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Raipur (खबरीलाल न्यूज़) :: प्रोजेक्ट औषधि बना महिला सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम, ब्राम्ही की जैविक खेती से आत्मनिर्भर बनी श्रीमती गीता वर्मा :

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रायपुर, 27 मई 2026/ प्रोजेक्ट औषधि के तहत ब्राम्ही औषधि की खेती कर श्रीमती गीता वर्मा ने आत्मनिर्भरता एवं महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल प्रस्तुत की है। खास बात यह है कि उन्होंने इस खेती में रासायनिक खाद का उपयोग न कर वर्मी खाद के जरिए औषधि का उत्पादन किया है।श्रीमती वर्मा आरंग विकासखण्ड के ग्राम चटौद के वैभव महिला स्व-सहायता समूह की एक सक्रीय सदस्य हैं। उनके द्वारा जुलाई माह में ब्राम्ही खेती का कार्य प्रारंभ किया गया, जिसकी जुताई, बुवाई एवं कटाई में उन्हें लगभग 20 हजार रुपए की लागत आई, जबकि प्रथम कटाई में ही उन्हें 25 हजार रुपए की आय प्राप्त हुई। श्रीमती वर्मा की यह पहल क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। वे कम लागत एवं जैविक पद्धति से औषधीय ब्राम्ही की खेती कर बेहतर लाभ प्राप्त कर रही हैं।

उल्लेखनीय है कि जिले में प्रोजेक्ट औषधि के अंतर्गत औषधीय पौधरोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत जिले में कुल 153.86 एकड़ भूमि चिन्हांकित की गई है, जिसमें से वर्तमान में 42.21 एकड़ क्षेत्र में औषधीय पौधरोपण पूर्ण किया जा चुका है। यह कार्य स्व-सहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है, जिसमें विशेष रूप से बच एवं ब्राम्ही जैसे औषधीय पौधों का रोपण किया गया है।


रायपुर, 27 मई 2026/ प्रोजेक्ट औषधि के तहत ब्राम्ही औषधि की खेती कर श्रीमती गीता वर्मा ने आत्मनिर्भरता एवं महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल प्रस्तुत की है। खास बात यह है कि उन्होंने इस खेती में रासायनिक खाद का उपयोग न कर वर्मी खाद के जरिए औषधि का उत्पादन किया है।श्रीमती वर्मा आरंग विकासखण्ड के ग्राम चटौद के वैभव महिला स्व-सहायता समूह की एक सक्रीय सदस्य हैं। उनके द्वारा जुलाई माह में ब्राम्ही खेती का कार्य प्रारंभ किया गया, जिसकी जुताई, बुवाई एवं कटाई में उन्हें लगभग 20 हजार रुपए की लागत आई, जबकि प्रथम कटाई में ही उन्हें 25 हजार रुपए की आय प्राप्त हुई। श्रीमती वर्मा की यह पहल क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। वे कम लागत एवं जैविक पद्धति से औषधीय ब्राम्ही की खेती कर बेहतर लाभ प्राप्त कर रही हैं।

उल्लेखनीय है कि जिले में प्रोजेक्ट औषधि के अंतर्गत औषधीय पौधरोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके तहत जिले में कुल 153.86 एकड़ भूमि चिन्हांकित की गई है, जिसमें से वर्तमान में 42.21 एकड़ क्षेत्र में औषधीय पौधरोपण पूर्ण किया जा चुका है। यह कार्य स्व-सहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है, जिसमें विशेष रूप से बच एवं ब्राम्ही जैसे औषधीय पौधों का रोपण किया गया है।


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