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News (खबरीलाल न्यूज़) : भारत के पड़ोसी मुल्क में ISKCON को बताया चरमपंथी संगठन, बैन करने की हो रही मांग:

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ISKCON यानी इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ कृष्णा कॉन्शियसनेस को बांग्लादेश में प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है। कट्टरपंथी संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम ने शुक्रवार को इस मांग को लेकर जमकर प्रदर्शन किया। खास बात है कि संगठन इस्कॉन को चरमपंथी हिंदुत्व संगठन बताया है। ये घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब कुछ समय पहले ही बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के ठिकानों पर हमले की खबरें सामने आई थीं।





डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, चटगांव में हिफाजत-ए-इस्लाम ने विरोध प्रदर्शन किया था। रैली में शामिल हुए वक्ताओं ने कहा कि पहाड़ों और अल्पसंख्यकों पर जब हमला होता है, तो मुख्य सलाहकार सोशल मीडिया पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन जब एक इमाम या खातिब पर हमला होता है, तब कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जाती। रैली में अशरफ बिन याकूब ने कहा, 'सरकार को बांग्लादेश में ISKCON पर तत्काल प्रतिबंध लगा देना चाहिए।'





मौलाना याकूब ने वकील आलिफ की हत्या में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही कहा है कि आरोपियों को जमानत रद्द की जानी चाहिए। बीते साल 26 नवंबर को पुलिस और इस्कॉन के पूर्व सदस्य चिन्मय कृष्ण दास के समर्थकों के बीच हुई झड़प में आलिफ की मौत हो गई थी। हिफाजत कार्यकर्ताओं ने जुलूस भी निकाला, जिसमें इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने के नारे भी लगाए गए।





इसके अलावा शुक्रवार को इंतिफादा बांग्लादेश ने भी ढाका में प्रदर्शन किया और 6 मांगें अंतरिम सरकार के सामने रखीं। इनमें इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाना और समूह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और जांच की मांग भी शामिल थी। अल कायदा से जुड़े अंसारुल्लाह बंग्ला टीम के जसीमुद्दीन रहमानी ने कहा, 'इस्कॉन एक हिंदू संगठन नहीं है। यह यहूदियों का चरमपंथी संगठन है।'





रहमानी ने कहा, 'वो एक के बाद एक अपराध कर रहे हैं। इस्कॉन पर प्रतिबंध समय की मांग है।' इंतिफादा बांग्लादेश के सदस्य अहमद रफीक ने कहा, 'हम एक इमाम ने इस्कॉन के खिलाफ बात की, तो उनका अपहरण हो गया, चेन में बांधा गया और पीटा गया। इसके बाद भी सरकार चुप है और आरोपियों को न्याय से बचने दे रही है...।'





शेख हसीना सरकार गिरने के बाद इस्कॉन का विरोध बढ़ा





अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में इस्कॉन खासे विरोध का सामना कर रहा है। कई मंदिरों और केंद्रों को निशाना बनाया जा चुका है और हिंदू समुदाय के प्रमुख नेताओं में शामिल कृष्ण दास प्रभु को जेल में रखा गया है। खबर है कि जनवरी में बांग्लादेश फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट ने इस्कॉन के 17 सदस्यों के बैंक खाते फ्रीज कर दिए थे।




ISKCON यानी इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ कृष्णा कॉन्शियसनेस को बांग्लादेश में प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है। कट्टरपंथी संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम ने शुक्रवार को इस मांग को लेकर जमकर प्रदर्शन किया। खास बात है कि संगठन इस्कॉन को चरमपंथी हिंदुत्व संगठन बताया है। ये घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब कुछ समय पहले ही बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के ठिकानों पर हमले की खबरें सामने आई थीं।





डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, चटगांव में हिफाजत-ए-इस्लाम ने विरोध प्रदर्शन किया था। रैली में शामिल हुए वक्ताओं ने कहा कि पहाड़ों और अल्पसंख्यकों पर जब हमला होता है, तो मुख्य सलाहकार सोशल मीडिया पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन जब एक इमाम या खातिब पर हमला होता है, तब कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जाती। रैली में अशरफ बिन याकूब ने कहा, 'सरकार को बांग्लादेश में ISKCON पर तत्काल प्रतिबंध लगा देना चाहिए।'





मौलाना याकूब ने वकील आलिफ की हत्या में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही कहा है कि आरोपियों को जमानत रद्द की जानी चाहिए। बीते साल 26 नवंबर को पुलिस और इस्कॉन के पूर्व सदस्य चिन्मय कृष्ण दास के समर्थकों के बीच हुई झड़प में आलिफ की मौत हो गई थी। हिफाजत कार्यकर्ताओं ने जुलूस भी निकाला, जिसमें इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने के नारे भी लगाए गए।





इसके अलावा शुक्रवार को इंतिफादा बांग्लादेश ने भी ढाका में प्रदर्शन किया और 6 मांगें अंतरिम सरकार के सामने रखीं। इनमें इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाना और समूह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और जांच की मांग भी शामिल थी। अल कायदा से जुड़े अंसारुल्लाह बंग्ला टीम के जसीमुद्दीन रहमानी ने कहा, 'इस्कॉन एक हिंदू संगठन नहीं है। यह यहूदियों का चरमपंथी संगठन है।'





रहमानी ने कहा, 'वो एक के बाद एक अपराध कर रहे हैं। इस्कॉन पर प्रतिबंध समय की मांग है।' इंतिफादा बांग्लादेश के सदस्य अहमद रफीक ने कहा, 'हम एक इमाम ने इस्कॉन के खिलाफ बात की, तो उनका अपहरण हो गया, चेन में बांधा गया और पीटा गया। इसके बाद भी सरकार चुप है और आरोपियों को न्याय से बचने दे रही है...।'





शेख हसीना सरकार गिरने के बाद इस्कॉन का विरोध बढ़ा





अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में इस्कॉन खासे विरोध का सामना कर रहा है। कई मंदिरों और केंद्रों को निशाना बनाया जा चुका है और हिंदू समुदाय के प्रमुख नेताओं में शामिल कृष्ण दास प्रभु को जेल में रखा गया है। खबर है कि जनवरी में बांग्लादेश फाइनेंशियल इंटेलीजेंस यूनिट ने इस्कॉन के 17 सदस्यों के बैंक खाते फ्रीज कर दिए थे।



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