
विधानसभा में उठे प्रश्नों पर मंत्री ने दिया स्पष्ट जवाब, कहा— यदि किसी स्तर पर तथ्यात्मक त्रुटि हुई है तो निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर होगी कठोर कार्रवाई, धरोहरों के संरक्षण से कोई समझौता नहीं।
रिपोर्टर/सौरभ साहू सरगुजा, अंबिकापुर, छत्तीसगढ़।
सरगुजा/अम्बिकापुर/ दिनांक ,17 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों एवं प्राचीन ताम्रपत्रों से जुड़े मुद्दे पर हुई चर्चा के बाद संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने सरकार का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के लिए पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि विभागीय स्तर पर किसी प्रकार की तथ्यात्मक त्रुटि या लापरवाही सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और वहां प्रस्तुत की जाने वाली प्रत्येक जानकारी तथ्यपरक एवं प्रमाणिक होनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी द्वारा अनजाने में या लापरवाहीवश गलत तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं, तो सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उसकी जांच कराएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को नियमों से ऊपर नहीं मानती और जवाबदेही तय करना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य किसी भी ऐतिहासिक तथ्य को विवाद का विषय बनाना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक अध्ययन सुनिश्चित करना है। राज्य में प्राचीन मंदिरों, शिलालेखों, ताम्रपत्रों, पांडुलिपियों और अन्य पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों एवं संबंधित संस्थानों के सहयोग से इन अभिलेखों का दस्तावेजीकरण और सत्यापन भी किया जा रहा है। मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि किसी भी ऐतिहासिक अभिलेख की भाषा, लिपि अथवा प्रामाणिकता का अंतिम निर्धारण विशेषज्ञों, पुरातत्वविदों और संबंधित संस्थानों के अध्ययन के आधार पर किया जाता है। यदि किसी विषय पर मतभेद या नई जानकारी सामने आती है, तो सरकार उसका स्वागत करती है और तथ्यों के आधार पर आवश्यक निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इतिहास और संस्कृति जैसे विषयों पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय शोध, प्रमाण और विशेषज्ञों की राय को महत्व दिया जाना चाहिए।
छत्तीसगढ़ पर्यटन संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पर्यटन स्थलों का विकास, धार्मिक स्थलों का उन्नयन, लोककला एवं लोकसंस्कृति का संरक्षण तथा पुरातात्विक धरोहरों के संवर्धन के लिए अनेक योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल विरासत को सुरक्षित रखना ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक उसे संरक्षित रूप में पहुंचाना भी है।। उन्होंने विपक्ष द्वारा उठाए गए प्रश्नों पर कहा कि लोकतंत्र में प्रश्न पूछना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन प्रत्येक विषय पर तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर चर्चा होना अधिक आवश्यक है। यदि किसी जनप्रतिनिधि या विशेषज्ञ के पास इस विषय से संबंधित अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज हैं, तो सरकार उनका परीक्षण कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार किसी भी तथ्य को छिपाने के बजाय पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सत्य को सामने लाने में विश्वास रखती है। कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने दोहराया कि यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या गलत जानकारी देने की पुष्टि होती है तो उसके विरुद्ध नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए विभागीय प्रक्रियाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।
प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए अंत में कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने दो टूक में कहा - छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर पूरे प्रदेश की अमूल्य संपत्ति है। इसका संरक्षण हमारी नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है। सरकार तथ्यों, पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। यदि कहीं कोई त्रुटि हुई है तो उसे सुधारा जाएगा और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी, लेकिन बिना संपूर्ण तथ्यों के भ्रम फैलाना प्रदेश के हित में नहीं है। हमारा लक्ष्य राजनीति नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और सम्मान है।

विधानसभा में उठे प्रश्नों पर मंत्री ने दिया स्पष्ट जवाब, कहा— यदि किसी स्तर पर तथ्यात्मक त्रुटि हुई है तो निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर होगी कठोर कार्रवाई, धरोहरों के संरक्षण से कोई समझौता नहीं।
रिपोर्टर/सौरभ साहू सरगुजा, अंबिकापुर, छत्तीसगढ़।
सरगुजा/अम्बिकापुर/ दिनांक ,17 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों एवं प्राचीन ताम्रपत्रों से जुड़े मुद्दे पर हुई चर्चा के बाद संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने सरकार का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के लिए पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि विभागीय स्तर पर किसी प्रकार की तथ्यात्मक त्रुटि या लापरवाही सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और वहां प्रस्तुत की जाने वाली प्रत्येक जानकारी तथ्यपरक एवं प्रमाणिक होनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी द्वारा अनजाने में या लापरवाहीवश गलत तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं, तो सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उसकी जांच कराएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को नियमों से ऊपर नहीं मानती और जवाबदेही तय करना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य किसी भी ऐतिहासिक तथ्य को विवाद का विषय बनाना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक अध्ययन सुनिश्चित करना है। राज्य में प्राचीन मंदिरों, शिलालेखों, ताम्रपत्रों, पांडुलिपियों और अन्य पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों एवं संबंधित संस्थानों के सहयोग से इन अभिलेखों का दस्तावेजीकरण और सत्यापन भी किया जा रहा है। मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि किसी भी ऐतिहासिक अभिलेख की भाषा, लिपि अथवा प्रामाणिकता का अंतिम निर्धारण विशेषज्ञों, पुरातत्वविदों और संबंधित संस्थानों के अध्ययन के आधार पर किया जाता है। यदि किसी विषय पर मतभेद या नई जानकारी सामने आती है, तो सरकार उसका स्वागत करती है और तथ्यों के आधार पर आवश्यक निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इतिहास और संस्कृति जैसे विषयों पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय शोध, प्रमाण और विशेषज्ञों की राय को महत्व दिया जाना चाहिए।
छत्तीसगढ़ पर्यटन संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पर्यटन स्थलों का विकास, धार्मिक स्थलों का उन्नयन, लोककला एवं लोकसंस्कृति का संरक्षण तथा पुरातात्विक धरोहरों के संवर्धन के लिए अनेक योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल विरासत को सुरक्षित रखना ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक उसे संरक्षित रूप में पहुंचाना भी है।। उन्होंने विपक्ष द्वारा उठाए गए प्रश्नों पर कहा कि लोकतंत्र में प्रश्न पूछना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन प्रत्येक विषय पर तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर चर्चा होना अधिक आवश्यक है। यदि किसी जनप्रतिनिधि या विशेषज्ञ के पास इस विषय से संबंधित अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज हैं, तो सरकार उनका परीक्षण कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार किसी भी तथ्य को छिपाने के बजाय पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सत्य को सामने लाने में विश्वास रखती है। कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने दोहराया कि यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या गलत जानकारी देने की पुष्टि होती है तो उसके विरुद्ध नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए विभागीय प्रक्रियाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।
प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए अंत में कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने दो टूक में कहा - छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर पूरे प्रदेश की अमूल्य संपत्ति है। इसका संरक्षण हमारी नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है। सरकार तथ्यों, पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। यदि कहीं कोई त्रुटि हुई है तो उसे सुधारा जाएगा और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी, लेकिन बिना संपूर्ण तथ्यों के भ्रम फैलाना प्रदेश के हित में नहीं है। हमारा लक्ष्य राजनीति नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और सम्मान है।


Journalist खबरीलाल















