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Bilaspur (खबरीलाल न्यूज़) :: सिटी मजिस्ट्रेट रजनी भगत और उनकी स्टेनो जूही सोम पर 5000 की रिश्वत मांगने का लगा आरोप :

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बिलासपुर। जिला अधिवक्ता संघ ने सिटी मजिस्ट्रेट रजनी भगत और उनकी स्टेनो जूही सोम पर जमानत प्रकरण में 5000 की रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगाया है। संघ के सचिव रवि कुमार पांडे ने कलेक्टर संजय अग्रवाल को लिखित शिकायत सौंपकर सूक्ष्म और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

रवि कुमार पांडे ने पत्रकारों से कहा, 31 जनवरी 2026 को हमारे एक अधिवक्ता सदस्य ने धारा 151 के मामले में अपने पक्षकार की जमानत के लिए विधिवत आवेदन, स्वयं का मुचलका और सक्षम जमानतदार न्यायालय में प्रस्तुत किया। इसके बावजूद स्टेनो जूही सोम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यहां दस्तावेज से काम नहीं होगा, जमानत चाहिए तो 5000 देने होंगे, अन्यथा अभियुक्त को जेल जाना पड़ेगा।”

उन्होंने आगे कहा, “जब अधिवक्ता सदस्य ने आपत्ति जताई और कहा कि सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत हैं, तब स्टेनो ने सिटी मजिस्ट्रेट रजनी भगत से दूरभाष पर चर्चा की। हमारे सदस्य के अनुसार वहां भी राशि की मांग दोहराई गई। पैसे देने से इनकार करने पर सक्षम जमानतदार होने के बावजूद पक्षकार को जेल भेज दिया गया।”

रवि कुमार पांडे ने दावा किया, “बाद में ₹5000 दिए जाने के पश्चात बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज की मांग के जमानत दे दी गई। यदि यह तथ्य सत्य है तो यह न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न है।”

उन्होंने कहा, “धारा 151 जमानती प्रकृति की है और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय Arnesh Kumar v. State of Bihar अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य में अनावश्यक गिरफ्तारी और जेल भेजने पर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद यदि जमानत रोकी गई तो यह अत्यंत गंभीर विषय है।”

संघ के सचिव ने स्पष्ट किया, “हमारी मांग है कि पूरे प्रकरण की सूक्ष्म जांच हो, दूरभाष विवरण, न्यायालयीन अभिलेख और उपलब्ध दृश्य रिकॉर्डिंग की जांच की जाए। यदि दोष सिद्ध होता है तो कठोर विभागीय और विधिक कार्रवाई हो। यदि हमें न्यायसंगत कार्रवाई नहीं दिखी तो अधिवक्ता संघ आगे की कार्रवाई के लिए बाध्य होगा।”


बिलासपुर। जिला अधिवक्ता संघ ने सिटी मजिस्ट्रेट रजनी भगत और उनकी स्टेनो जूही सोम पर जमानत प्रकरण में 5000 की रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगाया है। संघ के सचिव रवि कुमार पांडे ने कलेक्टर संजय अग्रवाल को लिखित शिकायत सौंपकर सूक्ष्म और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

रवि कुमार पांडे ने पत्रकारों से कहा, 31 जनवरी 2026 को हमारे एक अधिवक्ता सदस्य ने धारा 151 के मामले में अपने पक्षकार की जमानत के लिए विधिवत आवेदन, स्वयं का मुचलका और सक्षम जमानतदार न्यायालय में प्रस्तुत किया। इसके बावजूद स्टेनो जूही सोम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यहां दस्तावेज से काम नहीं होगा, जमानत चाहिए तो 5000 देने होंगे, अन्यथा अभियुक्त को जेल जाना पड़ेगा।”

उन्होंने आगे कहा, “जब अधिवक्ता सदस्य ने आपत्ति जताई और कहा कि सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत हैं, तब स्टेनो ने सिटी मजिस्ट्रेट रजनी भगत से दूरभाष पर चर्चा की। हमारे सदस्य के अनुसार वहां भी राशि की मांग दोहराई गई। पैसे देने से इनकार करने पर सक्षम जमानतदार होने के बावजूद पक्षकार को जेल भेज दिया गया।”

रवि कुमार पांडे ने दावा किया, “बाद में ₹5000 दिए जाने के पश्चात बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज की मांग के जमानत दे दी गई। यदि यह तथ्य सत्य है तो यह न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न है।”

उन्होंने कहा, “धारा 151 जमानती प्रकृति की है और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय Arnesh Kumar v. State of Bihar अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य में अनावश्यक गिरफ्तारी और जेल भेजने पर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद यदि जमानत रोकी गई तो यह अत्यंत गंभीर विषय है।”

संघ के सचिव ने स्पष्ट किया, “हमारी मांग है कि पूरे प्रकरण की सूक्ष्म जांच हो, दूरभाष विवरण, न्यायालयीन अभिलेख और उपलब्ध दृश्य रिकॉर्डिंग की जांच की जाए। यदि दोष सिद्ध होता है तो कठोर विभागीय और विधिक कार्रवाई हो। यदि हमें न्यायसंगत कार्रवाई नहीं दिखी तो अधिवक्ता संघ आगे की कार्रवाई के लिए बाध्य होगा।”


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