी विधि के साथ राखी बांधने का ध्यान रखने से इस पर्व का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है. राखी बांधना कोई मात्र सांस्कृतिक रस्म नहीं है, यह एक धार्मिक अनुष्ठान है जिसकी सही विधि शास्त्रों में दी गई है.

पूजा सामग्री (सामग्री सूची)
एक थाली (पूजन थाली)
रक्षा सूत्र (राखी)
कुमकुम (या रोली)
अक्षत (चावल)
दीपक (घी या तेल का)
मिठाई (गृहनिर्मित हो तो श्रेष्ठ)
जल पात्र
नारियल (ऐच्छिक)

राखी बांधने की सही विधि
रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले उस जगह पर गंगाजल से छिड़काव करें, जहां पर राखी बांधने वाले हों. इसके बाद राखी और राखी की थाली पर भी गंगाजल का छिड़काव करें. इसके बाद आटे या रंग से एक चौक बनाएं. फिर राखी की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई, जल पात्र, नारियल आदि सामान रखें. राखी की थाली पूरी करने के बाद एक चौकी पर आसन बिछाकर भाई को उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठा दें और बहनें भी उसी दिशा की तरह मुख करके बैठें.
राखी बांधते समय कितने गांठ होती हैं शुभ
भाई के सिर पर एक रुमाल रख दें और तिलक लगाएं. अब राइट हैंड की कलाई पर राखी बांधें. राखी बांधते समय तीन गांठे बांधने की परंपरा है. मान्यता है कि राखी की तीन गांठ का महत्व ब्रह्मा, विष्णु और महेश से है. राखी बांधते समय ॐ येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल: मत्र का अवश्य जप करें. इसके बाद मिठाई खिलाकर आरती करें. अंत में भाई बहनों को गिफ्ट दें.

रक्षाबंधन 2025 पर भद्रा का साया नहीं रहने वाला है लेकिन राहुकाल भी ध्यान रखना पड़ता है. भद्रा की तरह राहुकाल में भी शुभ व मांगिलक कार्यक्रम नहीं किए जाते हैं. इसलिए 9 अगस्त को सुबह 09 बजकर 08 मिनट से 10 बजकर 47 मिनट तक राखी ना बांधें.
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त: 9 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 47 मिनट से दोपहर 1 बजकर 24 मिनट तक है. इस दिन रक्षाबंधन के लिए 7 घंटे 37 मिनट तक का शुभ मुहूर्त है.


सावन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है और इस बार यह शुभ तिथि 9 अगस्त दिन शनिवार को है. इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उसकी लंबी उम्र, सुरक्षा और समृद्धि की कामना करती हैं. राखी बांधने के बाद भाई बहनों को रक्षा और सहयोग का वचन देता है. इस साल रक्षाबंधन पर 95 साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है, इससे पहले ऐसा संयोग साल 1930 में बना था. उस समय भी तिथि, नक्षत्र और योग लगभग एक ही थे. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राखी बांधन के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है. इन नियमों का पालन करते हुए राखी बांधना शुभ माना जाता है. आइए जानते हैं राखी बांधने की सही विधि क्या है…

रक्षाबंधन का महत्व
भाई बहन का यह पवित्र त्योहार सभी त्योहार में सबसे ज्यादा खुशियां देने वाला होता है. इस दिन बहनें सुबह तैयार होती हैं और भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं. जब बहनें राखी बांधती हैं, तब भाई की लंबी उम्र, उज्जल भविष्य, सुख-शांति की कामना करती हैं. ज्योतिष में राखी बांधने की एक विधि बताई गई है, इसी विधि के साथ राखी बांधने का ध्यान रखने से इस पर्व का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है. राखी बांधना कोई मात्र सांस्कृतिक रस्म नहीं है, यह एक धार्मिक अनुष्ठान है जिसकी सही विधि शास्त्रों में दी गई है.

पूजा सामग्री (सामग्री सूची)
एक थाली (पूजन थाली)
रक्षा सूत्र (राखी)
कुमकुम (या रोली)
अक्षत (चावल)
दीपक (घी या तेल का)
मिठाई (गृहनिर्मित हो तो श्रेष्ठ)
जल पात्र
नारियल (ऐच्छिक)

राखी बांधने की सही विधि
रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले उस जगह पर गंगाजल से छिड़काव करें, जहां पर राखी बांधने वाले हों. इसके बाद राखी और राखी की थाली पर भी गंगाजल का छिड़काव करें. इसके बाद आटे या रंग से एक चौक बनाएं. फिर राखी की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई, जल पात्र, नारियल आदि सामान रखें. राखी की थाली पूरी करने के बाद एक चौकी पर आसन बिछाकर भाई को उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठा दें और बहनें भी उसी दिशा की तरह मुख करके बैठें.
राखी बांधते समय कितने गांठ होती हैं शुभ
भाई के सिर पर एक रुमाल रख दें और तिलक लगाएं. अब राइट हैंड की कलाई पर राखी बांधें. राखी बांधते समय तीन गांठे बांधने की परंपरा है. मान्यता है कि राखी की तीन गांठ का महत्व ब्रह्मा, विष्णु और महेश से है. राखी बांधते समय ॐ येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल: मत्र का अवश्य जप करें. इसके बाद मिठाई खिलाकर आरती करें. अंत में भाई बहनों को गिफ्ट दें.

रक्षाबंधन 2025 पर भद्रा का साया नहीं रहने वाला है लेकिन राहुकाल भी ध्यान रखना पड़ता है. भद्रा की तरह राहुकाल में भी शुभ व मांगिलक कार्यक्रम नहीं किए जाते हैं. इसलिए 9 अगस्त को सुबह 09 बजकर 08 मिनट से 10 बजकर 47 मिनट तक राखी ना बांधें.
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त: 9 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 47 मिनट से दोपहर 1 बजकर 24 मिनट तक है. इस दिन रक्षाबंधन के लिए 7 घंटे 37 मिनट तक का शुभ मुहूर्त है.


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