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National (खबरीलाल न्यूज़) :: नए केंद्र शासित प्रदेश को लेकर चल रहे दावे फर्जी, PIB ने दी जानकारी:

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नई दिल्ली: केंंद्र सरकार ने शनिवार को सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को पूरी तरह गलत बताया, जिनमें कहा जा रहा था कि केंद्र सरकार रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना बना रही है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस तरह की खबरों का कोई आधार नहीं है और यह सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारी है।

भारत सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेकिंग एजेंसी प्रेस इन्फार्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) ने स्पष्ट किया है कि सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने के दावे पूरी तरह फर्जी हैं।

पीआईबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि सरकार सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना बना रही है। यह दावा फर्जी है।”

एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार के भीतर ऐसे किसी प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं चल रही है। पीआईबी ने दोहराया कि सोशल मीडिया पर साझा की जा रही जानकारी भ्रामक और अपुष्ट है। लोगों को सावधानी बरतने की सलाह देते हुए पीआईबी ने कहा, “ऑनलाइन किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से उसकी पुष्टि जरूर करें।”

दरअसल, सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि केंद्र सरकार सुरक्षा मजबूत करने के लिए सिलिगुड़ी कॉरिडोर के आसपास के जिलों को मिलाकर नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने पर विचार कर रही है।

इन अफवाहों के मुताबिक प्रस्तावित क्षेत्र में बिहार के पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार जिलों के साथ पश्चिम बंगाल के मालदा और उत्तर दिनाजपुर जिलों को शामिल किया जा सकता है। हालांकि सरकार ने अब स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा कोई आधिकारिक प्रस्ताव मौजूद नहीं है।

सिलिगुड़ी कॉरिडोर जिसे अक्सर “चिकन नेक” कहा जाता है, उत्तरी बंगाल में सिलिगुड़ी के आसपास स्थित एक संकीर्ण भूभाग है। सबसे संकरे हिस्से में इसकी चौड़ाई लगभग 20 से 22 किलोमीटर और लंबाई करीब 60 किलोमीटर है।

यह कॉरिडोर भारत के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा और सिक्किम से जोड़ने वाला एकमात्र स्थलीय मार्ग है। इसलिए यह क्षेत्र देश के लिए आर्थिक, परिवहन और सैन्य दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।


नई दिल्ली: केंंद्र सरकार ने शनिवार को सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को पूरी तरह गलत बताया, जिनमें कहा जा रहा था कि केंद्र सरकार रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना बना रही है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस तरह की खबरों का कोई आधार नहीं है और यह सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारी है।

भारत सरकार की आधिकारिक फैक्ट-चेकिंग एजेंसी प्रेस इन्फार्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) ने स्पष्ट किया है कि सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने के दावे पूरी तरह फर्जी हैं।

पीआईबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि सरकार सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना बना रही है। यह दावा फर्जी है।”

एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार के भीतर ऐसे किसी प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं चल रही है। पीआईबी ने दोहराया कि सोशल मीडिया पर साझा की जा रही जानकारी भ्रामक और अपुष्ट है। लोगों को सावधानी बरतने की सलाह देते हुए पीआईबी ने कहा, “ऑनलाइन किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से उसकी पुष्टि जरूर करें।”

दरअसल, सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि केंद्र सरकार सुरक्षा मजबूत करने के लिए सिलिगुड़ी कॉरिडोर के आसपास के जिलों को मिलाकर नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने पर विचार कर रही है।

इन अफवाहों के मुताबिक प्रस्तावित क्षेत्र में बिहार के पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार जिलों के साथ पश्चिम बंगाल के मालदा और उत्तर दिनाजपुर जिलों को शामिल किया जा सकता है। हालांकि सरकार ने अब स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा कोई आधिकारिक प्रस्ताव मौजूद नहीं है।

सिलिगुड़ी कॉरिडोर जिसे अक्सर “चिकन नेक” कहा जाता है, उत्तरी बंगाल में सिलिगुड़ी के आसपास स्थित एक संकीर्ण भूभाग है। सबसे संकरे हिस्से में इसकी चौड़ाई लगभग 20 से 22 किलोमीटर और लंबाई करीब 60 किलोमीटर है।

यह कॉरिडोर भारत के मुख्य भूभाग को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा और सिक्किम से जोड़ने वाला एकमात्र स्थलीय मार्ग है। इसलिए यह क्षेत्र देश के लिए आर्थिक, परिवहन और सैन्य दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।


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