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स्वास्थ्य के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने हेतु एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन:

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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मैटस विश्वविद्यालय, रायपुर के मनोविज्ञान विभाग द्वारा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने हेतु एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और समाज के बीच मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझाना एवं सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना था।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री एम. के. राउत, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, तथा विशिष्ट अतिथि श्री पुष्पेन्द्र मीणा, आईएएस एवं जीएसटी आयुक्त, छत्तीसगढ़ उपस्थित रहे। दोनों विशिष्ट अतिथियों ने मानसिक स्वास्थ्य के विषय पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

श्री एम. के. राउत ने अपने संबोधन में कहा कि “जब हम मानसिक रूप से अस्थिर या परेशान महसूस करें, तो किसी से बात करना बहुत आवश्यक है।” उन्होंने यह भी कहा कि मित्रता और संवाद हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा सहारा हैं।

श्री पुष्पेन्द्र मीणा ने अपने वक्तव्य में “संवेदना” पहल के बारे में विस्तार से बताया, जो छत्तीसगढ़ राज्य में लोगों के मनोवैज्ञानिक कल्याण के लिए कार्यरत है। उन्होंने बताया कि यह पहल दुर्ग, कोंडागांव और बिलासपुर जिलों में अत्यंत सफल रही है। डॉक्टरों की कमी, संकट प्रबंधन और सामुदायिक सहयोग जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए निम्हान्स, बेंगलुरु के सहयोग से एमबीबीएस डॉक्टरों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया एवं मनोचिकित्सीय दवाओं के साथ काउंसलिंग और विशेष रूप से संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (CBT) द्वारा मानसिक स्वास्थ्य पर सुधार दिया गया है | उन्होंने यह भी बताया कि टेली-कंसल्टेशन (Tele Consultation) भी संवेदना पहल का एक प्रमुख अंग रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकती है । इस पहल का मुख्य नारा “आओ बात करें” है, जो संवाद और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति खुली बातचीत को प्रोत्साहित करता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) के. पी. यादव ने की। उन्होंने कहा कि “मानसिक स्वास्थ्य केवल रोग का विषय नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन की गुणवत्ता का आधार है।”


इस अवसर पर मैटस विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री गोकुलानंदा पांडा ने कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्ययक्ष डॉ शाइस्ता अंसारी ने विद्यार्थियों को जीवन में उत्साह और आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा दी एवं इसस अवसर पर विभाग के सभी शिक्षकगन उपस्थित रहे | इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री गजराज पगारिया तथा महानिदेशक श्री प्रियेश पगारिया कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, किंतु सभी ने अपने शुभकामना संदेश विद्यार्थियों तक पहुँचाए और उन्हें दृढ़ निश्चय एवं परिश्रम के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।


विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मैटस विश्वविद्यालय, रायपुर के मनोविज्ञान विभाग द्वारा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने हेतु एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और समाज के बीच मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझाना एवं सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना था।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री एम. के. राउत, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, तथा विशिष्ट अतिथि श्री पुष्पेन्द्र मीणा, आईएएस एवं जीएसटी आयुक्त, छत्तीसगढ़ उपस्थित रहे। दोनों विशिष्ट अतिथियों ने मानसिक स्वास्थ्य के विषय पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

श्री एम. के. राउत ने अपने संबोधन में कहा कि “जब हम मानसिक रूप से अस्थिर या परेशान महसूस करें, तो किसी से बात करना बहुत आवश्यक है।” उन्होंने यह भी कहा कि मित्रता और संवाद हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा सहारा हैं।

श्री पुष्पेन्द्र मीणा ने अपने वक्तव्य में “संवेदना” पहल के बारे में विस्तार से बताया, जो छत्तीसगढ़ राज्य में लोगों के मनोवैज्ञानिक कल्याण के लिए कार्यरत है। उन्होंने बताया कि यह पहल दुर्ग, कोंडागांव और बिलासपुर जिलों में अत्यंत सफल रही है। डॉक्टरों की कमी, संकट प्रबंधन और सामुदायिक सहयोग जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए निम्हान्स, बेंगलुरु के सहयोग से एमबीबीएस डॉक्टरों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया एवं मनोचिकित्सीय दवाओं के साथ काउंसलिंग और विशेष रूप से संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (CBT) द्वारा मानसिक स्वास्थ्य पर सुधार दिया गया है | उन्होंने यह भी बताया कि टेली-कंसल्टेशन (Tele Consultation) भी संवेदना पहल का एक प्रमुख अंग रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकती है । इस पहल का मुख्य नारा “आओ बात करें” है, जो संवाद और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति खुली बातचीत को प्रोत्साहित करता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) के. पी. यादव ने की। उन्होंने कहा कि “मानसिक स्वास्थ्य केवल रोग का विषय नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन की गुणवत्ता का आधार है।”


इस अवसर पर मैटस विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री गोकुलानंदा पांडा ने कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्ययक्ष डॉ शाइस्ता अंसारी ने विद्यार्थियों को जीवन में उत्साह और आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा दी एवं इसस अवसर पर विभाग के सभी शिक्षकगन उपस्थित रहे | इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री गजराज पगारिया तथा महानिदेशक श्री प्रियेश पगारिया कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, किंतु सभी ने अपने शुभकामना संदेश विद्यार्थियों तक पहुँचाए और उन्हें दृढ़ निश्चय एवं परिश्रम के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।


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