आज 22 जून को धूमावती जयंती मनाई जा रही है। यह जयंती हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन मनाई जाती है। धर्म शास्त्रों में मां धूमावती को दस महाविद्याओं में सातवीं देवी माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, माता सती महादेव के अपमान से दुखी होकर यज्ञकुंड में कूद गईं थीं और आत्म दाह कर लिया था।
मां धूमावती की महिमा
धर्म शास्त्रों में मां धूमावती की महिमा का विस्तृत वर्णन किया गया है। धार्मिक मान्यता है कि, माता धूमावती की विधि-विधान से पूजा करने, उन्हें उड़द की दाल की खिचड़ी का भोग लगाने से मां बहुत प्रसन्न होती है। मान्यता ये भी है कि माता की पूजा करने से केतु ग्रह दोष से छुटकारा मिल जाता है। यही नहीं इस दिन की गई माता की पूजा और आरती से दुख, शारीरिक कष्ट और हर प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिल प्राप्त हो जाती है। यहां पढ़ते हैं माता धूमावती की आरती.
यहां पढ़ते हैं माता धूमावती की आरती
ॐ जय धूमावती माता, मैया जय धूमावती माता।
तुम हो जगत की स्वामिनी, दुख भय की त्राता॥
काक ध्वजा रथ सोहत, सूँप लिए कर में।
भक्तों के सब संकट, दूर करूँ छिन में॥
रूप भयानक तेरा, दुष्टों के भयकारी।
भक्तों की हो माता, तुम ही हितकारी॥
श्वेत वस्त्र तन सोहे, मस्तक सिन्दूर धरे।
असुरन के दल को तुम, पल में संहारे॥
तुम हो आदि शक्ति, विद्या की दाती।
जो जन ध्यान लगावे, उसकी किस्मत जगाती॥
उड़द खिचड़ी भोग लगावे, पुष्प चढ़े प्यारे।
शनिवार के दिन जो नर, मन्दिर में आवे॥
धूमावती मैया की आरती, जो कोई नर गावे।
तन-मन धन सुख पावे, सब संकट मिट जावे॥
ॐ जय धूमावती माता, मैया जय धूमावती माता।
आज 22 जून को धूमावती जयंती मनाई जा रही है। यह जयंती हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन मनाई जाती है। धर्म शास्त्रों में मां धूमावती को दस महाविद्याओं में सातवीं देवी माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, माता सती महादेव के अपमान से दुखी होकर यज्ञकुंड में कूद गईं थीं और आत्म दाह कर लिया था।
मां धूमावती की महिमा
धर्म शास्त्रों में मां धूमावती की महिमा का विस्तृत वर्णन किया गया है। धार्मिक मान्यता है कि, माता धूमावती की विधि-विधान से पूजा करने, उन्हें उड़द की दाल की खिचड़ी का भोग लगाने से मां बहुत प्रसन्न होती है। मान्यता ये भी है कि माता की पूजा करने से केतु ग्रह दोष से छुटकारा मिल जाता है। यही नहीं इस दिन की गई माता की पूजा और आरती से दुख, शारीरिक कष्ट और हर प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिल प्राप्त हो जाती है। यहां पढ़ते हैं माता धूमावती की आरती.
यहां पढ़ते हैं माता धूमावती की आरती
ॐ जय धूमावती माता, मैया जय धूमावती माता।
तुम हो जगत की स्वामिनी, दुख भय की त्राता॥
काक ध्वजा रथ सोहत, सूँप लिए कर में।
भक्तों के सब संकट, दूर करूँ छिन में॥
रूप भयानक तेरा, दुष्टों के भयकारी।
भक्तों की हो माता, तुम ही हितकारी॥
श्वेत वस्त्र तन सोहे, मस्तक सिन्दूर धरे।
असुरन के दल को तुम, पल में संहारे॥
तुम हो आदि शक्ति, विद्या की दाती।
जो जन ध्यान लगावे, उसकी किस्मत जगाती॥
उड़द खिचड़ी भोग लगावे, पुष्प चढ़े प्यारे।
शनिवार के दिन जो नर, मन्दिर में आवे॥
धूमावती मैया की आरती, जो कोई नर गावे।
तन-मन धन सुख पावे, सब संकट मिट जावे॥
ॐ जय धूमावती माता, मैया जय धूमावती माता।


Journalist खबरीलाल














