फिनटेक फर्म भारतपे अब अपने आईपीओ को लेकर एक्टिव मोड में है। कंपनी के सीईओ नलिन नेगी ने पुष्टि की है कि आईपीओ के लिए बैंकरों की व्यवस्था की जा रही है और प्री-आईपीओ राउंड में ₹800-1200 करोड़ जुटाने की योजना है। आईपीओ के जरिए कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट होगी। शेयर बाजार में इसे प्रतिद्वंदी फर्म पेटीएम से टक्कर मिलेगी। बता दें कि एक अन्य कंपनी फोनपे भी आईपीओ लॉन्च करने की योजना बना रही है।
मुनाफे के मामले में पेटीएम से आगे
भारतपे मुनाफे के मामले में प्रतिद्वंदी पेटीएम से आगे है। कंपनी महज 7 वर्षों के परिचालन के बाद वित्त वर्ष 2025 में लाभ में आ गई जबकि इसके साइज से चार गुना बड़ी पेटीएम ने 15 वर्षों के बाद वित्त वर्ष 2026 में मुनाफा हासिल किया। बता दें कि पेटीएम का आईपीओ साल 2021 में आया था। जिन निवेशकों को आईपीओ अलॉट हुआ वह अब तक मुनाफे में नहीं आ सके हैं। कहने का मतलब है कि आईपीओ इश्यू प्राइस से शेयर की कीमत हमेशा नीचे ही रही है।
एक मॉडल पर काम करती हैं कंपनियां
भारतपे और पेटीएम दोनों ही एक समान फिनटेक मॉडल पर काम करती हैं। उदाहरण के लिए क्यूआर कोड, पीओएस सिस्टम और साउंडबॉक्स है। हालांकि, इन दोनों कंपनियों की स्ट्रैटजी अलग-अलग है। भारतपे को हाल ही में पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में काम करने के लिए RBI की मंजूरी मिली है। कंपनी सात एनबीएफसी के साथ साझेदारी में अपने उपयोगकर्ताओं को लोन प्रोडक्ट उपलब्ध कराती है और इस साल तीन और जोड़ने की योजना है। कंपनी मुकदमेबाजी से मुक्त है और कॉर्पोरेट प्रशासन को बनाए रखने के लिए प्रबंधन स्तर पर बदलाव किए गए हैं। कंपनी और इसके पूर्व सह-संस्थापक अशनीर ग्रोवर ने पिछले साल सितंबर में एक लंबे समय से चले आ रहे कानूनी विवाद का निपटारा किया था।
अतिरिक्त निवेश की योजना
कंपनी मौजूदा निवेशक कोट्यू मैनेजमेंट से 80-100 मिलियन डॉलर जुटाने के लिए भी बातचीत कर रही है। यह निवेश भारतपे की अलग-अलग मार्केट में उपस्थिति को मजबूत करेगा और तकनीकी विकास में सहायक होगा।
फिनटेक फर्म भारतपे अब अपने आईपीओ को लेकर एक्टिव मोड में है। कंपनी के सीईओ नलिन नेगी ने पुष्टि की है कि आईपीओ के लिए बैंकरों की व्यवस्था की जा रही है और प्री-आईपीओ राउंड में ₹800-1200 करोड़ जुटाने की योजना है। आईपीओ के जरिए कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट होगी। शेयर बाजार में इसे प्रतिद्वंदी फर्म पेटीएम से टक्कर मिलेगी। बता दें कि एक अन्य कंपनी फोनपे भी आईपीओ लॉन्च करने की योजना बना रही है।
मुनाफे के मामले में पेटीएम से आगे
भारतपे मुनाफे के मामले में प्रतिद्वंदी पेटीएम से आगे है। कंपनी महज 7 वर्षों के परिचालन के बाद वित्त वर्ष 2025 में लाभ में आ गई जबकि इसके साइज से चार गुना बड़ी पेटीएम ने 15 वर्षों के बाद वित्त वर्ष 2026 में मुनाफा हासिल किया। बता दें कि पेटीएम का आईपीओ साल 2021 में आया था। जिन निवेशकों को आईपीओ अलॉट हुआ वह अब तक मुनाफे में नहीं आ सके हैं। कहने का मतलब है कि आईपीओ इश्यू प्राइस से शेयर की कीमत हमेशा नीचे ही रही है।
एक मॉडल पर काम करती हैं कंपनियां
भारतपे और पेटीएम दोनों ही एक समान फिनटेक मॉडल पर काम करती हैं। उदाहरण के लिए क्यूआर कोड, पीओएस सिस्टम और साउंडबॉक्स है। हालांकि, इन दोनों कंपनियों की स्ट्रैटजी अलग-अलग है। भारतपे को हाल ही में पेमेंट एग्रीगेटर के रूप में काम करने के लिए RBI की मंजूरी मिली है। कंपनी सात एनबीएफसी के साथ साझेदारी में अपने उपयोगकर्ताओं को लोन प्रोडक्ट उपलब्ध कराती है और इस साल तीन और जोड़ने की योजना है। कंपनी मुकदमेबाजी से मुक्त है और कॉर्पोरेट प्रशासन को बनाए रखने के लिए प्रबंधन स्तर पर बदलाव किए गए हैं। कंपनी और इसके पूर्व सह-संस्थापक अशनीर ग्रोवर ने पिछले साल सितंबर में एक लंबे समय से चले आ रहे कानूनी विवाद का निपटारा किया था।
अतिरिक्त निवेश की योजना
कंपनी मौजूदा निवेशक कोट्यू मैनेजमेंट से 80-100 मिलियन डॉलर जुटाने के लिए भी बातचीत कर रही है। यह निवेश भारतपे की अलग-अलग मार्केट में उपस्थिति को मजबूत करेगा और तकनीकी विकास में सहायक होगा।



Journalist खबरीलाल














