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News (खबरीलाल न्यूज़) : क्यों काले होते हैं अफ्रीका के लोग? श्राप नहीं, भगवान ने दिया है आशीर्वाद!:

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भारत में आपको हर रंग के लोग मिल जाएंगे– गोरे, गेहुंआ, सांवले और काले. लेकिन जब बात अफ्रीका की आती है तो ज्यादातर लोग गहरे काले रंग के क्यों दिखते हैं? कई लोग इसे श्राप या दुर्भाग्य समझते हैं, लेकिन असलियत बिल्कुल उलट है. वैज्ञानिकों के अनुसार काला रंग अफ्रीका के लोगों के लिए भगवान का आशीर्वाद है. यह उनकी त्वचा को वहां की तेज और खतरनाक धूप से बचाता है.


मेलेनिन है असली हीरो

हमारी त्वचा का रंग मेलेनिन नामक पिगमेंट से तय होता है. मेलेनिन जितना ज्यादा, रंग उतना गहरा होता है. अफ्रीका में सूरज की किरणें बहुत तेज होती हैं. वहां यूवी किरणों की मात्रा बहुत अधिक है. मेलेनिन इन खतरनाक किरणों को सोख लेता है और त्वचा को स्किन कैंसर, झुर्रियों और अन्य नुकसान से बचाता है. यही वजह है कि अफ्रीकी मूल के लोगों में स्किन कैंसर की दर बहुत कम है. लाखों साल पहले जब मानव अफ्रीका से निकलकर दुनिया के दूसरे हिस्सों में फैला, तब अलग-अलग जलवायु के अनुसार उनका रंग भी बदलता गया. जहां धूप कम थी, वहां मेलेनिन कम हुआ और रंग गोरा होता गया. लेकिन अफ्रीका में जहां सूरज सीधा और तेज है, वहां मेलेनिन ज्यादा बना रहा. यह प्रकृति का अनोखा इंतजाम है. काला रंग सिर्फ रंग नहीं, सुरक्षा कवच है.

क्या-क्या फायदा

मेलेनिन तेज यूवी किरणों से डीएनए को बचाता है. इसकी वजह से स्किन कैंसर का खतरा कम होता है. साथ ही ये शरीर में विटामिन D के संतुलन में मदद करता है. इसकी वजह से गर्मी में भी त्वचा को स्वस्थ रहती है. अध्ययनों में पाया गया है कि गहरे रंग की त्वचा वाले लोग तेज धूप में ज्यादा देर तक बिना नुकसान के रह सकते हैं. यही उनका प्राकृतिक आशीर्वाद है. विकासवाद के अनुसार, अफ्रीका मानव सभ्यता का उद्गम स्थल है. यहां की जलवायु के अनुकूल होने के लिए काला रंग सबसे उपयुक्त था. जब इंसान यूरोप और एशिया की ओर बढ़ा, जहां धूप कम थी और ठंड ज्यादा, तो शरीर को ज्यादा विटामिन D की जरूरत पड़ी. इसलिए मेलेनिन कम हुआ और रंग गोरा हो गया. यह पूरी प्रक्रिया हजारों सालों में हुई.

आज के समय में महत्व



























आधुनिक समय में भी काला रंग फायदेमंद साबित हो रहा है. ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ती यूवी किरणों के बीच गहरे रंग वाले लोग ज्यादा सुरक्षित हैं. हालांकि हर रंग सुंदर है और हर रंग की अपनी खूबियां हैं. गोरे रंग वाले लोग ठंडे इलाकों में बेहतर ढल पाते हैं. भारत में भी विभिन्न रंगों के लोग हैं क्योंकि हमारी भौगोलिक स्थिति विविध है. उत्तर में गोरे, दक्षिण में गहरे रंग वाले लोग होते हैं. यह हमारी विविधता है.


भारत में आपको हर रंग के लोग मिल जाएंगे– गोरे, गेहुंआ, सांवले और काले. लेकिन जब बात अफ्रीका की आती है तो ज्यादातर लोग गहरे काले रंग के क्यों दिखते हैं? कई लोग इसे श्राप या दुर्भाग्य समझते हैं, लेकिन असलियत बिल्कुल उलट है. वैज्ञानिकों के अनुसार काला रंग अफ्रीका के लोगों के लिए भगवान का आशीर्वाद है. यह उनकी त्वचा को वहां की तेज और खतरनाक धूप से बचाता है.


मेलेनिन है असली हीरो

हमारी त्वचा का रंग मेलेनिन नामक पिगमेंट से तय होता है. मेलेनिन जितना ज्यादा, रंग उतना गहरा होता है. अफ्रीका में सूरज की किरणें बहुत तेज होती हैं. वहां यूवी किरणों की मात्रा बहुत अधिक है. मेलेनिन इन खतरनाक किरणों को सोख लेता है और त्वचा को स्किन कैंसर, झुर्रियों और अन्य नुकसान से बचाता है. यही वजह है कि अफ्रीकी मूल के लोगों में स्किन कैंसर की दर बहुत कम है. लाखों साल पहले जब मानव अफ्रीका से निकलकर दुनिया के दूसरे हिस्सों में फैला, तब अलग-अलग जलवायु के अनुसार उनका रंग भी बदलता गया. जहां धूप कम थी, वहां मेलेनिन कम हुआ और रंग गोरा होता गया. लेकिन अफ्रीका में जहां सूरज सीधा और तेज है, वहां मेलेनिन ज्यादा बना रहा. यह प्रकृति का अनोखा इंतजाम है. काला रंग सिर्फ रंग नहीं, सुरक्षा कवच है.

क्या-क्या फायदा

मेलेनिन तेज यूवी किरणों से डीएनए को बचाता है. इसकी वजह से स्किन कैंसर का खतरा कम होता है. साथ ही ये शरीर में विटामिन D के संतुलन में मदद करता है. इसकी वजह से गर्मी में भी त्वचा को स्वस्थ रहती है. अध्ययनों में पाया गया है कि गहरे रंग की त्वचा वाले लोग तेज धूप में ज्यादा देर तक बिना नुकसान के रह सकते हैं. यही उनका प्राकृतिक आशीर्वाद है. विकासवाद के अनुसार, अफ्रीका मानव सभ्यता का उद्गम स्थल है. यहां की जलवायु के अनुकूल होने के लिए काला रंग सबसे उपयुक्त था. जब इंसान यूरोप और एशिया की ओर बढ़ा, जहां धूप कम थी और ठंड ज्यादा, तो शरीर को ज्यादा विटामिन D की जरूरत पड़ी. इसलिए मेलेनिन कम हुआ और रंग गोरा हो गया. यह पूरी प्रक्रिया हजारों सालों में हुई.

आज के समय में महत्व



























आधुनिक समय में भी काला रंग फायदेमंद साबित हो रहा है. ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ती यूवी किरणों के बीच गहरे रंग वाले लोग ज्यादा सुरक्षित हैं. हालांकि हर रंग सुंदर है और हर रंग की अपनी खूबियां हैं. गोरे रंग वाले लोग ठंडे इलाकों में बेहतर ढल पाते हैं. भारत में भी विभिन्न रंगों के लोग हैं क्योंकि हमारी भौगोलिक स्थिति विविध है. उत्तर में गोरे, दक्षिण में गहरे रंग वाले लोग होते हैं. यह हमारी विविधता है.


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